अश-शुआरा · 18/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ أَلَمْ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدًا وَلَبِثْتَ فِينَا مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ ۝١٨
Qaala alam nurabbika feenaa waleedanw wa labista feenaa min `umurika sineen
📖 हिंदी अर्थ
(चुनान्चे मूसा गए और कहा) फिरऔन बोला (मूसा) क्या हमने तुम्हें यहाँ रख कर बचपने में तुम्हारी परवरिश नहीं की और तुम अपनी उम्र से बरसों हम मे रह सह चुके हो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَلِيدًا: छोटा बच्चा, नवजात शिशु।
  • لَبِثْتَ: तुम रहे, तुमने समय बिताया।
  • مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ: अपनी उम्र के कई वर्ष।

व्याख्या:

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को ईमान और अल्लाह की इबादत की दावत दी, तो फ़िरऔन ने घमंड और अहंकार से भरकर उन्हें याद दिलाना शुरू किया कि हमने तुम्हें अपने घर में पाला-पोसा है। उसने कहा: "क्या हमने तुम्हें बचपन में अपने यहाँ नहीं पाला? और तुम अपनी उम्र के कई साल हमारे बीच बिता चुके हो?" फ़िरऔन का इशारा उस एहसान की तरफ था जो उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) पर किया था, क्योंकि मूसा को बचपन में फ़िरऔन के ही घर में पाला गया था। वह यह कहकर मूसा (अलैहिस्सलाम) को शर्मिंदा करना चाहता था कि तुमने हमारे एहसानों का बदला हमारे खिलाफ बोलकर दिया।

फ़िरऔन ने आगे कहा: "और तुमने वह काम भी किया जो तुमने किया" यानी उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) को उस घटना की याद दिलाई जब उन्होंने एक क़िब्ती (मिस्री) व्यक्ति को मार दिया था, जबकि वह एक इस्राईली की मदद कर रहे थे। फ़िरऔन ने उन्हें याद दिलाया कि तुम हमारे एहसानों के बावजूद हमारे प्रति कृतघ्न हो, और अब तुम नबूवत का दावा करते हो।

फ़िरऔन का यह कहना उसके अहंकार और सच्चाई से मुँह मोड़ने की स्पष्ट मिसाल है। वह सच्चाई को नकारने के लिए दुनियावी एहसानों को आड़े ला रहा था, जबकि अल्लाह की तरफ से आया हुआ सच्चा पैग़ाम उसके घमंड को तोड़ने के लिए काफी था।

दावत और नसीहत:

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि दुनियावी एहसानों को कभी भी अल्लाह के दीन की सच्चाई पर तरजीह नहीं देनी चाहिए। फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) पर एहसान जताकर सच्चाई को दबाने की कोशिश की, लेकिन अल्लाह के नबी ने उसके सामने सच्चाई को पूरी वज़ाहत के साथ पेश किया। हमें भी चाहिए कि हम किसी के दुनियावी एहसानों की वजह से सच्चाई को न छोड़ें, क्योंकि अल्लाह का दीन ही सबसे बड़ी सच्चाई है। फ़िरऔन जैसे लोग आज भी मौजूद हैं जो अपने एहसान जताकर लोगों को सच्चाई से दूर रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन मूसा (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी सच्चाई पर डटे रहना चाहिए। अल्लाह हमें सच्चाई पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — अश-शुआरा

16فَأْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَا إِنَّا رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और (सारी गुफ्तगू) अच्छी तरह सुनते हैं ग़रज़ तुम दोनों फिरऔन के पास जाओ और कह दो कि हम सारे जहाँन के परवरदिगार के रसूल हैं (और पैग़ाम लाएँ हैं)
17أَنْ أَرْسِلْ مَعَنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ
कि आप बनी इसराइल को हमारे साथ भेज दीजिए
18قَالَ أَلَمْ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدًا وَلَبِثْتَ فِينَا مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ
(चुनान्चे मूसा गए और कहा) फिरऔन बोला (मूसा) क्या हमने तुम्हें यहाँ रख कर बचपने में तुम्हारी परवरिश नहीं की और तुम अपनी उम्र से बरसों हम मे रह सह चुके हो
19وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ الَّتِي فَعَلْتَ وَأَنتَ مِنَ الْكَافِرِينَ
और तुम अपना वह काम (ख़ून क़िब्ती) जो कर गए और तुम (बड़े) नाशुक्रे हो
20قَالَ فَعَلْتُهَا إِذًا وَأَنَا مِنَ الضَّالِّينَ
मूसा ने कहा (हाँ) मैने उस वक्त उस काम को किया जब मै हालते ग़फलत में था
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अनुवाद — अश-शुआरा 18

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Tuesday, August 18, 2026

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