अश-शुआरा · 124/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ ۝١٢٤
Iz qaala lahum akhoohum Hoodun alaa tattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
जब उनके भाई हूद ने उनसे कहा कि तुम ख़ुदा से क्यों नही डरते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अख़ूहुम (उनका भाई) — यहाँ अर्थ है नसब (ख़ानदान) में भाई, दीन में नहीं।
  • हूद — आद क़ौम की ओर भेजे गए नबी का नाम।
  • अला तत्तक़ून — क्या तुम अल्लाह से डरते नहीं? अर्थात उसकी नाफ़रमानी से बचते नहीं?

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम 'आद' का ज़िक्र कर रहे हैं। जब उन्होंने अपनी क़ौम को नसीहत की और उनसे कहा: "क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते?" यानी क्या तुम उस अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़कर बुतों की पूजा करने में कोई झिझक महसूस नहीं करते? क्या तुम्हें उस अल्लाह का ख़ौफ़ नहीं जो तुम्हारा ख़ालिक़, मालिक और रिज़्क़ देने वाला है?

हज़रत हूद अलैहिस्सलाम उनके अपने भाई थे — नसब में, ताकि वे उनकी बात को क़ुबूल करने में आसानी महसूस करें। यह अल्लाह की रहमत है कि वह हर क़ौम में उन्हीं में से एक रसूल भेजता है, ताकि वे उनकी भाषा समझें और उन पर भरोसा कर सकें। हज़रत हूद ने उन्हें तक़वा (अल्लाह का डर) की दावत दी — यही सबसे पहली और सबसे बुनियादी दावत है। जब दिल में अल्लाह का डर पैदा हो जाए, तो इंसान गुनाहों से बचता है और नेकियों की तरफ़ रुजू करता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि नसीहत और दावत का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि इंसान अपने भाइयों, रिश्तेदारों और अपनी क़ौम के लोगों को प्यार और नर्मी से अल्लाह की तरफ़ बुलाए। हज़रत हूद ने अपनी क़ौम को 'अला तत्तक़ून' कहकर उनके दिलों में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करने की कोशिश की। यही तरीक़ा हमें भी अपनाना चाहिए — पहले लोगों के दिलों में अल्लाह का डर पैदा करें, फिर उन्हें नेकी की तरफ़ ले जाएँ। अल्लाह का डर ही वह चीज़ है जो इंसान को हर बुराई से रोकती है और हर भलाई की तरफ़ ले जाती है। आज के दौर में भी अगर हम अपने घर, अपनी क़ौम और अपने समाज के लोगों को अल्लाह के डर की दावत दें, तो समाज में बुराइयाँ कम होंगी और अच्छाइयाँ बढ़ेंगी।



📜 आयत 122-126 — सूरा अश-शुआरा

122وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब मेहरबान है
123كَذَّبَتْ عَادٌ الْمُرْسَلِينَ
(इसी तरह क़ौम) आद ने पैग़म्बरों को झुठलाया
124إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उनके भाई हूद ने उनसे कहा कि तुम ख़ुदा से क्यों नही डरते
125إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
मैं तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ
126فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
124आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 124

सूरा अश-शुआरा आयत 124 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब उनके भाई हूद ने उनसे कहा कि तुम ख़ुदा…

सूरा आयत 124/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 122–126. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए