अल-फुरकान · 36/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
فَقُلْنَا اذْهَبَا إِلَى الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَدَمَّرْنَاهُمْ تَدْمِيرًا ۝٣٦
Faqulnaz habaaa ilal qawmil lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa fadammarnaahum tadmeeraa
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने कहा तुम दोनों उन लोगों के पास जा जो हमारी (कुदरत की) निशानियों को झुठलाते हैं जाओ (और समझाओ जब न माने) तो हमने उन्हें खूब बरबाद कर डाला

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَدَمَّرْنَاهُمْ تَدْمِيرًا: हमने उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया, बिल्कुल जड़ से उखाड़ दिया।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को तौरात दी और उनके भाई हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) को उनका सहायक बनाया। फिर अल्लाह ने उन दोनों को आदेश दिया कि वे फ़िरऔन और उसकी क़ौम के पास जाएँ, जिन्होंने अल्लाह की आयतों और निशानियों को झुठलाया था। उन्होंने अल्लाह की रबूबियत और उलूहियत की दलीलों को नकारा था। दोनों भाइयों ने अल्लाह के आदेश का पालन किया और उस क़ौम के पास गए, उन्हें अल्लाह की वहदानियत (एकता) की ओर बुलाया, उसे अकेला पूजने और उसकी इबादत करने की दावत दी, और शिर्क से बचने की नसीहत की। लेकिन उन्होंने दोनों को झुठलाया और उनकी दावत को क़बूल नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उन्हें ऐसा तबाह किया जैसा तबाह कभी किसी को नहीं किया गया था — उन्हें समुद्र में डुबोकर पूरी तरह नष्ट कर दिया।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमारे लिए बहुत बड़ी सीख और नसीहत है। अल्लाह तआला अपने नबियों को भेजता है ताकि लोगों को सीधा रास्ता दिखाएँ, लेकिन जो लोग हक़ (सत्य) को झुठलाते हैं और अल्लाह के नबियों की दावत को नकारते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के भेजे हुए पैग़ाम को क़बूल करना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। अल्लाह की रहमत और मेहरबानी यह है कि उसने हमें क़ुरआन दिया, जो आख़िरी किताब है, और हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को आख़िरी नबी बनाया। हमें चाहिए कि हम इस नेमत की क़द्र करें, क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों। अल्लाह का वादा है कि जो लोग उसकी हिदायत पर चलेंगे, उन पर कोई ख़ौफ़ नहीं होगा और न ही वे ग़मगीन होंगे।



📜 आयत 34-38 — अल-फुरकान

34الَّذِينَ يُحْشَرُونَ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ إِلَىٰ جَهَنَّمَ أُولَٰئِكَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضَلُّ سَبِيلًا
जो लोग (क़यामत के दिन) अपने अपने मोहसिनों के बल जहन्नुम में हकाए जाएगें वही लोग बदतर जगह में होगें और सब से ज्यादा राह रास्त से भटकने वाले
35وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَا مَعَهُ أَخَاهُ هَارُونَ وَزِيرًا
और अलबत्ता हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और उनके साथ उनके भाई हारुन को (उनका) वज़ीर बनाया
36فَقُلْنَا اذْهَبَا إِلَى الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَدَمَّرْنَاهُمْ تَدْمِيرًا
तो हमने कहा तुम दोनों उन लोगों के पास जा जो हमारी (कुदरत की) निशानियों को झुठलाते हैं जाओ (और समझाओ जब न माने) तो हमने उन्हें खूब बरबाद कर डाला
37وَقَوْمَ نُوحٍ لَّمَّا كَذَّبُوا الرُّسُلَ أَغْرَقْنَاهُمْ وَجَعَلْنَاهُمْ لِلنَّاسِ آيَةً ۖ وَأَعْتَدْنَا لِلظَّالِمِينَ عَذَابًا أَلِيمًا
और नूह की क़ौम को जब उन लोगों ने (हमारे) पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमने उन्हें डुबो दिया और हमने उनको लोगों (के हैरत) की निशानी बनाया और हमने ज़ालिमों के वास्ते दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
38وَعَادًا وَثَمُودَ وَأَصْحَابَ الرَّسِّ وَقُرُونًا بَيْنَ ذَٰلِكَ كَثِيرًا
और (इसी तरह) आद और समूद और नहर वालों और उनके दरमियान में बहुत सी जमाअतों को (हमने हलाक कर डाला)
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीRevelation
36आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 36

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Tuesday, August 18, 2026

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