अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَلَقَّوْنَهُ – तुम इसे आपस में एक-दूसरे से ले रहे हो, यानी इसे फैला रहे हो।
- بِأَلْسِنَتِكُمْ – अपनी ज़ुबानों से।
- هَيِّنًا – हल्का और आसान।
- عَظِيمٌ – बहुत बड़ा (गुनाह)।
तफ़सीर:
यह आयत उस समय का ज़िक्र कर रही है जब मुनाफ़िक़ीन (कपटियों) ने हज़रत आइशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) के खिलाफ झूठा इल्ज़ाम (बुहतान) गढ़ा और उसे फैलाना शुरू किया। अल्लाह तआला फरमाता है कि जब तुम लोग इस झूठे इल्ज़ाम को अपनी ज़ुबानों से एक-दूसरे से ले रहे थे, और अपने मुँह से वह कुछ कह रहे थे जिसका तुम्हें कोई इल्म नहीं था। यानी तुम लोग बिना किसी सबूत और जाँच-पड़ताल के, सिर्फ सुनकर और दूसरों से सुनकर इस बात को आगे बढ़ा रहे थे। तुम्हारा यह काम दो बड़ी गलतियों पर आधारित था: एक तो यह कि तुम बातिल (झूठ) बोल रहे थे, और दूसरे यह कि तुम बिना इल्म के बोल रहे थे।
तुम लोग समझ रहे थे कि यह एक हल्की और मामूली बात है, जिसे कहने और फैलाने में कोई हर्ज नहीं। लेकिन अल्लाह के नज़दीक यह बहुत बड़ा गुनाह है, क्योंकि इसमें झूठ बोलना, एक पाकदामन और बेगुनाह इंसान पर इल्ज़ाम लगाना, और मुसलमानों के बीच फितना फैलाना शामिल है।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है कि किसी भी बात को बिना तहक़ीक़ (जाँच) के आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। ज़ुबान से निकलने वाला हर शब्द अल्लाह के यहाँ दर्ज होता है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह हर बात की सच्चाई की पड़ताल करे, खासकर जब बात किसी की इज़्ज़त और आबरू से जुड़ी हो।
दावती पहलू:
यह आयत हमें इस्लाम की पाकीज़गी और अख़लाक़ की ऊँचाई सिखाती है। इस्लाम हमें सिखाता है कि हम अपनी ज़ुबान को गुनाह से बचाएँ, क्योंकि ज़ुबान की बदौलत इंसान जन्नत में भी जा सकता है और जहन्नम में भी। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "जो कोई अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि वह अच्छी बात बोले या खामोश रहे।" (सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम)
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला हर छोटी-बड़ी बात का हिसाब लेगा। जो बातें हमें हल्की लगती हैं, वे अल्लाह के नज़दीक बहुत भारी हो सकती हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान को हमेशा सच्चाई, भलाई और नेकी पर लगाएँ, और किसी भी ऐसी बात से बचें जो किसी की इज़्ज़त को ठेस पहुँचाए या समाज में फितना फैलाए।
अल्लाह तआला हम सबको इस गुनाह से बचाए और हमें सच्चाई और अमानतदारी पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 13-17 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 15
सूरा अन-नूर आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि तुम अपनी ज़बानों से इसको एक दूसरे से बयान…सूरा आयत 15/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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