अल-मोमिनुन · 117/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَمَن يَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ لَا بُرْهَانَ لَهُ بِهِ فَإِنَّمَا حِسَابُهُ عِندَ رَبِّهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْكَافِرُونَ ۝١١٧
Wa mai yad`u ma`allaahi ilaahan aakhara laa burhaana lahoo bihee fa innnamaa hisaabuhoo `inda Rabbih; innahoo laa yuflihul kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद की भी परसतिश करेगा उसके पास इस शिर्क की कोई दलील तो है नहीं तो बस उसका हिसाब (किताब) उसके परवरदिगार ही के पास होगा (मगर याद रहे कि कुफ्फ़ार हरगिज़ फलॉह पाने वाले नहीं)

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَدْعُ – पुकारना, उपासना करना
  • إِلَٰهًا آخَرَ – कोई और पूज्य (माबूद)
  • لَا بُرْهَانَ لَهُ بِهِ – जिसके लिए उसके पास कोई प्रमाण या दलील नहीं
  • حِسَابُهُ – उसका हिसाब, बदला
  • لَا يُفْلِحُ – सफल नहीं होगा, कामयाब नहीं होगा

तफसीर:

यह आयत एक बहुत ही स्पष्ट और सख्त हक़ीक़त बयान करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो कोई भी अल्लाह के साथ किसी और को पुकारता है या उसकी इबादत करता है – चाहे वह कोई बुत हो, कोई नबी हो, कोई फ़रिश्ता हो, कोई जिन्न हो, या कोई और चीज़ – और उसके पास इस बात का कोई सबूत या दलील नहीं होती कि वह इबादत का हक़दार है, तो उसका हिसाब अल्लाह ही के पास है। यानी उसका पूरा मामला अल्लाह के सुपुर्द है, और अल्लाह ही उसे उसके किए का बदला देगा।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि अल्लाह ने यहाँ "लَا بُرْهَانَ لَهُ بِهِ" (जिसका कोई प्रमाण नहीं) कहा है। यह एक हक़ीक़त बयान करने के लिए है, क्योंकि असल में अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत का कोई प्रमाण हो ही नहीं सकता। तमाम आसमानी किताबें, तमाम नबी और रसूल, और अक़्ल-ओ-फ़ितरत सब इसी बात की गवाही देते हैं कि इबादत सिर्फ़ अल्लाह ही की होनी चाहिए। इसलिए जो कोई अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारता है, वह बिना किसी दलील के ऐसा करता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "उसका हिसाब उसके रब के पास है" – यानी अल्लाह उसे उसके आमाल का पूरा-पूरा बदला देगा। यह बात एक तरफ़ तो इंसाफ़ की तसल्ली देती है कि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा, और दूसरी तरफ़ यह डर भी पैदा करती है कि शिर्क की सज़ा बहुत सख्त है।

आख़िर में अल्लाह ने एक काटने वाली हक़ीक़त बयान की: "बेशक काफ़िर कभी सफल नहीं होंगे।" यानी चाहे वे दुनिया में कितनी भी तरक़्क़ी कर लें, कितना भी धन-दौलत और ऐशो-आराम हासिल कर लें, लेकिन आख़िरत में उनका कोई भला नहीं होगा। उनकी सारी उम्मीदें और ख्वाहिशें बेकार जाएँगी, और वे उस अज़ाब से बच नहीं पाएँगे जो उनके लिए तैयार है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी नेमत की याद दिलाती है – नेमत तौहीद की। हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने हमें इस गुमराही से बचाया और सीधे रास्ते पर चलाया। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इंसान को अपने अक़ीदे और आमाल में सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा का तलबगार होना चाहिए। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीदें बाँधते हैं, वे सिर्फ़ अपना नुक़सान करते हैं। अल्लाह की रहमत और मग़फिरत उन्हीं के लिए है जो उसकी इबादत में ख़ालिस और मुख़लिस (सच्चे) हों। आओ हम अपने दिलों को शिर्क की हर आलूदगी से पाक करें और सिर्फ़ अल्लाह ही से उम्मीद रखें – क्योंकि सफलता और कामयाबी सिर्फ़ उसी के हाथ में है।



📜 आयत 115-118 — अल-मोमिनुन

115أَفَحَسِبْتُمْ أَنَّمَا خَلَقْنَاكُمْ عَبَثًا وَأَنَّكُمْ إِلَيْنَا لَا تُرْجَعُونَ
तो क्या तुम ये ख्याल करते हो कि हमने तुमको (यूँ ही) बेकार पैदा किया और ये कि तुम हमारे हुज़ूर में लौटा कर न लाए जाओगे
116فَتَعَالَى اللَّهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ
तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर व आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्श बुर्जुग़ का मालिक है
117وَمَن يَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ لَا بُرْهَانَ لَهُ بِهِ فَإِنَّمَا حِسَابُهُ عِندَ رَبِّهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْكَافِرُونَ
और जो शख्स ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद की भी परसतिश करेगा उसके पास इस शिर्क की कोई दलील तो है नहीं तो बस उसका हिसाब (किताब) उसके परवरदिगार ही के पास होगा (मगर याद रहे कि कुफ्फ़ार हरगिज़ फलॉह पाने वाले नहीं)
118وَقُل رَّبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
और (ऐ रसूल) तुम कह दो परवरदिगार तू (मेरी उम्मत को) बख्श दे और तरस खा और तू तो सब रहम करने वालों से बेहतर है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
117आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 117

सूरा अल-मोमिनुन आयत 117 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद की भी…

सूरा आयत 117/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 115–118. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए