अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अख़ूहुम (उनका भाई) — यहाँ अर्थ है नसब (ख़ानदान) में भाई, दीन में नहीं।
- हूद — आद क़ौम की ओर भेजे गए नबी का नाम।
- अला तत्तक़ून — क्या तुम अल्लाह से डरते नहीं? अर्थात उसकी नाफ़रमानी से बचते नहीं?
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम 'आद' का ज़िक्र कर रहे हैं। जब उन्होंने अपनी क़ौम को नसीहत की और उनसे कहा: "क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते?" यानी क्या तुम उस अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़कर बुतों की पूजा करने में कोई झिझक महसूस नहीं करते? क्या तुम्हें उस अल्लाह का ख़ौफ़ नहीं जो तुम्हारा ख़ालिक़, मालिक और रिज़्क़ देने वाला है?
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम उनके अपने भाई थे — नसब में, ताकि वे उनकी बात को क़ुबूल करने में आसानी महसूस करें। यह अल्लाह की रहमत है कि वह हर क़ौम में उन्हीं में से एक रसूल भेजता है, ताकि वे उनकी भाषा समझें और उन पर भरोसा कर सकें। हज़रत हूद ने उन्हें तक़वा (अल्लाह का डर) की दावत दी — यही सबसे पहली और सबसे बुनियादी दावत है। जब दिल में अल्लाह का डर पैदा हो जाए, तो इंसान गुनाहों से बचता है और नेकियों की तरफ़ रुजू करता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि नसीहत और दावत का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि इंसान अपने भाइयों, रिश्तेदारों और अपनी क़ौम के लोगों को प्यार और नर्मी से अल्लाह की तरफ़ बुलाए। हज़रत हूद ने अपनी क़ौम को 'अला तत्तक़ून' कहकर उनके दिलों में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करने की कोशिश की। यही तरीक़ा हमें भी अपनाना चाहिए — पहले लोगों के दिलों में अल्लाह का डर पैदा करें, फिर उन्हें नेकी की तरफ़ ले जाएँ। अल्लाह का डर ही वह चीज़ है जो इंसान को हर बुराई से रोकती है और हर भलाई की तरफ़ ले जाती है। आज के दौर में भी अगर हम अपने घर, अपनी क़ौम और अपने समाज के लोगों को अल्लाह के डर की दावत दें, तो समाज में बुराइयाँ कम होंगी और अच्छाइयाँ बढ़ेंगी।
📜 आयत 122-126 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 124
सूरा अश-शुआरा आयत 124 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब उनके भाई हूद ने उनसे कहा कि तुम ख़ुदा…सूरा आयत 124/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 122–126. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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