Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَلِيدًا: छोटा बच्चा, नवजात शिशु।
- لَبِثْتَ: तुम रहे, तुमने समय बिताया।
- مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ: अपनी उम्र के कई वर्ष।
व्याख्या:
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को ईमान और अल्लाह की इबादत की दावत दी, तो फ़िरऔन ने घमंड और अहंकार से भरकर उन्हें याद दिलाना शुरू किया कि हमने तुम्हें अपने घर में पाला-पोसा है। उसने कहा: "क्या हमने तुम्हें बचपन में अपने यहाँ नहीं पाला? और तुम अपनी उम्र के कई साल हमारे बीच बिता चुके हो?" फ़िरऔन का इशारा उस एहसान की तरफ था जो उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) पर किया था, क्योंकि मूसा को बचपन में फ़िरऔन के ही घर में पाला गया था। वह यह कहकर मूसा (अलैहिस्सलाम) को शर्मिंदा करना चाहता था कि तुमने हमारे एहसानों का बदला हमारे खिलाफ बोलकर दिया।
फ़िरऔन ने आगे कहा: "और तुमने वह काम भी किया जो तुमने किया" यानी उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) को उस घटना की याद दिलाई जब उन्होंने एक क़िब्ती (मिस्री) व्यक्ति को मार दिया था, जबकि वह एक इस्राईली की मदद कर रहे थे। फ़िरऔन ने उन्हें याद दिलाया कि तुम हमारे एहसानों के बावजूद हमारे प्रति कृतघ्न हो, और अब तुम नबूवत का दावा करते हो।
फ़िरऔन का यह कहना उसके अहंकार और सच्चाई से मुँह मोड़ने की स्पष्ट मिसाल है। वह सच्चाई को नकारने के लिए दुनियावी एहसानों को आड़े ला रहा था, जबकि अल्लाह की तरफ से आया हुआ सच्चा पैग़ाम उसके घमंड को तोड़ने के लिए काफी था।
दावत और नसीहत:
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि दुनियावी एहसानों को कभी भी अल्लाह के दीन की सच्चाई पर तरजीह नहीं देनी चाहिए। फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) पर एहसान जताकर सच्चाई को दबाने की कोशिश की, लेकिन अल्लाह के नबी ने उसके सामने सच्चाई को पूरी वज़ाहत के साथ पेश किया। हमें भी चाहिए कि हम किसी के दुनियावी एहसानों की वजह से सच्चाई को न छोड़ें, क्योंकि अल्लाह का दीन ही सबसे बड़ी सच्चाई है। फ़िरऔन जैसे लोग आज भी मौजूद हैं जो अपने एहसान जताकर लोगों को सच्चाई से दूर रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन मूसा (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी सच्चाई पर डटे रहना चाहिए। अल्लाह हमें सच्चाई पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 16-20 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 18
सूरा अश-शुआरा आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (चुनान्चे मूसा गए और कहा) फिरऔन बोला (मूसा) क्या हमने…सूरा आयत 18/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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