Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- जसदन – शरीर वाला, ऐसा शरीर जो भोजन की मोहताज न हो।
- ला याकुलून – नहीं खाते।
- ख़ालिदीन – सदैव रहने वाले, अमर।
व्याख्या:
अल्लाह तआला ने इस आयत में उन लोगों के उस आक्षेप का उत्तर दिया है जो कहते थे कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आम इंसानों की तरह खाते-पीते और चलते-फिरते क्यों हैं? वे चाहते थे कि रसूल फ़रिश्ते हों या ऐसे जिस्म हों जिन्हें खाने-पीने की ज़रूरत ही न हो।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: हमने अपने रसूलों को ऐसा जिस्म नहीं बनाया जो खाना न खाता हो। बल्कि हमने उन्हें इंसान ही बनाया, जो दूसरे इंसानों की तरह खाते-पीते हैं, बाज़ारों में चलते-फिरते हैं, और जीवन की आम ज़रूरतों को पूरा करते हैं। यही उनकी रिसालत की सच्चाई की गवाही है कि वे अपनी उम्मत के लिए नमूना हैं – अगर वे खाने-पीने से पाक होते, तो लोग उनकी पैरवी में असमर्थ हो जाते।
और यह भी कि वे दुनिया में हमेशा रहने वाले नहीं थे। हर नबी ने अपनी उम्र पूरी की, अपना पैग़ाम पहुँचाया और वफ़ात पाई। यह भी उनके इंसान होने की दलील है। अगर वे अमर होते, तो लोग उन्हें फ़रिश्ता या ख़ुदा समझने लगते, जबकि उनकी मौत ने साबित कर दिया कि वे अल्लाह के बंदे और रसूल थे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि नबियों की सीरत हमारे लिए अमली नमूना है। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में खाने-पीने, सोने, उठने-बैठने, ख़ुशी और ग़म – हर हाल में अल्लाह की इबादत और दावत का काम किया। यह हमारे लिए बड़ी रहमत है कि हमारे रसूल हम जैसे इंसान थे, ताकि हम उनकी हर अदा में उनकी पैरवी कर सकें। अगर वे फ़रिश्ते होते, तो हम उनकी तरह अमल करना मुश्किल पाते। यही अल्लाह की मेहरबानी है कि उसने रसूलों को हमारी ही जिंस से भेजा, ताकि हम उनके नक़्शे-क़दम पर चलकर जन्नत के हक़दार बनें। और याद रखें – दुनिया किसी के लिए भी हमेशा नहीं रहती, इसलिए सच्ची कामयाबी उसी में है कि हम अपनी ज़िंदगी को रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत के मुताबिक़ ढाल लें।
📜 आयत 6-10 — सूरा अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 8
सूरा अल-अंबिया आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उन (पैग़म्बरों) के बदन ऐसे नहीं बनाए थे…सूरा आयत 8/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंबिया
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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