अल-अंबिया · 76/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَنُوحًا إِذْ نَادَىٰ مِن قَبْلُ فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ ۝٧٦
Wa noohan iz naadaa min qablu fastajabnaa lahoo fanajjainaahu wa ahlahoo minal karbil `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल लूत से भी) पहले (हमने) नूह को नबूवत पर फ़ायज़ किया जब उन्होंने (हमको) आवाज़ दी तो हमने उनकी (दुआ) सुन ली फिर उनको और उनके साथियों को (तूफ़ान की) बड़ी सख्त मुसीबत से नजात दी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • नूहन: पैगंबर नूह (अलैहिस्सलाम)
  • नादा: पुकारा, दुआ की
  • मिन क़ब्लु: इससे पहले (इब्राहीम और लूत से पहले)
  • फ़स्तजब्ना: हमने उनकी दुआ क़बूल की
  • फ़नज्जैनाहु: हमने उन्हें नजात दी
  • अह्लहु: उनके घरवाले (ईमानवाले)
  • अल-कर्बिल अज़ीम: बड़ी मुसीबत, भारी संकट

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उस वक़्त को याद कीजिए जब नूह (अलैहिस्सलाम) ने आपसे पहले — यानी इब्राहीम और लूत से पहले — अपने रब को पुकारा था। उन्होंने अपनी क़ौम के अत्याचारों और इनकार से तंग आकर अल्लाह से फ़रियाद की। अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल फ़रमाई और उन्हें तथा उनके ईमानवाले घरवालों को उस भारी संकट से नजात दी — जो तूफ़ान और ग़रक़ (डूबने) की मुसीबत थी, और उनकी क़ौम के झुठलाने और तकलीफ़ों का दौर भी था।

यह अल्लाह की रहमत की एक बड़ी निशानी है कि वह अपने नेक बंदों की पुकार को कभी ख़ाली नहीं लौटाता। नूह (अलैहिस्सलाम) ने सदियों तक अपनी क़ौम को दीन की तरफ़ बुलाया, मुश्किलों और तकलीफों को सहा, मगर जब उन्होंने अल्लाह के सामने हाथ उठाए तो अल्लाह ने उन्हें उस मुसीबत से निकाला जो आसमान और ज़मीन दोनों की तरफ़ से आई थी।

इस आयत में हमारे लिए सबक़ है कि जब हम किसी मुसीबत में फँसें, तो अल्लाह की तरफ़ रुजू करें, उसी से मदद माँगें। अल्लाह उन लोगों को कभी निराश नहीं करता जो सच्चे दिल से उसे पुकारते हैं। जिस तरह उसने नूह (अलैहिस्सलाम) को तूफ़ान से बचाया, उसी तरह वह हर मोमिन को उसकी मुसीबतों से रास्ता निकालने की ताक़त देता है। यह हमारे लिए उम्मीद और हौसले की बात है — अल्लाह की रहमत उसके गुनाहगार बंदों पर भी है, बशर्ते वे उसकी तरफ़ पलटें और उससे दुआ करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 74-78 — अल-अंबिया

74وَلُوطًا آتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًا وَنَجَّيْنَاهُ مِنَ الْقَرْيَةِ الَّتِي كَانَت تَّعْمَلُ الْخَبَائِثَ ۗ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَاسِقِينَ
और लूत को भी हम ही के फ़हमे सलीम और नबूवत अता की और हम ही ने उस बस्ती से जहाँ के लोग बदकारियाँ करते थे नजात दी इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बदकार आदमी थे
75وَأَدْخَلْنَاهُ فِي رَحْمَتِنَا ۖ إِنَّهُ مِنَ الصَّالِحِينَ
और हमने लूत को अपनी रहमत में दाख़िल कर लिया इसमें शक नहीं कि वह नेकोंकार बन्दों में से थे
76وَنُوحًا إِذْ نَادَىٰ مِن قَبْلُ فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और (ऐ रसूल लूत से भी) पहले (हमने) नूह को नबूवत पर फ़ायज़ किया जब उन्होंने (हमको) आवाज़ दी तो हमने उनकी (दुआ) सुन ली फिर उनको और उनके साथियों को (तूफ़ान की) बड़ी सख्त मुसीबत से नजात दी
77وَنَصَرْنَاهُ مِنَ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनके मुक़ाबले में उनकी मदद की बेशक ये लोग (भी) बहुत बुरे लोग थे तो हमने उन सबको डुबो मारा
78وَدَاوُودَ وَسُلَيْمَانَ إِذْ يَحْكُمَانِ فِي الْحَرْثِ إِذْ نَفَشَتْ فِيهِ غَنَمُ الْقَوْمِ وَكُنَّا لِحُكْمِهِمْ شَاهِدِينَ
और (ऐ रसूल इनको) दाऊद और सुलेमान का (वाक्या याद दिलाओ) जब ये दोनों एक खेती के बारे में जिसमें रात के वक्त क़ुछ लोगों की बकरियाँ (घुसकर) चर गई थी फैसला करने बैठे और हम उन लोगों के क़िस्से को देख रहे थे (कि बाहम इख़तेलाफ़ हुआ)
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अनुवाद — अल-अंबिया 76

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Tuesday, August 18, 2026

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