अल-मोमिनुन · 115/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
أَفَحَسِبْتُمْ أَنَّمَا خَلَقْنَاكُمْ عَبَثًا وَأَنَّكُمْ إِلَيْنَا لَا تُرْجَعُونَ ۝١١٥
Afahsibtum annamaa khalaqnaakum `abasanw wa annakum ilainaa laa turja`oon
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या तुम ये ख्याल करते हो कि हमने तुमको (यूँ ही) बेकार पैदा किया और ये कि तुम हमारे हुज़ूर में लौटा कर न लाए जाओगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अफ़हसिब्तुम – क्या तुमने यह समझ लिया?
  • अबसन – व्यर्थ, बिना किसी उद्देश्य के, खेल-तमाशे के रूप में
  • ला तुरजऊन – तुम लौटाए नहीं जाओगे

तफ़सीर:

ऐ लोगों! क्या तुमने यह गुमान कर लिया है कि हमने तुम्हें यूँ ही बेकार और बिना किसी मक़सद के पैदा कर दिया है? क्या तुमने समझ लिया कि तुम्हारी पैदाइश का कोई हिकमत भरा उद्देश्य नहीं, न कोई हुक्म है, न कोई मनाही, न कोई सवाब (इनाम) और न ही कोई अज़ाब (सज़ा)? क्या तुमने यह भी मान लिया कि तुम्हें हमारी तरफ़ लौटकर नहीं आना है, यानी आख़िरत में हिसाब-किताब के लिए उठाए नहीं जाओगे और न ही तुम्हारे अच्छे या बुरे कर्मों का कोई बदला होगा?

यह आयत उन लोगों के लिए बड़ी सख़्त नसीहत और डाँट है जो यह समझते हैं कि इंसान की ज़िंदगी सिर्फ़ इसी दुनिया तक सीमित है। वे जानवरों की तरह जीते हैं, बिना किसी ज़िम्मेदारी के, बिना किसी अंजाम की परवाह किए। उन्हें न तो अल्लाह के हुक्मों की कोई परवाह होती है और न ही आख़िरत के हिसाब की कोई फ़िक्र।

लेकिन ऐ इंसान! ज़रा सोच — क्या यह किताब-ए-हिकमत (कुरआन) जो तुझे पढ़ाई जा रही है, क्या यह बेकार है? क्या यह आसमान और ज़मीन, चाँद-सूरज, रात-दिन का यह निज़ाम, तेरे बदन की यह नफ़ीस बनावट, तेरी आँखें, तेरे कान, तेरा दिल — क्या यह सब कुछ यूँ ही है? हरगिज़ नहीं! यह सारी कायनात बड़ी हिकमत से बनाई गई है, और इसमें सबसे अहम मक़सद इंसान की पैदाइश है — ताकि वह अपने रब की इबादत करे, उसके हुक्मों पर चले और उसकी रहमत का हक़दार बने।

याद रखो, यह दुनिया एक इम्तिहान की जगह है। जिसने यहाँ नेकी की, उसे जन्नत में इनाम मिलेगा, और जिसने बुराई की, उसे जहन्नम में सज़ा मिलेगी। अल्लाह ने तुम्हें बेकार नहीं बनाया, और न ही तुम्हें यूँ ही छोड़ दिया है। तुम सबको एक दिन उसकी तरफ़ लौटना है, और उस दिन हर छोटे-बड़े अमल का हिसाब होगा।

तो ऐ बंदे! इस ग़फ़लत से जाग, अपने रब की तरफ़ रुजू कर, अपनी ज़िंदगी को मक़सद-ए-ख़िलक़त के मुताबिक़ ढाल, और उस दिन की तैयारी कर जब तू अपने रब के सामने खड़ा होगा। यही तेरी कामयाबी है, और यही तेरी नजात का रास्ता है।



📜 आयत 113-117 — सूरा अल-मोमिनुन

113قَالُوا لَبِثْنَا يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ فَاسْأَلِ الْعَادِّينَ
वह कहेंगें (बरस कैसा) हम तो बस पूरा एक दिन रहे या एक दिन से भी कम
114قَالَ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ لَّوْ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा बेशक तुम (ज़मीन में) बहुत ही कम ठहरे काश तुम (इतनी बात भी दुनिया में) समझे होते
115أَفَحَسِبْتُمْ أَنَّمَا خَلَقْنَاكُمْ عَبَثًا وَأَنَّكُمْ إِلَيْنَا لَا تُرْجَعُونَ
तो क्या तुम ये ख्याल करते हो कि हमने तुमको (यूँ ही) बेकार पैदा किया और ये कि तुम हमारे हुज़ूर में लौटा कर न लाए जाओगे
116فَتَعَالَى اللَّهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ
तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर व आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्श बुर्जुग़ का मालिक है
117وَمَن يَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ لَا بُرْهَانَ لَهُ بِهِ فَإِنَّمَا حِسَابُهُ عِندَ رَبِّهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْكَافِرُونَ
और जो शख्स ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद की भी परसतिश करेगा उसके पास इस शिर्क की कोई दलील तो है नहीं तो बस उसका हिसाब (किताब) उसके परवरदिगार ही के पास होगा (मगर याद रहे कि कुफ्फ़ार हरगिज़ फलॉह पाने वाले नहीं)
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
115आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 115

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Saturday, October 3, 2026

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