अल-अंबिया · 100/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَهُمْ فِيهَا لَا يَسْمَعُونَ ۝١٠٠
Lahum feehaa zafeerunw wa hum feehaa laa yasma`oon
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों की दोज़ख़ में चिंघाड़ होगी और ये लोग (अपने शोर व ग़ुल में) किसी की बात भी न सुन सकेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ज़फ़ीर (زَفِيرٌ): इसका अर्थ है ज़ोर से साँस खींचना और छोड़ना, जो दर्द और पीड़ा की वजह से होता है। यह आह और कराह की आवाज़ है जो सीने से निकलती है।
  • ला यस्मऊन (لَا يَسْمَعُونَ): वे सुन नहीं पाएँगे, यानी उनकी सुनने की शक्ति समाप्त कर दी जाएगी।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों की भयानक स्थिति का वर्णन कर रही है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के बताए रास्ते को ठुकराया और उसकी इबादत से मुँह मोड़ा। जब वे जहन्नम में डाले जाएँगे, तो उनके लिए वहाँ ज़फ़ीर होगी — यानी दर्द और अज़ाब की शिद्दत से उनकी साँसें बुरी तरह से चलेंगी, और उनके सीने से ऐसी आवाज़ें निकलेंगी जो उनकी बेचैनी और तकलीफ़ का इज़हार करेंगी। यह वह हालत होगी जब उनका दम घुट रहा होगा, और हर साँस के साथ उन्हें नया अज़ाब महसूस होगा।

और उस भयानक हालत में वे कुछ भी सुन नहीं पाएँगे — न कोई आवाज़, न कोई पुकार, न कोई राहत की खबर। आग का शोर, उसकी भयानक गर्जना, और उनके अपने दर्द की चीख़ें — सब कुछ उनके लिए बेमानी हो जाएगा, क्योंकि उनकी सुनने की शक्ति ही छीन ली जाएगी। यह उनके लिए अज़ाब का एक और रूप होगा — कि वे न तो किसी की मदद की आवाज़ सुन सकेंगे और न ही कोई उनकी दर्द भरी पुकार सुनेगा। वे पूरी तरह से अकेले, बेसहारा और अल्लाह की रहमत से महरूम होंगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक ज़ोरदार चेतावनी है कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम कितना भयानक है। लेकिन साथ ही, यह अल्लाह की रहमत का भी पैग़ाम है — कि उसने हमें दुनिया में मौका दिया है, तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है, और रास्ता दिखाया है। आज हमारे पास सुनने की क़ुव्वत है, समझने की ताक़त है, और अल्लाह के कलाम को पढ़ने और उस पर अमल करने का मौक़ा है। आओ, हम इस नेमत की क़द्र करें, अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें, और उस आग से बचने की कोशिश करें जिसकी एक झलक हमें इस आयत में दिखाई गई है। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं — और वह रहमत हर उस शख्स के लिए है जो आज अपने रब की तरफ़ एक क़दम बढ़ाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 98-102 — अल-अंबिया

98إِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنتُمْ لَهَا وَارِدُونَ
(उस दिन किहा जाएगा कि ऐ कुफ्फ़ार) तुम और जिस चीज़ की तुम खुदा के सिवा परसतिश करते थे यक़ीनन जहन्नुम की ईधन (जलावन) होंगे (और) तुम सबको उसमें उतरना पड़ेगा
99لَوْ كَانَ هَٰؤُلَاءِ آلِهَةً مَّا وَرَدُوهَا ۖ وَكُلٌّ فِيهَا خَالِدُونَ
अगर ये (सच्चे) माबूद होते तो उन्हें दोज़ख़ में न जाना पड़ता और (अब तो) सबके सब उसी में हमेशा रहेंगे
100لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَهُمْ فِيهَا لَا يَسْمَعُونَ
उन लोगों की दोज़ख़ में चिंघाड़ होगी और ये लोग (अपने शोर व ग़ुल में) किसी की बात भी न सुन सकेंगे
101إِنَّ الَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُم مِّنَّا الْحُسْنَىٰ أُولَٰئِكَ عَنْهَا مُبْعَدُونَ
ज़बान अलबत्ता जिन लोगों के वास्ते हमारी तरफ से पहले ही भलाई (तक़दीर में लिखी जा चुकी) वह लोग दोज़ख़ से दूर ही दूर रखे जाएँगे
102لَا يَسْمَعُونَ حَسِيسَهَا ۖ وَهُمْ فِي مَا اشْتَهَتْ أَنفُسُهُمْ خَالِدُونَ
(यहाँ तक) कि ये लोग उसकी भनक भी न सुनेंगे और ये लोग हमेशा अपनी मनमाँगी मुरादों में (चैन से) रहेंगे
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अनुवाद — अल-अंबिया 100

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सूरा आयत 100/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 98–102. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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