अल-अंबिया · 75/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَأَدْخَلْنَاهُ فِي رَحْمَتِنَا ۖ إِنَّهُ مِنَ الصَّالِحِينَ ۝٧٥
Wa adkhalnaahu fee rahmatinaa innahoo minas saalihee
📖 हिंदी अर्थ
और हमने लूत को अपनी रहमत में दाख़िल कर लिया इसमें शक नहीं कि वह नेकोंकार बन्दों में से थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَحْمَتِنَا: हमारी दया, करुणा और कृपा।
  • الصَّالِحِينَ: नेक लोग, जो अल्लाह की आज्ञाओं का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने अपने नेक नबी (हज़रत लूत अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उन्हें अपनी ख़ास रहमत में दाख़िल कर लिया। यानी जब उनकी क़ौम पर अल्लाह का अज़ाब आया, तो हमने उन्हें उस अज़ाब से महफ़ूज़ रखा और उन्हें अपनी पनाह में ले लिया। यह अल्लाह की उन पर बड़ी मेहरबानी थी कि उन्होंने उन्हें उस तबाही से बचाया जो उनकी नाफ़रमान क़ौम पर नाज़िल हुई थी।

यह बात उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से एक इज़्ज़त और शरफ़ थी, क्योंकि वह उन नेक लोगों में से थे जो अल्लाह की इबादत में मशग़ूल रहते थे, उसके हुक्म की तामील करते थे और उसकी मनाही से रुके रहते थे। उनका नेक अमल ही वजह बना कि अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत में दाख़िल किया और उन्हें हर मुसीबत से बचाया।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए ख़ास होती है जो नेकी और परहेज़गारी की ज़िंदगी गुज़ारते हैं। अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि उन्हें अपनी पनाह में लेता है और उन्हें हर मुसीबत से निकालता है। यह हमारे लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अगर हम अल्लाह के फ़रमाँबरदार बंदे बन जाएँ, तो अल्लाह हमें भी अपनी रहमत में दाख़िल करेगा और हमें दुनिया और आख़िरत की हर तकलीफ़ से महफ़ूज़ रखेगा।

आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की आज्ञाओं के मुताबिक़ ढालें, नेकी अपनाएँ और बुराई से बचें, ताकि हम भी उन नेक लोगों में शामिल हो सकें जिन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत का हक़ीक़ी हिस्सेदार बनाया है। अल्लाह की रहमत असीम है, और वह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है।



📜 आयत 73-77 — सूरा अल-अंबिया

73وَجَعَلْنَاهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا وَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِمْ فِعْلَ الْخَيْرَاتِ وَإِقَامَ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءَ الزَّكَاةِ ۖ وَكَانُوا لَنَا عَابِدِينَ
और उन सबको (लोगों का) पेशवा बनाया कि हमारे हुक्म से (उनकी) हिदायत करते थे और हमने उनके पास नेक काम करने और नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ''वही'' भेजी थी और ये सब के सब हमारी ही इबादत करते थे
74وَلُوطًا آتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًا وَنَجَّيْنَاهُ مِنَ الْقَرْيَةِ الَّتِي كَانَت تَّعْمَلُ الْخَبَائِثَ ۗ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَاسِقِينَ
और लूत को भी हम ही के फ़हमे सलीम और नबूवत अता की और हम ही ने उस बस्ती से जहाँ के लोग बदकारियाँ करते थे नजात दी इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बदकार आदमी थे
75وَأَدْخَلْنَاهُ فِي رَحْمَتِنَا ۖ إِنَّهُ مِنَ الصَّالِحِينَ
और हमने लूत को अपनी रहमत में दाख़िल कर लिया इसमें शक नहीं कि वह नेकोंकार बन्दों में से थे
76وَنُوحًا إِذْ نَادَىٰ مِن قَبْلُ فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और (ऐ रसूल लूत से भी) पहले (हमने) नूह को नबूवत पर फ़ायज़ किया जब उन्होंने (हमको) आवाज़ दी तो हमने उनकी (दुआ) सुन ली फिर उनको और उनके साथियों को (तूफ़ान की) बड़ी सख्त मुसीबत से नजात दी
77وَنَصَرْنَاهُ مِنَ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनके मुक़ाबले में उनकी मदद की बेशक ये लोग (भी) बहुत बुरे लोग थे तो हमने उन सबको डुबो मारा
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
75आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 75

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सूरा आयत 75/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.





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Wednesday, September 30, 2026

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