अश-शुआरा · 122/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝١٢٢
Wa inna Rabbaka la huwal `Azeezur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब मेहरबान है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • العَزِيزُ: अत्यंत शक्तिशाली, जो अपने प्रतिशोध और अपनी सत्ता में अजेय हो।
  • الرَّحِيمُ: अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर असीम रहमत (दया) करने वाला हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब — वही अकेला सच्चा प्रभु — निश्चित रूप से अत्यंत शक्तिशाली और अजेय है। उसकी शक्ति का अंदाज़ा इससे लगाइए कि जो कोई उसके हुक्म की उल्लंघना करता है या उसके साथ कुफ़्र (अविश्वास) करता है, उसे वह अपनी पकड़ में लेकर ऐसा बदला देता है जिससे कोई बच नहीं सकता। उसका प्रतिशोध अत्यंत कठोर है, और उसके आगे कोई ताक़त टिक नहीं सकती।

लेकिन साथ ही, वही रब अपने ईमानवाले बंदों पर असीम दया करने वाला है। उसकी रहमत (दया) का दामन इतना विस्तृत है कि जो बंदा गुनाह करके भी उसकी ओर तौबा (पश्चाताप) करके लौट आता है, वह उसे माफ़ कर देता है और उस पर अपनी विशेष कृपा बरसाता है।

इस आयत में अल्लाह ने अपने दो गुणों — "अज़्ज़त" (शक्ति) और "रहमत" (दया) — को एक साथ जोड़कर यह सिखाया है कि उसकी शक्ति उसकी दया से अलग नहीं है। वह जब सज़ा देता है, तो न्याय के साथ देता है, और जब माफ़ी देता है, तो अपनी असीम दया के कारण देता है। यही उसकी पहचान है — वह शक्तिशाली भी है और दयालु भी।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अल्लाह की शक्ति से डरना चाहिए और उसकी दया की उम्मीद रखनी चाहिए। डर और उम्मीद के इसी संतुलन में एक मुसलमान की ज़िंदगी गुज़रती है। जो लोग उसकी रहमत से निराश हो जाते हैं, वे उसकी शक्ति को भूल जाते हैं, और जो उसकी पकड़ से निडर हो जाते हैं, वे उसकी दया को भूल जाते हैं।

ऐ बंदे! अपने रब की तरफ़ लौट आ — वह तेरे गुनाहों को माफ़ करने के लिए तैयार है, बशर्ते तू सच्चे दिल से उसकी ओर रुजू करे। उसकी रहमत की कोई सीमा नहीं, और उसकी शक्ति का कोई मुक़ाबला नहीं। यही उसका परिचय है — अज़ीज़ भी, रहीम भी।

🎧 सुनें

📜 आयत 120-124 — अश-शुआरा

120ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاقِينَ
फिर उसके बाद हमने बाक़ी लोगों को ग़रक कर दिया
121إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
बेशक इसमे भी यक़ीनन बड़ी इबरत है और उनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
122وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब मेहरबान है
123كَذَّبَتْ عَادٌ الْمُرْسَلِينَ
(इसी तरह क़ौम) आद ने पैग़म्बरों को झुठलाया
124إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उनके भाई हूद ने उनसे कहा कि तुम ख़ुदा से क्यों नही डरते
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अनुवाद — अश-शुआरा 122

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Tuesday, August 18, 2026

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