Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَرْسِلْ: भेज दो, छोड़ दो (यहाँ अर्थ है: उन्हें आज़ाद कर दो और हमारे साथ जाने दो)
- بَنِي إِسْرَائِيلَ: हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की औलाद, जो मिस्र में फ़िरऔन की ग़ुलामी में थे
तफ़सीर:
यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और हारून (अलैहिस्सलाम) के फ़िरऔन के पास जाने और उसे दावत देने का हिस्सा है। अल्लाह तआला ने इन दोनों भाइयों को फ़िरऔन के पास भेजा, जो अपने आप को "रब्बे-आला" (सबसे बड़ा रब) कहता था। उन्हें हुक्म दिया गया कि वे फ़िरऔन से कहें:
"हम आपके रब की तरफ़ से भेजे गए हैं, और हमारा पैग़ाम यह है कि आप बनी इस्राईल को हमारे साथ भेज दें।" यानी उन्हें ग़ुलामी और ज़ुल्म से आज़ाद कर दें, ताकि वे अपने वतन (शाम/फ़िलिस्तीन) की तरफ़ जा सकें और अपने दीन की इबादत कर सकें। फ़िरऔन ने बनी इस्राईल को बुरी तरह ग़ुलाम बना रखा था, उनके बेटों को ज़बह कर देता था और औरतों को ज़िंदा रखता था। यह एक बहुत बड़ा ज़ुल्म था।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि हक़ और इंसाफ़ की आवाज़ उठाना, मज़लूमों की मदद करना और ज़ालिमों के सामने सच बोलना कितनी बड़ी नेकी है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अकेले नहीं गए, बल्कि अपने भाई हारून को साथ ले गए, जो उनकी क़ुव्वत और मदद थे। यह हमें सिखाता है कि नेक काम में एक-दूसरे का साथ देना चाहिए।
अल्लाह तआला ने यह भी फ़रमाया कि "हम तुम्हारे साथ हैं, सुन रहे हैं और देख रहे हैं" — यानी अल्लाह का साथ हक़ पर चलने वालों के साथ होता है। जब कोई इंसान अल्लाह के दीन की दावत देता है और ज़ुल्म के खिलाफ़ आवाज़ उठाता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है, चाहे ज़ालिम कितना भी ताक़तवर क्यों न हो।
इस पैग़ाम में हमारे लिए बड़ी नसीहत है: हमें भी अपनी ज़िंदगी में हक़ की तरफ़ बुलाना चाहिए, ज़ुल्म के खिलाफ़ बोलना चाहिए, और यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह हमारे साथ है। जो लोग अल्लाह के दीन की ख़िदमत करते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। फ़िरऔन जैसी ज़ालिम हुकूमतें चाहे कितनी भी ताक़तवर हों, अल्लाह की मदद से हक़ बातिल पर ग़ालिब आकर रहता है। यही इस आयत का पैग़ाम है — कि सब्र और यक़ीन के साथ हक़ पर क़ायम रहो, अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी।
📜 आयत 15-19 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 17
सूरा अश-शुआरा आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि आप बनी इसराइल को हमारे साथ भेज दीजिएसूरा आयत 17/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


