अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- صَرَّفْنَاهُ: हमने उसे (बारिश को) बदल-बदल कर भेजा, यानी अलग-अलग जगहों और अलग-अलग समयों पर।
- لِيَذَّكَّرُوا: ताकि वे सीखें और सबक हासिल करें, अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करें।
- كُفُورًا: जुर्म और इन्कार, यानी नेमतों का अहसान न मानना और उन्हें जताने वाले की तरफ़ से मुँह मोड़ना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी रहमत और क़ुदरत का एक ज़िंदा नमूना पेश किया है। उसने बारिश को बदल-बदल कर भेजा—कभी किसी ज़मीन पर बरसाया, कभी किसी और पर; कभी किसी मौसम में, कभी किसी और मौसम में। यह तक़सीम अल्लाह की हिक्मत से होती है, ताकि लोग उसकी नेमतों को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें, और जिन लोगों को बारिश न मिले वे अपने गुनाहों से तौबा करें और अल्लाह की तरफ़ रुजू करें। यह भी एक तरह से अल्लाह का पैग़ाम है कि वह अपने बंदों को मौका देता है कि वे उसकी तरफ़ लौटें।
लेकिन अफ़सोस! अधिकतर लोग इससे सबक नहीं लेते। वे बारिश को अल्लाह की तरफ़ से न मानकर किसी सितारे या मौसम के असर से मान बैठते हैं, और कहते हैं: "हमें फलाँ नक्षत्र से बारिश मिली।" यह उनकी नेमतों का इन्कार है। वे अल्लाह की रहमत को भूलकर उसके वसीले (साधन) को ही सब कुछ समझ लेते हैं। यही उनका कुफ़्र और जुर्म है।
दावती पहलू:
ऐसे इंसान! ज़रा सोच—जब बारिश होती है, तो क्या वह किसी सितारे के इशारे पर होती है, या उस रब के हुक्म से जो आसमान और ज़मीन का मालिक है? जो ज़मीन सूखी पड़ी है, उसे वह हरा-भरा कर देता है; जो लोग प्यासे हैं, उन्हें वह सैराब कर देता है। यह अल्लाह की रहमत है जो हर पल बरसती है। क्या यह क़ाबिले-शुक्र नहीं? क्या यह क़ाबिले-ग़ौर नहीं? अल्लाह ने यह सब इसलिए किया कि तुम उसे पहचानो, उसका शुक्र अदा करो, और उसकी तरफ़ रुजू करो। लेकिन इंसान अपनी नादानी से उसकी नेमतों को जताने वाले की तरफ़ से मुँह मोड़ लेता है। यह कितनी बड़ी नाइंसाफ़ी है कि इंसान उस रब का शुक्र न करे जो उसे पल-पल रिज़्क़ देता है, और उसकी नेमतों को किसी और की तरफ़ मंसूब कर दे।
आओ, हम उन लोगों में से न बनें जो अल्लाह की नेमतों का इन्कार करते हैं। बल्कि हम उन बंदों में से बनें जो हर नेमत पर अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं, और उसकी तरफ़ अपने दिल को जोड़ते हैं। क्योंकि अल्लाह ने बारिश को बदल-बदल कर भेजा, ताकि हम उसकी रहमत को महसूस करें और उसके क़रीब आएं। यही उसका मक़सद है—हमारी हिदायत और हमारी भलाई।
📜 आयत 48-52 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 50
सूरा अल-फुरकान आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने पानी को उनके दरमियान (तरह तरह से) तक़सीम…सूरा आयत 50/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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