अल-हज · 20/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
يُصْهَرُ بِهِ مَا فِي بُطُونِهِمْ وَالْجُلُودُ ۝٢٠
Yusharu bihee maa fee butoonihim waljulood
📖 हिंदी अर्थ
जिस (की गर्मी) से जो कुछ उनके पेट में है (ऑंतें वग़ैरह) और खालें सब गल जाएँगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُصْهَرُ: पिघलाया जाता है।
  • مَا فِي بُطُونِهِمْ: उनके पेटों के भीतर जो कुछ है (आंतें, चर्बी आदि)।
  • وَالْجُلُودُ: और खालें (शरीर की त्वचा)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों के भयानक अंजाम का वर्णन कर रही है जिन्होंने अपने रब को नकारा और सत्य का विरोध किया। जब वे जहन्नुम में होंगे, तो उनके सिरों पर अत्यंत उबलता हुआ पानी डाला जाएगा। यह पानी इतना गर्म और जलता हुआ होगा कि उसकी तपिश से उनके पेटों के भीतर की सारी चर्बी और अंतड़ियाँ पिघल जाएँगी, और यह पिघलाव उनकी खालों तक पहुँचेगा, यहाँ तक कि उनकी त्वचा भी पिघलकर गिरने लगेगी। यह उन लोगों का हाल है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की नेमतों की कद्र नहीं की और उसके रास्ते से भटक गए।

यह दृश्य हमें अल्लाह के अज़ाब की सख्ती से डराता है और साथ ही यह सिखाता है कि इस दुनिया में हमें अपने रब की इबादत और उसकी आज्ञाओं का पालन करना चाहिए। अल्लाह ने हमें कुरान और सुन्नत के ज़रिए सीधा रास्ता दिखाया है, और जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत की नेमतें और अल्लाह की रहमत है। यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी असीम है। आइए, हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जिन्हें इस तरह के अज़ाब का सामना करना पड़े। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 18-22 — सूरा अल-हज

18أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَسْجُدُ لَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ وَالنُّجُومُ وَالْجِبَالُ وَالشَّجَرُ وَالدَّوَابُّ وَكَثِيرٌ مِّنَ النَّاسِ ۖ وَكَثِيرٌ حَقَّ عَلَيْهِ الْعَذَابُ ۗ وَمَن يُهِنِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن مُّكْرِمٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ ۩
क्या तुमने इसको भी नहीं देखा कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं और आफताब और माहताब और सितारे और पहाड़ और दरख्त और चारपाए (ग़रज़ कुल मख़लूक़ात) और आदमियों में से बहुत से लोग सब खुदा ही को सजदा करते हैं और बहुतेरे ऐसे भी हैं जिन पर नाफ़रमानी की वजह से अज़ाब का (का आना) लाज़िम हो चुका है और जिसको खुदा ज़लील करे फिर उसका कोई इज्ज़त देने वाला नहीं कुछ शक नहीं कि खुदा जो चाहता है करता है (18) सजदा
19۞ هَٰذَانِ خَصْمَانِ اخْتَصَمُوا فِي رَبِّهِمْ ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا قُطِّعَتْ لَهُمْ ثِيَابٌ مِّن نَّارٍ يُصَبُّ مِن فَوْقِ رُءُوسِهِمُ الْحَمِيمُ
ये दोनों (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ हैं आपस में अपने परवरदिगार के बारे में लड़ते हैं ग़रज़ जो लोग काफ़िर हो बैठे उनके लिए तो आग के कपड़े केता किए गए हैं (वह उन्हें पहनाए जाएँगें और) उनके सरों पर खौलता हुआ पानी उँडेला जाएगा
20يُصْهَرُ بِهِ مَا فِي بُطُونِهِمْ وَالْجُلُودُ
जिस (की गर्मी) से जो कुछ उनके पेट में है (ऑंतें वग़ैरह) और खालें सब गल जाएँगी
21وَلَهُم مَّقَامِعُ مِنْ حَدِيدٍ
और उनके (मारने के) लिए लोहे के गुर्ज़ होंगे
22كُلَّمَا أَرَادُوا أَن يَخْرُجُوا مِنْهَا مِنْ غَمٍّ أُعِيدُوا فِيهَا وَذُوقُوا عَذَابَ الْحَرِيقِ
कि जब सदमें के मारे चाहेंगे कि दोज़ख़ से निकल भागें तो (ग़ुर्ज मार के) फिर उसके अन्दर ढकेल दिए जाएँगे और (उनसे कहा जाएगा कि) जलाने वाले अज़ाब के मज़े चखो
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — अल-हज 20

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Thursday, October 1, 2026

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