अल-फुरकान · 26/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
الْمُلْكُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ لِلرَّحْمَٰنِ ۚ وَكَانَ يَوْمًا عَلَى الْكَافِرِينَ عَسِيرًا ۝٢٦
Almulku Yawma`izinil haqqu lir Rahmaan; wa kaana Yawman`alal kaafireena `aseeraa
📖 हिंदी अर्थ
उसे दिन की सल्तनल ख़ास ख़ुदा ही के लिए होगी और वह दिन काफिरों पर बड़ा सख्त होगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْمُلْكُ: राज्य, बादशाही, सत्ता।
  • يَوْمَئِذٍ: उस दिन (यानी क़ियामत के दिन)।
  • الْحَقُّ: सच्चा, वास्तविक, जो स्थायी हो।
  • لِلرَّحْمَٰنِ: रहमान (अल्लाह) के लिए, जो अत्यंत दयावान है।
  • عَسِيرًا: कठिन, सख्त, मुश्किल।

तफ़सीर (व्याख्या):

क़ियामत का दिन वह दिन है जब सारी बादशाही और सत्ता के दावे मिट जाएंगे। आज दुनिया में कई लोग अपने आप को बादशाह, हाकिम या ताकतवर समझते हैं, लेकिन उस दिन सच्चा और स्थायी राज्य केवल अल्लाह रहमान का होगा। कोई भी राजा, कोई भी शासक, कोई भी ताकतवर अपने दावे में कामयाब नहीं होगा। हर तरफ सिर्फ अल्लाह की हुकूमत होगी, और सब उसके सामने झुके होंगे। यह वह दिन है जब अल्लाह का फैसला बिल्कुल सच्चाई के साथ होगा, और उसका राज्य किसी भी शिर्क या साझेदारी से पाक होगा।

यह दिन काफिरों (इनकार करने वालों) के लिए बहुत कठिन और सख्त होगा। उनके लिए यह दिन इसलिए मुश्किल होगा क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह की नाफरमानी की, उसके रसूलों को झुठलाया और आख़िरत (परलोक) को नहीं माना। उस दिन उन्हें अपनी गलतियों का अंजाम भुगतना होगा, और अल्लाह की पकड़ से बचने का कोई रास्ता नहीं होगा। उनके लिए यह दिन अज़ाब और रंज का दिन होगा, जबकि मोमिनों (ईमानवालों) के लिए यह दिन आसान और खुशियों का होगा, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत की और उसके दीन पर चले।

यह आयत हमें यह सबक सिखाती है कि दुनिया की बादशाही और ताकत कुछ दिनों की है, असली बादशाही तो अल्लाह की है जो क़ियामत के दिन पूरी तरह ज़ाहिर होगी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी अल्लाह की रज़ा (खुशी) के लिए बनाएं, उसके हुक्मों पर चलें और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा। जो लोग अल्लाह पर ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे, उनके लिए वह दिन आसान होगा, और जो कुफ्र और गुनाह पर ज़िद करेंगे, उनके लिए वह दिन बहुत सख्त होगा। अल्लाह हम सबको उस दिन की परेशानियों से बचाए और अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।



📜 आयत 24-28 — सूरा अल-फुरकान

24أَصْحَابُ الْجَنَّةِ يَوْمَئِذٍ خَيْرٌ مُّسْتَقَرًّا وَأَحْسَنُ مَقِيلًا
उस दिन जन्नत वालों का ठिकाना भी बेहतर है बेहतर होगा और आरमगाह भी अच्छी से अच्छी
25وَيَوْمَ تَشَقَّقُ السَّمَاءُ بِالْغَمَامِ وَنُزِّلَ الْمَلَائِكَةُ تَنزِيلًا
और जिस दिन आसमान बदली के सबब से फट जाएगा और फरिश्ते कसरत से (जूक दर ज़ूक) नाज़िल किए जाएँगे
26الْمُلْكُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ لِلرَّحْمَٰنِ ۚ وَكَانَ يَوْمًا عَلَى الْكَافِرِينَ عَسِيرًا
उसे दिन की सल्तनल ख़ास ख़ुदा ही के लिए होगी और वह दिन काफिरों पर बड़ा सख्त होगा
27وَيَوْمَ يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ يَقُولُ يَا لَيْتَنِي اتَّخَذْتُ مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلًا
और जिस दिन जुल्म करने वाला अपने हाथ (मारे अफ़सोस के) काटने लगेगा और कहेगा काश रसूल के साथ मैं भी (दीन का सीधा) रास्ता पकड़ता
28يَا وَيْلَتَىٰ لَيْتَنِي لَمْ أَتَّخِذْ فُلَانًا خَلِيلًا
हाए अफसोस काश मै फला शख्स को अपना दोस्त न बनाता
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
26आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 26

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Friday, October 2, 2026

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