अश-शुआरा · 121/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ۝١٢١
Inna fee zaalika la Aayaah; wa maa kaana aksaruhum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक इसमे भी यक़ीनन बड़ी इबरत है और उनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • आयत — निशानी, सबक, सीख लेने की जगह
  • अक्सर — अधिकतर, बहुत से लोग
  • मोमिनीन — ईमान लाने वाले, सच्चे विश्वासी

तफसीर:

नूह अलैहिस्सलाम की यह पूरी कहानी — जिसमें उनकी दी हुई दावत, उनकी कौम का इनकार, तूफान का आना, ईमान वालों की नजात और काफिरों का हलाक होना — यह सब कुछ अपने आप में एक बहुत बड़ी निशानी और सबक है। जो लोग इसे सुनते या पढ़ते हैं, उनके लिए इसमें गहरी सीख है कि अल्लाह का वादा सच्चा है, उसकी मदद ईमान वालों के साथ होती है, और उसका अज़ाब इनकार करने वालों पर आकर रहता है।

लेकिन अफसोस! इतनी बड़ी निशानी और साफ सबक के बावजूद, उनमें से अधिकतर लोग ईमान नहीं लाए। यह बात इस बात की तरफ इशारा करती है कि इंसान की फितरत अक्सर सच्चाई को कबूल करने से इनकार करती है, जब तक कि अल्लाह की तौफीक उसके साथ न हो। यही वजह है कि हर ज़माने में नबियों की दावत के बावजूद अक्सर लोग ईमान से महरूम रहे।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने दिल को अल्लाह की निशानियों के सामने नरम रखना चाहिए। जब हम कुरान की कहानियाँ पढ़ते हैं, तो उन्हें सिर्फ कहानी न समझें, बल्कि उनसे सीख लें। अल्लाह की हर निशानी हमें उसकी तरफ बुलाती है। जो लोग इन निशानियों से सबक लेते हैं, वही कामयाब होते हैं, और जो इन्हें भूल जाते हैं या इनसे आँखें बंद कर लेते हैं, वही नुकसान उठाते हैं।

याद रखिए, अल्लाह की रहमत और हिदायत उन लोगों के लिए है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ रुजू करते हैं। नूह अलैहिस्सलाम की कौम में भी कुछ ही लोग ईमान लाए, लेकिन उन्हीं की नजात हुई। तो आज भी सच्चाई पर चलने वाले चाहे कितने ही कम हों, अल्लाह की मदद और नजात उन्हीं के साथ है। आइए, हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह की निशानियों से सबक लेते हैं और ईमान की राह पर चलते हैं।



📜 आयत 119-123 — अश-शुआरा

119فَأَنجَيْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ
ग़रज़ हमने नूह और उनके साथियों को जो भरी हुई कश्ती में थे नजात दी
120ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاقِينَ
फिर उसके बाद हमने बाक़ी लोगों को ग़रक कर दिया
121إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
बेशक इसमे भी यक़ीनन बड़ी इबरत है और उनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
122وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब मेहरबान है
123كَذَّبَتْ عَادٌ الْمُرْسَلِينَ
(इसी तरह क़ौम) आद ने पैग़म्बरों को झुठलाया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीRevelation
121आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 121

सूरा अश-शुआरा आयत 121 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक इसमे भी यक़ीनन बड़ी इबरत है और उनमें से…

सूरा आयत 121/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 119–123. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए