अल-मोमिनुन · 5/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ ۝٥
Wallazeena hum lifuroo jihim haafizoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِفُرُوجِهِمْ: अपने गुप्तांगों की (शर्मगाहों की)
  • حَافِظُونَ: रक्षा करने वाले, संरक्षित रखने वाले

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने सच्चे और नेक बंदों की एक और खूबी बयान कर रहे हैं। ये वे लोग हैं जो अपनी शर्मगाहों की रक्षा करते हैं—यानी वे हर उस चीज़ से बचते हैं जो अल्लाह ने हराम किया है, चाहे वह ज़िना (व्यभिचार) हो, लिवात (समलैंगिकता) हो या कोई और अश्लील कार्य। वे अपनी पवित्रता और इज़्ज़त को हर उस चीज़ से बचाते हैं जो अल्लाह की नाराज़गी का कारण बने।

ये मोमिनीन अपने आपको पूरी तरह से पाक और पवित्र रखते हैं। वे न केवल ज़िना से बचते हैं, बल्कि उन सभी रास्तों और ज़रियों से भी दूर रहते हैं जो उसकी तरफ ले जाते हैं—जैसे बुरी नज़र, बुरी सोहबत, अश्लील बातें और हराम रिश्ते। उनका दिल, उनकी आँखें और उनके हाथ सब पाक होते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि असली ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अपने अंगों को गुनाह से बचाने से है। जो व्यक्ति अपनी पवित्रता की रक्षा करता है, अल्लाह उससे महब्बत करता है और उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है।

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है—हमें अपनी निगाहें नीची रखनी चाहिए, अपने दिल को पाक रखना चाहिए और अपने आपको हर उस चीज़ से बचाना चाहिए जो अल्लाह की नाराज़गी का सबब बने। यही पाकी और पवित्रता हमें जन्नत की तरफ ले जाने वाला रास्ता दिखाती है। अल्लाह तआला हम सबको इस खूबी से नवाज़े। आमीन।



📜 आयत 3-7 — सूरा अल-मोमिनुन

3وَالَّذِينَ هُمْ عَنِ اللَّغْوِ مُعْرِضُونَ
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं
4وَالَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَاةِ فَاعِلُونَ
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं
5وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं
6إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
मगर अपनी बीबियों से या अपनी ज़र ख़रीद लौनडियों से कि उन पर हरगिज़ इल्ज़ाम नहीं हो सकता
7فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ
पस जो शख्स उसके सिवा किसी और तरीके से शहवत परस्ती की तमन्ना करे तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
5आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 5

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सूरा आयत 5/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.





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Wednesday, September 30, 2026

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