अन-नूर · 14/64
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नूर
وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ لَمَسَّكُمْ فِي مَا أَفَضْتُمْ فِيهِ عَذَابٌ عَظِيمٌ ۝١٤
Wa law laa fadlul laahi `alaikum wa rahmatuhoo fiddunyaa wal aakhirati lamassakum fee maaa afadtum feehi `azaabun `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो जिस बात का तुम लोगों ने चर्चा किया था उस की वजह से तुम पर कोई बड़ा (सख्त) अज़ाब आ पहुँचता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَضْلُ اللَّهِ – अल्लाह की कृपा और उपकार
  • رَحْمَتُهُ – उसकी दया और रहमत
  • لَمَسَّكُمْ – तुम्हें छू लेता, तुम पर आ पड़ता
  • أَفَضْتُمْ – तुमने (बात को) फैलाया, उसमें लग गए (यहाँ अर्थ है: आरोप लगाने और झूठ फैलाने में शामिल होना)
  • عَذَابٌ عَظِيمٌ – बहुत बड़ा (भयंकर) अज़ाब

तफ़सीर:

ऐ ईमान वालो! अगर अल्लाह का फ़ज़ल (कृपा) और उसकी रहमत (दया) तुम्हारे साथ न होती—जो दुनिया और आख़िरत दोनों में तुम्हें घेरे हुए है—तो जिस झूठ और बदतमीज़ी में तुम लगे थे (यानी उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा पर लगाए गए आरोप को फैलाने में), उसकी वजह से तुम पर कोई बहुत बड़ा और भयंकर अज़ाब आ पड़ता।

लेकिन अल्लाह ने अपनी कृपा से तुम्हें फौरन पकड़ा नहीं, बल्कि तुम्हें मौका दिया कि तुम तौबा कर लो। और जिन लोगों ने तौबा की, उनकी तौबा क़ुबूल भी की। यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि वह अपने बंदों पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि उन्हें सुधरने और पलटने का समय देता है।

याद रखो कि अल्लाह की कृपा और दया ही है जो तुम्हें दुनिया में बुरे अंजाम से बचाती है और आख़िरत में जहन्नुम के अज़ाब से। अगर वह चाहता तो तुम्हारे इस गुनाह पर तुम्हें तुरंत पकड़ लेता, लेकिन उसने अपने रहम से तुम्हें ढका और तौबा का दरवाज़ा खुला रखा।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह कितना क्षमाशील और दयालु है। वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे गुनाह से बाज़ आएँ और उसकी ओर लौटें। इसलिए कभी भी अल्लाह की रहमत से निराश न हों, चाहे गुनाह कितना ही बड़ा क्यों न हो। अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है।

यह भी सबक है कि ज़ुबान से निकली हुई बात का हिसाब होगा। झूठ फैलाना, किसी पर बदतमीज़ी से आरोप लगाना, यह बहुत बड़ा गुनाह है। लेकिन अल्लाह की रहमत यह है कि वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है और उन्हें पाक कर देता है। इसलिए हमेशा सच बोलें, और अगर कभी कोई गलती हो जाए तो फौरन अल्लाह से तौबा करें, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों से मुहब्बत करता है।



📜 आयत 12-16 — सूरा अन-नूर

12لَّوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ ظَنَّ الْمُؤْمِنُونَ وَالْمُؤْمِنَاتُ بِأَنفُسِهِمْ خَيْرًا وَقَالُوا هَٰذَا إِفْكٌ مُّبِينٌ
और जब तुम लोगो ने उसको सुना था तो उसी वक्त ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों ने अपने लोगों पर भलाई का गुमान क्यो न किया और ये क्यों न बोल उठे कि ये तो खुला हुआ बोहतान है
13لَّوْلَا جَاءُوا عَلَيْهِ بِأَرْبَعَةِ شُهَدَاءَ ۚ فَإِذْ لَمْ يَأْتُوا بِالشُّهَدَاءِ فَأُولَٰئِكَ عِندَ اللَّهِ هُمُ الْكَاذِبُونَ
और जिन लोगों ने तोहमत लगायी थी अपने दावे के सुबूत में चार गवाह क्यों न पेश किए फिर जब इन लोगों ने गवाह न पेश किये तो ख़ुदा के नज़दीक यही लोग झूठे हैं
14وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ لَمَسَّكُمْ فِي مَا أَفَضْتُمْ فِيهِ عَذَابٌ عَظِيمٌ
और अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो जिस बात का तुम लोगों ने चर्चा किया था उस की वजह से तुम पर कोई बड़ा (सख्त) अज़ाब आ पहुँचता
15إِذْ تَلَقَّوْنَهُ بِأَلْسِنَتِكُمْ وَتَقُولُونَ بِأَفْوَاهِكُم مَّا لَيْسَ لَكُم بِهِ عِلْمٌ وَتَحْسَبُونَهُ هَيِّنًا وَهُوَ عِندَ اللَّهِ عَظِيمٌ
कि तुम अपनी ज़बानों से इसको एक दूसरे से बयान करने लगे और अपने मुँह से ऐसी बात कहते थे जिसका तुम्हें इल्म व यक़ीन न था (और लुत्फ ये है कि) तुमने इसको एक आसान बात समझी थी हॉलाकि वह ख़ुदा के नज़दीक बड़ी सख्त बात थी
16وَلَوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ قُلْتُم مَّا يَكُونُ لَنَا أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَٰذَا سُبْحَانَكَ هَٰذَا بُهْتَانٌ عَظِيمٌ
और जब तुमने ऐसी बात सुनी थी तो तुमने लोगों से क्यों न कह दिया कि हमको ऐसी बात मुँह से निकालनी मुनासिब नहीं सुबहान अल्लाह ये बड़ा भारी बोहतान है
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अनुवाद — अन-नूर 14

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Saturday, October 3, 2026

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