अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آتَيْنَا: हमने दिया
- الْكِتَابَ: यहाँ तौरात (मूसा अलैहिस्सलाम पर उतारी गई किताब)
- وَزِيرًا: सहायक, मददगार — यह शब्द "विज़्र" से बना है जिसका अर्थ है भार उठाना, यानी जो नबी का भार हल्का करे और उनकी मदद करे।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम पर बड़ा एहसान किया कि उन्हें तौरात जैसी महान किताब अता फ़रमाई, जो उनकी उम्मत के लिए हिदायत और नूर थी। साथ ही, अल्लाह ने उनके भाई हारून अलैहिस्सलाम को उनका सहायक और मददगार बनाया, ताकि वे दोनों मिलकर फ़िरऔन और उसकी क़ौम को दावत दे सकें। यह अल्लाह की रहमत थी कि उसने एक नबी को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उसके साथ उसके भाई को भी नबूवत से नवाज़ा और उसे मूसा अलैहिस्सलाम का सहायक बनाया, ताकि वह उनके कंधे का बोझ हल्का करे और दावत के काम में उनका हाथ बटाए।
यहाँ से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह का तरीक़ा यह रहा है कि वह अपने नबियों को अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि उन्हें साथी और मददगार प्रदान करता है। यह दावत-ए-दीन के काम में भाईचारे, सहयोग और एकजुटता की अहमियत को दर्शाता है। जब अल्लाह ने मूसा और हारून को यह ज़िम्मेदारी दी, तो उन्होंने फ़िरऔन के पास जाकर उसे अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा मानने की दावत दी, लेकिन फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया। अल्लाह ने उन्हें ऐसा सज़ा दी जो उनके अंजाम को सबक़ बनाकर रख गई।
यह क़िस्सा हमारे लिए सबक़ है कि अल्लाह की राह में काम करने वालों को अल्लाह कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उनके लिए साथी, सहायक और रास्ते खोलता है। और जो लोग अल्लाह के नबियों को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बुरा होता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के दीन की मदद करें, एक-दूसरे के सहायक बनें, और अल्लाह की राह में भाईचारे और एकता का सबक़ अपनाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा।
📜 आयत 33-37 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 35
सूरा अल-फुरकान आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अलबत्ता हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और…सूरा आयत 35/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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