अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَذَّبَتْ: झुठलाया, असत्य कहा
- عَادٌ: आद की क़ौम (जनजाति), जो हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम थी
- الْمُرْسَلِينَ: रसूलों को, पैग़म्बरों को
तफ़सीर (व्याख्या):
आद की क़ौम ने अपने रसूल हूद अलैहिस्सलाम को झुठलाया। यह क़ौम अपनी ताक़त और शारीरिक बल के लिए मशहूर थी, लेकिन उनकी यही ताक़त उनके लिए अभिमान और घमंड का कारण बन गई। जब उनके पास अल्लाह का रसूल हूद अलैहिस्सलाम आए और उन्हें एक अल्लाह की इबादत की दावत दी, तो उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया और उसे झुठलाया।
यहाँ यह बात समझनी चाहिए कि जब किसी क़ौम का रसूल झुठलाया जाता है, तो वह सभी रसूलों को झुठलाने के बराबर है। क्योंकि सभी रसूलों का दीन एक ही है — तौहीद (एक अल्लाह की इबादत) और अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना। जो कोई एक रसूल को झुठलाता है, वह उस मूल सत्य को अस्वीकार करता है जिसे सभी रसूल लेकर आए थे। इसलिए अल्लाह ने फ़रमाया कि आद ने "रसूलों" को झुठलाया, हालाँकि उनके पास केवल एक ही रसूल हूद अलैहिस्सलाम आए थे।
यह क़ौम अपनी ताक़त और बड़ी-बड़ी इमारतों पर इतराती थी, और उन्हें लगता था कि उनकी ताक़त उन्हें किसी भी अज़ाब से बचा लेगी। लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा कि जिस अल्लाह ने उन्हें यह ताक़त दी है, वही उनसे यह ताक़त छीन सकता है। उनका घमंड और अकड़ उनके विनाश का कारण बना।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हमें अपनी किसी भी नेमत पर घमंड नहीं करना चाहिए। चाहे हमारे पास ताक़त हो, धन हो, ज्ञान हो या कोई और चीज़ — यह सब अल्लाह की देन है। और अल्लाह के रसूलों की दावत को कभी झुठलाना नहीं चाहिए। सच्ची कामयाबी उसी में है कि हम अल्लाह के रसूलों की बात मानें और उनके बताए रास्ते पर चलें। याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसके अज़ाब से कोई नहीं बच सकता।
📜 आयत 121-125 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 123
सूरा अश-शुआरा आयत 123 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (इसी तरह क़ौम) आद ने पैग़म्बरों को झुठलायासूरा आयत 123/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 121–125. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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