अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- هَوْنًا: धीरे-धीरे, सुकून और गरिमा के साथ, विनम्रता और संतुलन से चलना।
- الْجَاهِلُونَ: अज्ञानी, उजड्ड और बदतमीज़ लोग जो बुरी बातें कहते हैं।
- قَالُوا سَلَامًا: वे सलामती वाली बात कहते हैं, यानी ऐसा उत्तर देते हैं जिसमें गुनाह न हो और जो उन्हें झगड़े से बचाए।
तफ़सीर:
अल्लाह रहमान (बड़ा मेहरबान) के सच्चे बंदे वे हैं जो ज़मीन पर फ़ख़्र और घमंड से नहीं चलते, बल्कि सुकून, विनम्रता और गरिमा के साथ चलते हैं। उनका चलना उनके दिल की हालत को दर्शाता है — वे अपने रब के सामने झुके हुए, नरम दिल और मुतमइन्न (संतुष्ट) होते हैं। वे न तो इतराते हैं, न दूसरों को तकलीफ़ देते हैं, और न ही ज़मीन पर अपनी अकड़ दिखाते हैं।
और जब अज्ञानी, उजड्ड या बदतमीज़ लोग उनसे बुरी तरह बात करते हैं, उन्हें गाली देते हैं या उन्हें भड़काने की कोशिश करते हैं, तो वे उसी अंदाज़ में जवाब नहीं देते। वे बदले की आग नहीं जलाते, बल्कि ऐसी पाक और सलामती वाली बात कहते हैं जिसमें कोई गुनाह न हो — जैसे "अल्लाह आपको सलामत रखे" या "आप पर सलाम हो" — यानी वे झगड़े से किनारा कर लेते हैं और अपनी ज़ुबान को गुनाह से बचा लेते हैं। यह उनकी बड़ी हिम्मत और ईमान की ताक़त है कि वे जवाबी हमले के बजाय नेकी और नरमी का रास्ता चुनते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान की पहचान उसके अख़लाक़ (चरित्र) से होती है। जब हम बुराई का जवाब बुराई से देते हैं, तो हम उसी स्तर पर गिर जाते हैं, लेकिन जब हम नरमी, सब्र और अच्छे शब्दों से जवाब देते हैं, तो हम दूसरों के दिलों को जीत लेते हैं। यही इस्लाम की खूबसूरती है — कि हम अपने अख़लाक़ से लोगों को अल्लाह के करीब लाएँ। अल्लाह रहमान के बंदे वे हैं जो दूसरों के लिए रहमत और सलामती का ज़रिया बनें, न कि ग़ुस्से और झगड़े का। याद रखिए, जवाब न देना भी एक जवाब है — और वह सबसे अच्छा जवाब है जो अल्लाह को पसंद आए और दिलों को जोड़े।
📜 आयत 61-65 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 63
सूरा अल-फुरकान आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ख़ुदाए) रहमान के ख़ास बन्दे तो वह हैं जो…सूरा आयत 63/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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