अल-मोमिनुन · 116/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
فَتَعَالَى اللَّهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ ۝١١٦
Fata`aalal laahul Malikul Haqq; laaa ilaaha illaa Huwa Rabbul `Arshil Kareem
📖 हिंदी अर्थ
तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर व आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्श बुर्जुग़ का मालिक है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَتَعَالَى – अत्यंत उच्च एवं पवित्र है
  • الْمَلِكُ – सच्चा बादशाह, जो हर चीज़ का मालिक और शासक है
  • الْحَقُّ – सत्य, जिसका वजूद, वादा और हर बात सच्ची हो
  • الْعَرْشِ الْكَرِيمِ – वह महान और सम्मानित सिंहासन (अर्श), जो सबसे बड़ी मख़लूक़ (सृष्टि) है

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला उस हर बात से बहुत ऊंचा और पाक है जो मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने उसके बारे में कही। वही सच्चा बादशाह है — उसका राज्य पूरी कायनात पर है, और उसका हर फ़ैसला अदल और हिकमत पर आधारित है। वह हक़ (सत्य) है — उसका वादा हक़ है, उसका डराना हक़ है, उसकी हर बात हक़ है, और उसने इस दुनिया को बेकार या खिलवाड़ के लिए नहीं बनाया। उसके सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं। वही उस अज़ीम अर्श (सिंहासन) का रब है, जो उसकी सबसे बड़ी मख़लूक़ है — और जो उस बड़ी मख़लूक़ का रब है, वही पूरी कायनात का रब है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ज़ात हर ऐब और कमी से पाक है। वह न तो किसी का बाप है, न किसी का बेटा, न उसका कोई साझी है। वह अकेला ही इबादत के लायक़ है। जो इंसान इस हक़ीक़त को समझ ले, उसका दिल शिर्क (बहुदेववाद) की गंदगी से पाक हो जाता है और वह सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ रुजू करता है।

इस आयत में एक बड़ी ख़ुशख़बरी भी है — क्योंकि जब अल्लाह हक़ है और उसका वादा हक़ है, तो मरने के बाद जी उठना, हिसाब-किताब और जन्नत-जहन्नम — सब कुछ सच है। जो नेक अमल करेगा, उसे अच्छा बदला मिलेगा; और जो गुनाह करेगा, उसे अपने किए की सज़ा भुगतनी पड़ेगी। यह अल्लाह का इंसाफ़ है, और उसका इंसाफ़ कभी ज़ुल्म में नहीं बदलता।

प्यारे भाइयो और बहनो! इस आयत पर ग़ौर करें — अल्लाह ने अपनी सबसे बड़ी मख़लूक़ (अर्श) का ज़िक्र करके हमें अपनी अज़मत का एहसास दिलाया है। जब वह इतने बड़े अर्श का रब है, तो हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतें उससे क्यों छिपी रहेंगी? वह हर चीज़ पर क़ादिर है। हमें चाहिए कि अपनी हर ज़रूरत, हर दुआ, हर उम्मीद सिर्फ़ उसी से जोड़ें। वही हमारा रब है, वही हमारा मालिक है, और वही हमारी मदद करने वाला है। उसकी रहमत से निराश न हों, और उसकी इबादत को अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मक़सद बनाएं। यही कामयाबी की राह है।



📜 आयत 114-118 — अल-मोमिनुन

114قَالَ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ لَّوْ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा बेशक तुम (ज़मीन में) बहुत ही कम ठहरे काश तुम (इतनी बात भी दुनिया में) समझे होते
115أَفَحَسِبْتُمْ أَنَّمَا خَلَقْنَاكُمْ عَبَثًا وَأَنَّكُمْ إِلَيْنَا لَا تُرْجَعُونَ
तो क्या तुम ये ख्याल करते हो कि हमने तुमको (यूँ ही) बेकार पैदा किया और ये कि तुम हमारे हुज़ूर में लौटा कर न लाए जाओगे
116فَتَعَالَى اللَّهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ
तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर व आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्श बुर्जुग़ का मालिक है
117وَمَن يَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ لَا بُرْهَانَ لَهُ بِهِ فَإِنَّمَا حِسَابُهُ عِندَ رَبِّهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْكَافِرُونَ
और जो शख्स ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद की भी परसतिश करेगा उसके पास इस शिर्क की कोई दलील तो है नहीं तो बस उसका हिसाब (किताब) उसके परवरदिगार ही के पास होगा (मगर याद रहे कि कुफ्फ़ार हरगिज़ फलॉह पाने वाले नहीं)
118وَقُل رَّبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
और (ऐ रसूल) तुम कह दो परवरदिगार तू (मेरी उम्मत को) बख्श दे और तरस खा और तू तो सब रहम करने वालों से बेहतर है
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 116

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Tuesday, August 18, 2026

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