Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَضْلُ اللَّهِ – अल्लाह की कृपा और उपकार
- رَحْمَتُهُ – उसकी दया और रहमत
- لَمَسَّكُمْ – तुम्हें छू लेता, तुम पर आ पड़ता
- أَفَضْتُمْ – तुमने (बात को) फैलाया, उसमें लग गए (यहाँ अर्थ है: आरोप लगाने और झूठ फैलाने में शामिल होना)
- عَذَابٌ عَظِيمٌ – बहुत बड़ा (भयंकर) अज़ाब
तफ़सीर:
ऐ ईमान वालो! अगर अल्लाह का फ़ज़ल (कृपा) और उसकी रहमत (दया) तुम्हारे साथ न होती—जो दुनिया और आख़िरत दोनों में तुम्हें घेरे हुए है—तो जिस झूठ और बदतमीज़ी में तुम लगे थे (यानी उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा पर लगाए गए आरोप को फैलाने में), उसकी वजह से तुम पर कोई बहुत बड़ा और भयंकर अज़ाब आ पड़ता।
लेकिन अल्लाह ने अपनी कृपा से तुम्हें फौरन पकड़ा नहीं, बल्कि तुम्हें मौका दिया कि तुम तौबा कर लो। और जिन लोगों ने तौबा की, उनकी तौबा क़ुबूल भी की। यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि वह अपने बंदों पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि उन्हें सुधरने और पलटने का समय देता है।
याद रखो कि अल्लाह की कृपा और दया ही है जो तुम्हें दुनिया में बुरे अंजाम से बचाती है और आख़िरत में जहन्नुम के अज़ाब से। अगर वह चाहता तो तुम्हारे इस गुनाह पर तुम्हें तुरंत पकड़ लेता, लेकिन उसने अपने रहम से तुम्हें ढका और तौबा का दरवाज़ा खुला रखा।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह कितना क्षमाशील और दयालु है। वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे गुनाह से बाज़ आएँ और उसकी ओर लौटें। इसलिए कभी भी अल्लाह की रहमत से निराश न हों, चाहे गुनाह कितना ही बड़ा क्यों न हो। अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है।
यह भी सबक है कि ज़ुबान से निकली हुई बात का हिसाब होगा। झूठ फैलाना, किसी पर बदतमीज़ी से आरोप लगाना, यह बहुत बड़ा गुनाह है। लेकिन अल्लाह की रहमत यह है कि वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है और उन्हें पाक कर देता है। इसलिए हमेशा सच बोलें, और अगर कभी कोई गलती हो जाए तो फौरन अल्लाह से तौबा करें, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों से मुहब्बत करता है।
📜 आयत 12-16 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 14
सूरा अन-नूर आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में ख़ुदा…सूरा आयत 14/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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