अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- नूहन: पैगंबर नूह (अलैहिस्सलाम)
- नादा: पुकारा, दुआ की
- मिन क़ब्लु: इससे पहले (इब्राहीम और लूत से पहले)
- फ़स्तजब्ना: हमने उनकी दुआ क़बूल की
- फ़नज्जैनाहु: हमने उन्हें नजात दी
- अह्लहु: उनके घरवाले (ईमानवाले)
- अल-कर्बिल अज़ीम: बड़ी मुसीबत, भारी संकट
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप उस वक़्त को याद कीजिए जब नूह (अलैहिस्सलाम) ने आपसे पहले — यानी इब्राहीम और लूत से पहले — अपने रब को पुकारा था। उन्होंने अपनी क़ौम के अत्याचारों और इनकार से तंग आकर अल्लाह से फ़रियाद की। अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल फ़रमाई और उन्हें तथा उनके ईमानवाले घरवालों को उस भारी संकट से नजात दी — जो तूफ़ान और ग़रक़ (डूबने) की मुसीबत थी, और उनकी क़ौम के झुठलाने और तकलीफ़ों का दौर भी था।
यह अल्लाह की रहमत की एक बड़ी निशानी है कि वह अपने नेक बंदों की पुकार को कभी ख़ाली नहीं लौटाता। नूह (अलैहिस्सलाम) ने सदियों तक अपनी क़ौम को दीन की तरफ़ बुलाया, मुश्किलों और तकलीफों को सहा, मगर जब उन्होंने अल्लाह के सामने हाथ उठाए तो अल्लाह ने उन्हें उस मुसीबत से निकाला जो आसमान और ज़मीन दोनों की तरफ़ से आई थी।
इस आयत में हमारे लिए सबक़ है कि जब हम किसी मुसीबत में फँसें, तो अल्लाह की तरफ़ रुजू करें, उसी से मदद माँगें। अल्लाह उन लोगों को कभी निराश नहीं करता जो सच्चे दिल से उसे पुकारते हैं। जिस तरह उसने नूह (अलैहिस्सलाम) को तूफ़ान से बचाया, उसी तरह वह हर मोमिन को उसकी मुसीबतों से रास्ता निकालने की ताक़त देता है। यह हमारे लिए उम्मीद और हौसले की बात है — अल्लाह की रहमत उसके गुनाहगार बंदों पर भी है, बशर्ते वे उसकी तरफ़ पलटें और उससे दुआ करें।
📜 आयत 74-78 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 76
सूरा अल-अंबिया आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल लूत से भी) पहले (हमने) नूह को…सूरा आयत 76/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








