अल-मोमिनुन · 4/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَالَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَاةِ فَاعِلُونَ ۝٤
Wallazeena hum liz Zakaati faa`iloon
📖 हिंदी अर्थ
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِلزَّكَاةِ (लिल्लज़कात): पवित्रता, विकास और शुद्धिकरण के लिए। यहाँ इसका अर्थ है अनिवार्य (फ़र्ज़) ज़कात।
  • فَاعِلُونَ (फ़ाइलून): करने वाले, अदा करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनों (ईमानवालों) के गुणों का वर्णन कर रही है जो सफलता प्राप्त करने वाले हैं। अल्लाह तआला इन मोमिनों की एक खास सिफ़त बयान कर रहे हैं कि वे ज़कात अदा करने वाले हैं। यानी वे अपने माल में से अल्लाह का हक़ निकालते हैं, जो उन्होंने अपनी कमाई से हासिल किया है। ज़कात का मतलब सिर्फ़ माल का एक हिस्सा निकालना नहीं है, बल्कि यह दिल की पवित्रता, नफ़्स की तज़्किया (शुद्धिकरण) और माल की बरकत का ज़रिया है।

ज़कात अदा करने से इंसान का माल पवित्र होता है, उसका दिल लालच और बुख़्ल (कंजूसी) से पाक होता है, और समाज में ग़रीबों और ज़रूरतमंदों के प्रति मोहब्बत और हमदर्दी पैदा होती है। यह एक ऐसा अमल है जो इंसान को अल्लाह का क़रीबी बनाता है और उसकी दौलत में बरकत देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि असली सफलता सिर्फ़ नमाज़ पढ़ने से नहीं है, बल्कि माल की पाकीज़गी और दूसरों के हक़ अदा करने से भी है। जो इंसान अपने माल से अल्लाह का हक़ निकालता है, वह दरअसल अपने लिए ही भलाई कमाता है, क्योंकि ज़कात से माल घटता नहीं, बल्कि अल्लाह उसमें बरकत डालता है और उसे बढ़ाता है।

अल्लाह तआला हम सबको तौफ़ीक़ दे कि हम अपने मालों की ज़कात अदा करें, अपने नफ़्स को पाक करें, और उन मोमिनों की ज़ुमर में शामिल हों जिनके लिए सफलता और जन्नत की ख़ुशख़बरी है। आमीन।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-मोमिनुन

2الَّذِينَ هُمْ فِي صَلَاتِهِمْ خَاشِعُونَ
जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं
3وَالَّذِينَ هُمْ عَنِ اللَّغْوِ مُعْرِضُونَ
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं
4وَالَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَاةِ فَاعِلُونَ
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं
5وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं
6إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
मगर अपनी बीबियों से या अपनी ज़र ख़रीद लौनडियों से कि उन पर हरगिज़ इल्ज़ाम नहीं हो सकता
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 4

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Monday, September 28, 2026

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