अल-अंबिया · 96/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
حَتَّىٰ إِذَا فُتِحَتْ يَأْجُوجُ وَمَأْجُوجُ وَهُم مِّن كُلِّ حَدَبٍ يَنسِلُونَ ۝٩٦
Hattaaa izaa futihat Yaajooju wa Maajooju wa hum min kulli hadabiny yansiloon
📖 हिंदी अर्थ
बस इतना (तवक्कुफ़ तो ज़रूर होगा) कि जब याजूज माजूज (सद्दे सिकन्दरी) की कैद से खोल दिए जाएँगे और ये लोग (ज़मीन की) हर बुलन्दी से दौड़ते हुए निकल पड़े

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَأْجُوجُ وَمَأْجُوجُ (याजूज और माजूज): ये दो क़बीले हैं जिनका ज़िक्र क़ुरआन और हदीस में आया है। ये अत्यधिक संख्या और ताकत वाले लोग हैं, जिन्हें ज़ुल-क़रनैन अलैहिस्सलाम ने एक मज़बूत दीवार (सद्द) के पीछे क़ैद कर दिया था।
  • حَدَبٍ (हदब): ऊँची जगह, टीला, या पहाड़ी।
  • يَنسِلُونَ (यंसिलून): तेज़ी से निकलना, दौड़ना, या झुंड के झुंड निकलना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत क़यामत की उन बड़ी निशानियों में से एक का वर्णन करती है, जो अल्लाह तआला ने अपनी किताब में बयान की हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि जब याजूज और माजूज की क़ैद से रिहाई का वक़्त आएगा, तो उनके सामने वह मज़बूत दीवार खोल दी जाएगी जिसे ज़ुल-क़रनैन ने बनवाया था। यह दीवार अल्लाह की क़ुदरत से टूट जाएगी या खोल दी जाएगी, और ये क़बीले हर ऊँची जगह से तेज़ी के साथ निकल पड़ेंगे। वे पहाड़ियों और टीलों से उतरते हुए पूरी दुनिया में फैल जाएँगे, जैसे पानी का सैलाब हर ओर से आता है। यह उस वक़्त होगा जब क़यामत बहुत करीब आ चुकी होगी और उसकी निशानियाँ लगातार ज़ाहिर हो रही होंगी।

यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की यह ज़िंदगी हमेशा के लिए नहीं है। जिस तरह याजूज और माजूज का निकलना अल्लाह के हुक्म से होगा और कोई उन्हें रोक नहीं पाएगा, उसी तरह क़यामत भी अचानक आएगी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को नेक अमल से सजाएँ, अल्लाह की इबादत करें और उस दिन के लिए तैयारी करें, जब कोई अमल बेकार नहीं होगा और हर इंसान को उसके किए का बदला मिलेगा। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम ग़ाफ़िल न हों और अपने रब की रहमत और मग़फिरत के तलबगार रहें। अल्लाह तआला हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 94-98 — सूरा अल-अंबिया

94فَمَن يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَا كُفْرَانَ لِسَعْيِهِ وَإِنَّا لَهُ كَاتِبُونَ
(उस वक्त फ़ैसला हो जाएगा कि) तो जो शख्स अच्छे-अच्छे काम करेगा और वह ईमानवाला भी हो तो उसकी कोशिश अकारत न की जाएगी और हम उसके आमाल लिखते जाते हैं
95وَحَرَامٌ عَلَىٰ قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا أَنَّهُمْ لَا يَرْجِعُونَ
और जिस बस्ती को हमने तबाह कर डाला मुमकिन नहीं कि वह लोग क़यामत के दिन हिरफिर के से (हमारे पास) न लौटे
96حَتَّىٰ إِذَا فُتِحَتْ يَأْجُوجُ وَمَأْجُوجُ وَهُم مِّن كُلِّ حَدَبٍ يَنسِلُونَ
बस इतना (तवक्कुफ़ तो ज़रूर होगा) कि जब याजूज माजूज (सद्दे सिकन्दरी) की कैद से खोल दिए जाएँगे और ये लोग (ज़मीन की) हर बुलन्दी से दौड़ते हुए निकल पड़े
97وَاقْتَرَبَ الْوَعْدُ الْحَقُّ فَإِذَا هِيَ شَاخِصَةٌ أَبْصَارُ الَّذِينَ كَفَرُوا يَا وَيْلَنَا قَدْ كُنَّا فِي غَفْلَةٍ مِّنْ هَٰذَا بَلْ كُنَّا ظَالِمِينَ
और क़यामत का सच्चा वायदा नज़दीक आ जाए तो फिर काफिरों की ऑंखें एक दम से पथरा दी जाएँ (और कहने लगे) हाय हमारी शामत कि हम तो इस (दिन) से ग़फलत ही में (पड़े) रहे बल्कि (सच तो यूँ है कि अपने ऊपर) हम आप ज़ालिम थे
98إِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنتُمْ لَهَا وَارِدُونَ
(उस दिन किहा जाएगा कि ऐ कुफ्फ़ार) तुम और जिस चीज़ की तुम खुदा के सिवा परसतिश करते थे यक़ीनन जहन्नुम की ईधन (जलावन) होंगे (और) तुम सबको उसमें उतरना पड़ेगा
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
96आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 96

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Saturday, October 3, 2026

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