अश-शुआरा · 120/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاقِينَ ۝١٢٠
Summa aghraqnaa ba`dul baaqeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर उसके बाद हमने बाक़ी लोगों को ग़रक कर दिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَغْرَقْنَا: हमने डुबो दिया।
  • بَعْدُ: उसके बाद (नूह अलैहिस्सलाम और उनके साथियों के बचाए जाने के बाद)।
  • الْبَاقِينَ: शेष बचे हुए लोग, यानी वे जो ईमान नहीं लाए थे।

तफसीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब हमने नूह अलैहिस्सलाम और उनके साथ ईमान लाने वालों को कश्ती में सवार करके बचा लिया, तो उसके बाद हमने बाकी बचे हुए लोगों को—जिन्होंने नूह की नसीहत को ठुकरा दिया था और अपने कुफ्र व इन्कार पर अड़े रहे थे—पानी में डुबो कर हलाक कर दिया। यानी अल्लाह का अज़ाब उन पर इस तरह आया कि उनमें से कोई भी बच न सका। यह अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है कि उसने अपने नबी की दुआ को क़बूल किया और ज़ालिमों का सफ़ाया कर दिया।

यह वाक़िया हमारे लिए एक बड़ी सबक़ और नसीहत है। अल्लाह तआला अपने नबियों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को तबाह कर देता है। जो लोग हक़ को सुनकर भी उस पर ईमान नहीं लाते और अकड़ में रहते हैं, उनका अंजाम हलाकत के सिवा कुछ नहीं। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत ईमान लाने वालों के लिए है, और उसका अज़ाब इन्कार करने वालों के लिए। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने नबी की सुन्नत पर चलें, उनकी शिक्षाओं को क़बूल करें और अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें, ताकि हम उन लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह ने बचा लिया, न कि उनमें जो डुबो दिए गए।

🎧 सुनें

📜 आयत 118-122 — अश-शुआरा

118فَافْتَحْ بَيْنِي وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِي وَمَن مَّعِيَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
तो अब तू मेरे और इन लोगों के दरमियान एक क़तई फैसला कर दे और मुझे और जो मोमिनीन मेरे साथ हें उनको नजात दे
119فَأَنجَيْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ
ग़रज़ हमने नूह और उनके साथियों को जो भरी हुई कश्ती में थे नजात दी
120ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاقِينَ
फिर उसके बाद हमने बाक़ी लोगों को ग़रक कर दिया
121إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
बेशक इसमे भी यक़ीनन बड़ी इबरत है और उनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
122وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब मेहरबान है
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अनुवाद — अश-शुआरा 120

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Tuesday, August 18, 2026

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