अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اصْرِفْ عَنَّا – हमसे दूर कर दे
- غَرَامًا – स्थायी, लगातार बना रहने वाला, जो कभी अलग न हो (जैसे कर्ज़दार का कर्ज़ उसका पीछा नहीं छोड़ता)
तफसीर:
अल्लाह तआला इन आयात में अपने नेक बंदों की विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं, जो रात-दिन उनकी इबादत में मशगूल रहते हैं, और साथ ही उनके दिल अल्लाह के अज़ाब से डरते रहते हैं। ये वे लोग हैं जो अपनी सारी नेकियों और इबादतों के बावजूद अपने रब की रहमत से निराश नहीं होते, बल्कि उसकी पनाह चाहते हैं और दुआ करते हैं: "ऐ हमारे रब! हमसे जहन्नम का अज़ाब दूर कर दे।"
यह दुआ उनके दिल की गहराई से निकलती है, क्योंकि वे जानते हैं कि जहन्नम का अज़ाब कोई आम अज़ाब नहीं है, बल्कि ग़राम है – यानी ऐसा अज़ाब जो हमेशा रहने वाला है, जो कभी खत्म नहीं होगा और न ही उसमें कोई कमी आएगी। जिस तरह कर्ज़दार का कर्ज़ उसका पीछा नहीं छोड़ता, उसी तरह जहन्नम का अज़ाब अपने लोगों का पीछा नहीं छोड़ेगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा मोमिन वह है जो इबादत भी करे और अल्लाह के अज़ाब से डरता भी रहे। वह अपनी इबादतों पर घमंड नहीं करता, बल्कि हमेशा अल्लाह की रहमत का मोहताज रहता है। यही विनम्रता और खौफ उसे अल्लाह के और करीब लाता है।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें भी इन नेक बंदों की तरह अपनी दुआओं में यह माँग करनी चाहिए कि अल्लाह हमें जहन्नम के अज़ाब से बचाए। यह दुआ हमारे ईमान की निशानी है, क्योंकि जब हम अज़ाब से डरते हैं तो हम अल्लाह की रहमत की तरफ रुजू करते हैं। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, वह चाहता है कि हम उससे डरें और उसी से पनाह माँगें। याद रखिए, जहन्नम का अज़ाब सच्चा है और उससे बचने का एक ही रास्ता है – अल्लाह की इबादत, उसके हुक्मों की पैरवी और उसकी रहमत की दुआ।
📜 आयत 63-67 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 65
सूरा अल-फुरकान आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह लोग जो दुआ करते हैं कि परवरदिगारा हम…सूरा आयत 65/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








