अल-मोमिनुन · 45/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
ثُمَّ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ وَأَخَاهُ هَارُونَ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ ۝٤٥
Summa arsalnaa Moosaa wa akhaahu Haaroona bi Aayaatinaa wa sultaanim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने मूसा और उनके भाई हारुन को अपनी निशानियों और वाज़ेए व रौशन दलील के साथ फिरऔन और उसके दरबार के उमराओ के पास रसूल बना कर भेजा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • आयातिना: हमारी निशानियाँ (चमत्कार)
  • सुल्तानिन मुबीन: स्पष्ट और प्रत्यक्ष प्रमाण या शक्तिशाली तर्क

तफसीर:

फिर हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके भाई हारून (अलैहिस्सलाम) को अपनी निशानियों और स्पष्ट प्रमाण के साथ भेजा। ये वे नौ चमत्कार थे जो अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को दिए — लाठी (जो साँप बन जाती थी), चमकता हुआ हाथ, टिड्डियों का हमला, कुचलने वाले कीड़े, मेंढक, खून, तूफान, अकाल (सूखा) और फलों की कमी। ये सभी निशानियाँ स्पष्ट और ठोस थीं, जो सत्य को प्रमाणित करती थीं और झूठ को मिटा देती थीं।

ये चमत्कार केवल दिखावे के लिए नहीं थे, बल्कि इनका उद्देश्य था कि ईमानवालों के दिल और मज़बूत हों और इनकार करने वालों पर अल्लाह की हुज्जत (प्रमाण) क़ायम हो जाए। ये निशानियाँ इतनी स्पष्ट थीं कि किसी भी निष्पक्ष व्यक्ति के लिए इन्हें झुठलाना असंभव था।

अल्लाह ने इन दोनों भाइयों को फ़िरऔन और उसके दरबारियों की ओर भेजा, जो अपने ज़ुल्म और सरकशी में हद से बढ़ चुके थे। वे लोगों पर अत्याचार करते थे और उन्हें अपना गुलाम बनाए हुए थे। लेकिन उन्होंने इन स्पष्ट चमत्कारों को देखने के बावजूद घमंड और अहंकार के कारण ईमान लाने से इनकार कर दिया।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह अपने पैग़म्बरों को हमेशा स्पष्ट प्रमाणों और निशानियों के साथ भेजता है, ताकि लोगों के पास कोई बहाना न बचे। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने अपने बंदों पर हुज्जत क़ायम करने के लिए इतने स्पष्ट संकेत दिए। हमें चाहिए कि जब सत्य हमारे सामने आए, तो हम उसे स्वीकार करें और घमंड न करें, क्योंकि घमंड इंसान को हिदायत से दूर कर देता है। जो लोग अल्लाह की निशानियों को देखकर भी आँखें बंद कर लेते हैं, वे अपना ही नुक़सान करते हैं। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो सत्य को पहचानें और उस पर चलें।



📜 आयत 43-47 — सूरा अल-मोमिनुन

43مَا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَأْخِرُونَ
कोई उम्मत अपने वक्त मुर्करर से न आगे बढ़ सकती है न (उससे) पीछे हट सकती है
44ثُمَّ أَرْسَلْنَا رُسُلَنَا تَتْرَىٰ ۖ كُلَّ مَا جَاءَ أُمَّةً رَّسُولُهَا كَذَّبُوهُ ۚ فَأَتْبَعْنَا بَعْضَهُم بَعْضًا وَجَعَلْنَاهُمْ أَحَادِيثَ ۚ فَبُعْدًا لِّقَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُونَ
फिर हमने लगातार बहुत से पैग़म्बर भेजे (मगर) जब जब किसी उम्मत का पैग़म्बर उन के पास आता तो ये लोग उसको झुठलाते थे तो हम थी (आगे पीछे) एक को दूसरे के बाद (हलाक) करते गए और हमने उन्हें (नेस्त व नाबूद करके) अफसाना बना दिया तो ईमान न लाने वालो पर ख़ुदा की लानत है
45ثُمَّ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ وَأَخَاهُ هَارُونَ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
फिर हमने मूसा और उनके भाई हारुन को अपनी निशानियों और वाज़ेए व रौशन दलील के साथ फिरऔन और उसके दरबार के उमराओ के पास रसूल बना कर भेजा
46إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا عَالِينَ
तो उन लोगो ने शेख़ी की और वह थे ही बड़े सरकश लोग
47فَقَالُوا أَنُؤْمِنُ لِبَشَرَيْنِ مِثْلِنَا وَقَوْمُهُمَا لَنَا عَابِدُونَ
आपस मे कहने लगे क्या हम अपने ही ऐसे दो आदमियों पर ईमान ले आएँ हालाँकि इन दोनों की (क़ौम की) क़ौम हमारी ख़िदमत गारी करती है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
45आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 45

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Monday, September 28, 2026

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