अल-फुरकान · 25/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
وَيَوْمَ تَشَقَّقُ السَّمَاءُ بِالْغَمَامِ وَنُزِّلَ الْمَلَائِكَةُ تَنزِيلًا ۝٢٥
Wa Yawma tashaqqaqus samaaa`u bilghamaami wa nuzzilal malaaa`ikatu tanzeela
📖 हिंदी अर्थ
और जिस दिन आसमान बदली के सबब से फट जाएगा और फरिश्ते कसरत से (जूक दर ज़ूक) नाज़िल किए जाएँगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَشَقَّقُ: फट जाएगी, टुकड़े-टुकड़े हो जाएगी।
  • بِالْغَمَامِ: बादलों के साथ, या बादलों से हटकर (यानी बादलों को चीरती हुई)।
  • تَنزِيلًا: उतारना, बड़ी मात्रा में उतारना (यहाँ अधिकता और महत्व पर ज़ोर देने के लिए है)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब आसमान फटकर बादलों के साथ खुल जाएगा, और उसके टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे। यह उस महान दिन की भयावहता की निशानी होगी जब अल्लाह अपने बंदों के बीच न्याय करने के लिए आएगा। उस दिन अल्लाह के फ़रिश्ते आसमान से उतरेंगे, और वे इतनी बड़ी संख्या में होंगे कि पूरे मैदान-ए-हश्र (हश्र के मैदान) को घेर लेंगे। यह उतरना अल्लाह के हुक्म से होगा, और यह उस दिन की अज़मत (महानता) और अल्लाह के इंतज़ाम की ताक़त को दर्शाता है।

यह वह दिन है जब हर इंसान अपने किए गए अमल का सामना करेगा। आसमान का फटना और फ़रिश्तों का उतरना इस बात का सबूत है कि उस दिन की हक़ीक़त को झुठलाना नामुमकिन होगा। अल्लाह तआला ने यह मंज़र बयान करके अपने बंदों को डराया है ताकि वे दुनिया में नेक अमल करें और उस दिन की तैयारी करें।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी, और एक दिन ज़रूर आएगा जब पूरी कायनात बदल जाएगी। अल्लाह का वादा सच्चा है, और उस दिन का आना तय है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा (खुशी) के मुताबिक बनाएँ, नेक काम करें, और उस दिन के लिए तैयार रहें जब हम अपने रब के सामने खड़े होंगे। यह दिन मोमिनों के लिए खुशी का दिन होगा, क्योंकि वे अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार होंगे। आओ, हम सब इस दिन की तैयारी करें और अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें उस दिन की परेशानियों से बचाए और हमें अपनी रहमत से नवाज़े।



📜 आयत 23-27 — अल-फुरकान

23وَقَدِمْنَا إِلَىٰ مَا عَمِلُوا مِنْ عَمَلٍ فَجَعَلْنَاهُ هَبَاءً مَّنثُورًا
और उन लोगों ने (दुनिया में) जो कुछ नेक काम किए हैं हम उसकी तरफ तवज्जों करेंगें तो हम उसको (गोया) उड़ती हुई ख़ाक बनाकर (बरबाद कर) देगें
24أَصْحَابُ الْجَنَّةِ يَوْمَئِذٍ خَيْرٌ مُّسْتَقَرًّا وَأَحْسَنُ مَقِيلًا
उस दिन जन्नत वालों का ठिकाना भी बेहतर है बेहतर होगा और आरमगाह भी अच्छी से अच्छी
25وَيَوْمَ تَشَقَّقُ السَّمَاءُ بِالْغَمَامِ وَنُزِّلَ الْمَلَائِكَةُ تَنزِيلًا
और जिस दिन आसमान बदली के सबब से फट जाएगा और फरिश्ते कसरत से (जूक दर ज़ूक) नाज़िल किए जाएँगे
26الْمُلْكُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ لِلرَّحْمَٰنِ ۚ وَكَانَ يَوْمًا عَلَى الْكَافِرِينَ عَسِيرًا
उसे दिन की सल्तनल ख़ास ख़ुदा ही के लिए होगी और वह दिन काफिरों पर बड़ा सख्त होगा
27وَيَوْمَ يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ يَقُولُ يَا لَيْتَنِي اتَّخَذْتُ مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلًا
और जिस दिन जुल्म करने वाला अपने हाथ (मारे अफ़सोस के) काटने लगेगा और कहेगा काश रसूल के साथ मैं भी (दीन का सीधा) रास्ता पकड़ता
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अनुवाद — अल-फुरकान 25

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Tuesday, August 18, 2026

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