अल-फुरकान · 35/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَا مَعَهُ أَخَاهُ هَارُونَ وَزِيرًا ۝٣٥
Wa laqad aatainaa Moosal Kitaaba wa ja`alnaa ma`ahooo akhaahu Haaroona wazeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और अलबत्ता हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और उनके साथ उनके भाई हारुन को (उनका) वज़ीर बनाया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آتَيْنَا: हमने दिया
  • الْكِتَابَ: यहाँ तौरात (मूसा अलैहिस्सलाम पर उतारी गई किताब)
  • وَزِيرًا: सहायक, मददगार — यह शब्द "विज़्र" से बना है जिसका अर्थ है भार उठाना, यानी जो नबी का भार हल्का करे और उनकी मदद करे।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम पर बड़ा एहसान किया कि उन्हें तौरात जैसी महान किताब अता फ़रमाई, जो उनकी उम्मत के लिए हिदायत और नूर थी। साथ ही, अल्लाह ने उनके भाई हारून अलैहिस्सलाम को उनका सहायक और मददगार बनाया, ताकि वे दोनों मिलकर फ़िरऔन और उसकी क़ौम को दावत दे सकें। यह अल्लाह की रहमत थी कि उसने एक नबी को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उसके साथ उसके भाई को भी नबूवत से नवाज़ा और उसे मूसा अलैहिस्सलाम का सहायक बनाया, ताकि वह उनके कंधे का बोझ हल्का करे और दावत के काम में उनका हाथ बटाए।

यहाँ से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह का तरीक़ा यह रहा है कि वह अपने नबियों को अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि उन्हें साथी और मददगार प्रदान करता है। यह दावत-ए-दीन के काम में भाईचारे, सहयोग और एकजुटता की अहमियत को दर्शाता है। जब अल्लाह ने मूसा और हारून को यह ज़िम्मेदारी दी, तो उन्होंने फ़िरऔन के पास जाकर उसे अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा मानने की दावत दी, लेकिन फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया। अल्लाह ने उन्हें ऐसा सज़ा दी जो उनके अंजाम को सबक़ बनाकर रख गई।

यह क़िस्सा हमारे लिए सबक़ है कि अल्लाह की राह में काम करने वालों को अल्लाह कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उनके लिए साथी, सहायक और रास्ते खोलता है। और जो लोग अल्लाह के नबियों को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बुरा होता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के दीन की मदद करें, एक-दूसरे के सहायक बनें, और अल्लाह की राह में भाईचारे और एकता का सबक़ अपनाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा।



📜 आयत 33-37 — सूरा अल-फुरकान

33وَلَا يَأْتُونَكَ بِمَثَلٍ إِلَّا جِئْنَاكَ بِالْحَقِّ وَأَحْسَنَ تَفْسِيرًا
और (ये कुफ्फार) चाहे कैसी ही (अनोखी) मसल बयान करेंगे मगर हम तुम्हारे पास (उनका) बिल्कुल ठीक और निहायत उम्दा (जवाब) बयान कर देगें
34الَّذِينَ يُحْشَرُونَ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ إِلَىٰ جَهَنَّمَ أُولَٰئِكَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضَلُّ سَبِيلًا
जो लोग (क़यामत के दिन) अपने अपने मोहसिनों के बल जहन्नुम में हकाए जाएगें वही लोग बदतर जगह में होगें और सब से ज्यादा राह रास्त से भटकने वाले
35وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَا مَعَهُ أَخَاهُ هَارُونَ وَزِيرًا
और अलबत्ता हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और उनके साथ उनके भाई हारुन को (उनका) वज़ीर बनाया
36فَقُلْنَا اذْهَبَا إِلَى الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَدَمَّرْنَاهُمْ تَدْمِيرًا
तो हमने कहा तुम दोनों उन लोगों के पास जा जो हमारी (कुदरत की) निशानियों को झुठलाते हैं जाओ (और समझाओ जब न माने) तो हमने उन्हें खूब बरबाद कर डाला
37وَقَوْمَ نُوحٍ لَّمَّا كَذَّبُوا الرُّسُلَ أَغْرَقْنَاهُمْ وَجَعَلْنَاهُمْ لِلنَّاسِ آيَةً ۖ وَأَعْتَدْنَا لِلظَّالِمِينَ عَذَابًا أَلِيمًا
और नूह की क़ौम को जब उन लोगों ने (हमारे) पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमने उन्हें डुबो दिया और हमने उनको लोगों (के हैरत) की निशानी बनाया और हमने ज़ालिमों के वास्ते दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 35

सूरा अल-फुरकान आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अलबत्ता हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और…

सूरा आयत 35/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए