अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَبِيتُونَ (यबीतून): रात बिताते हैं।
- سُجَّدًا (सुज्जदन): सजदे की हालत में।
- قِيَامًا (क़ियामन): खड़े होकर (नमाज़ में)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह के उन नेक बंदों की खूबियाँ बयान कर रही है जो रात की गहरी नींद को छोड़कर अपने रब की इबादत में मशगूल रहते हैं। ये लोग रात को सजदे में अपने माथे ज़मीन पर टिकाए और क़ियाम (खड़े होकर) में अपने पैरों पर खड़े होकर नमाज़ अदा करते हैं। वे रात की तन्हाई में अपने अंदर अल्लाह के सामने पूरी तरह झुक जाते हैं, अपनी कमज़ोरी और अल्लाह की बड़ाई का इज़हार करते हैं।
रात की इबादत का ख़ास ज़िक्र इसलिए किया गया क्योंकि रात का वक़्त दिखावे और रियाकारी से सबसे ज़्यादा पाक होता है। दिन में लोग देख सकते हैं, लेकिन रात में सिर्फ़ अल्लाह ही देखता है। यह इबादत की सच्चाई और ख़ुलूस (नियत की पवित्रता) की सबसे बड़ी निशानी है। ये लोग सिर्फ़ ज़रूरत के वक़्त ही नहीं, बल्कि हर रात अपने रब के सामने सजदे में पड़ते हैं और क़ियाम में खड़े होकर उससे दुआ करते हैं, अपनी हाजतें पेश करते हैं और उसकी तारीफ़ करते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के करीब होने का सबसे बेहतरीन तरीक़ा रात की नमाज़ है। जब इंसान रात को उठकर अल्लाह के सामने खड़ा होता है और सजदे में गिरता है, तो उसका दिल साफ़ हो जाता है, उसके गुनाह माफ़ होते हैं और उसे सुकून मिलता है। यह वक़्त दुआओं की क़बूलियत का होता है। प्यारे नबी ﷺ ने भी रात की नमाज़ को सबसे अफ़ज़ल नमाज़ बताया है। हमें चाहिए कि हम भी अपनी रातों में से कुछ हिस्सा अल्लाह के लिए निकालें, ताकि हमारी ज़िंदगी में बरकत हो और हमारा दिल अल्लाह की याद से रोशन हो। यह आदत हमें दुनिया की मुसीबतों से निकालकर अल्लाह की रहमत के साये में ले आती है।
📜 आयत 62-66 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 64
सूरा अल-फुरकान आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह लोग जो अपने परवरदिगार के वास्ते सज़दे और…सूरा आयत 64/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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