अन-नूर · 15/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
إِذْ تَلَقَّوْنَهُ بِأَلْسِنَتِكُمْ وَتَقُولُونَ بِأَفْوَاهِكُم مَّا لَيْسَ لَكُم بِهِ عِلْمٌ وَتَحْسَبُونَهُ هَيِّنًا وَهُوَ عِندَ اللَّهِ عَظِيمٌ ۝١٥
iz talaqqawnahoo bi alsinatikum wa taqooloona bi afwaahikum maa laisa lakum bihee `ilmunw wa tahsaboo nahoo haiyinanw wa huwa `indl laahi `azeem
📖 हिंदी अर्थ
कि तुम अपनी ज़बानों से इसको एक दूसरे से बयान करने लगे और अपने मुँह से ऐसी बात कहते थे जिसका तुम्हें इल्म व यक़ीन न था (और लुत्फ ये है कि) तुमने इसको एक आसान बात समझी थी हॉलाकि वह ख़ुदा के नज़दीक बड़ी सख्त बात थी
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَلَقَّوْنَهُ – तुम इसे आपस में एक-दूसरे से ले रहे हो, यानी इसे फैला रहे हो।
  • بِأَلْسِنَتِكُمْ – अपनी ज़ुबानों से।
  • هَيِّنًا – हल्का और आसान।
  • عَظِيمٌ – बहुत बड़ा (गुनाह)।

तफ़सीर:

यह आयत उस समय का ज़िक्र कर रही है जब मुनाफ़िक़ीन (कपटियों) ने हज़रत आइशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) के खिलाफ झूठा इल्ज़ाम (बुहतान) गढ़ा और उसे फैलाना शुरू किया। अल्लाह तआला फरमाता है कि जब तुम लोग इस झूठे इल्ज़ाम को अपनी ज़ुबानों से एक-दूसरे से ले रहे थे, और अपने मुँह से वह कुछ कह रहे थे जिसका तुम्हें कोई इल्म नहीं था। यानी तुम लोग बिना किसी सबूत और जाँच-पड़ताल के, सिर्फ सुनकर और दूसरों से सुनकर इस बात को आगे बढ़ा रहे थे। तुम्हारा यह काम दो बड़ी गलतियों पर आधारित था: एक तो यह कि तुम बातिल (झूठ) बोल रहे थे, और दूसरे यह कि तुम बिना इल्म के बोल रहे थे।

तुम लोग समझ रहे थे कि यह एक हल्की और मामूली बात है, जिसे कहने और फैलाने में कोई हर्ज नहीं। लेकिन अल्लाह के नज़दीक यह बहुत बड़ा गुनाह है, क्योंकि इसमें झूठ बोलना, एक पाकदामन और बेगुनाह इंसान पर इल्ज़ाम लगाना, और मुसलमानों के बीच फितना फैलाना शामिल है।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है कि किसी भी बात को बिना तहक़ीक़ (जाँच) के आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। ज़ुबान से निकलने वाला हर शब्द अल्लाह के यहाँ दर्ज होता है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह हर बात की सच्चाई की पड़ताल करे, खासकर जब बात किसी की इज़्ज़त और आबरू से जुड़ी हो।

दावती पहलू:

यह आयत हमें इस्लाम की पाकीज़गी और अख़लाक़ की ऊँचाई सिखाती है। इस्लाम हमें सिखाता है कि हम अपनी ज़ुबान को गुनाह से बचाएँ, क्योंकि ज़ुबान की बदौलत इंसान जन्नत में भी जा सकता है और जहन्नम में भी। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "जो कोई अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि वह अच्छी बात बोले या खामोश रहे।" (सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम)

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला हर छोटी-बड़ी बात का हिसाब लेगा। जो बातें हमें हल्की लगती हैं, वे अल्लाह के नज़दीक बहुत भारी हो सकती हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान को हमेशा सच्चाई, भलाई और नेकी पर लगाएँ, और किसी भी ऐसी बात से बचें जो किसी की इज़्ज़त को ठेस पहुँचाए या समाज में फितना फैलाए।

अल्लाह तआला हम सबको इस गुनाह से बचाए और हमें सच्चाई और अमानतदारी पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — अन-नूर

13لَّوْلَا جَاءُوا عَلَيْهِ بِأَرْبَعَةِ شُهَدَاءَ ۚ فَإِذْ لَمْ يَأْتُوا بِالشُّهَدَاءِ فَأُولَٰئِكَ عِندَ اللَّهِ هُمُ الْكَاذِبُونَ
और जिन लोगों ने तोहमत लगायी थी अपने दावे के सुबूत में चार गवाह क्यों न पेश किए फिर जब इन लोगों ने गवाह न पेश किये तो ख़ुदा के नज़दीक यही लोग झूठे हैं
14وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ لَمَسَّكُمْ فِي مَا أَفَضْتُمْ فِيهِ عَذَابٌ عَظِيمٌ
और अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो जिस बात का तुम लोगों ने चर्चा किया था उस की वजह से तुम पर कोई बड़ा (सख्त) अज़ाब आ पहुँचता
15إِذْ تَلَقَّوْنَهُ بِأَلْسِنَتِكُمْ وَتَقُولُونَ بِأَفْوَاهِكُم مَّا لَيْسَ لَكُم بِهِ عِلْمٌ وَتَحْسَبُونَهُ هَيِّنًا وَهُوَ عِندَ اللَّهِ عَظِيمٌ
कि तुम अपनी ज़बानों से इसको एक दूसरे से बयान करने लगे और अपने मुँह से ऐसी बात कहते थे जिसका तुम्हें इल्म व यक़ीन न था (और लुत्फ ये है कि) तुमने इसको एक आसान बात समझी थी हॉलाकि वह ख़ुदा के नज़दीक बड़ी सख्त बात थी
16وَلَوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ قُلْتُم مَّا يَكُونُ لَنَا أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَٰذَا سُبْحَانَكَ هَٰذَا بُهْتَانٌ عَظِيمٌ
और जब तुमने ऐसी बात सुनी थी तो तुमने लोगों से क्यों न कह दिया कि हमको ऐसी बात मुँह से निकालनी मुनासिब नहीं सुबहान अल्लाह ये बड़ा भारी बोहतान है
17يَعِظُكُمُ اللَّهُ أَن تَعُودُوا لِمِثْلِهِ أَبَدًا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
ख़ुदा तुम्हारी नसीहत करता है कि अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़बरदार फिर कभी ऐसा न करना
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अनुवाद — अन-नूर 15

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Tuesday, August 18, 2026

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