अश-शुआरा · 200/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
كَذَٰلِكَ سَلَكْنَاهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ ۝٢٠٠
Kazaalika salaknaahu fee quloobil mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
इसी तरह हमने (गोया ख़ुद) इस इन्कार को गुनाहगारों के दिलों में राह दी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَلَكْنَاهُ: हमने इसे (इनकार और कुफ्र को) दिलों में दाखिल कर दिया।
  • الْمُجْرِمِينَ: अपराधी, जो कुफ्र और शिर्क में लिप्त हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह हमने क़ुरआन को अरबी ज़बान में नाज़िल किया, और इसके बावजूद मुशरिकीन ने इसे नहीं माना, उसी तरह हमने इन अपराधियों के दिलों में कुफ्र और इनकार को दाखिल कर दिया है। यह इनकार उनके दिलों में इस कदर पैठ गया है कि वह उनके स्वभाव का हिस्सा बन गया है। यह उनके अपने ज़ुल्म और इजराम (अपराध) का नतीजा है — उन्होंने सच को ठुकराया, हक़ को नकारा, और अपनी सरकशी पर अड़े रहे। इसलिए अल्लाह ने उनके दिलों को मुहर कर दिया और उनमें इनकार को जड़ पकड़ा दिया। यह उनकी अपनी कमाई है, क्योंकि उन्होंने हक़ के आगे सर झुकाने से इनकार किया और अपनी ज़िद पर क़ायम रहे। अब उनके लिए कोई रास्ता नहीं बचता, सिवाय उस अज़ाब के जिसे उन्होंने ख़ुद अपने लिए कमाया है — जब तक कि वे उस भयानक यातना को अपनी आँखों से न देख लें, जिसका उन्हें वादा किया गया है।

दावती पहलू (उपदेशात्मक संदेश):

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि दिल की सफ़ाई और सच्चाई की तलब ही वह चाबी है जो इंसान को हिदायत की तरफ ले जाती है। जो लोग हक़ को सुनकर भी उसे नकारते हैं, उनके दिल धीरे-धीरे सख्त हो जाते हैं और वे हिदायत से महरूम हो जाते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को हमेशा नरम रखें, सच्चाई के लिए तैयार रखें, और अल्लाह से दुआ करें कि वह हमारे दिलों को हक़ क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। क़ुरआन वह किताब है जो हर उस दिल को ज़िंदगी देती है जो सच्चाई की तलाश में हो — और यही सबसे बड़ी नेमत है। अल्लाह हमें उन लोगों में से न बनाए जिनके दिलों पर मुहर लग गई, बल्कि हमें उन लोगों में से बनाए जो क़ुरआन को सुनकर उस पर अमल करते हैं और उसकी रोशनी में चलते हैं।



📜 आयत 198-202 — अश-शुआरा

198وَلَوْ نَزَّلْنَاهُ عَلَىٰ بَعْضِ الْأَعْجَمِينَ
और अगर हम इस क़ुरान को किसी दूसरी ज़बान वाले पर नाज़िल करते
199فَقَرَأَهُ عَلَيْهِم مَّا كَانُوا بِهِ مُؤْمِنِينَ
और वह उन अरबो के सामने उसको पढ़ता तो भी ये लोग उस पर ईमान लाने वाले न थे
200كَذَٰلِكَ سَلَكْنَاهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ
इसी तरह हमने (गोया ख़ुद) इस इन्कार को गुनाहगारों के दिलों में राह दी
201لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
ये लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब को न देख लेगें उस पर ईमान न लाएँगे
202فَيَأْتِيَهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
कि वह यकायक इस हालत में उन पर आ पडेग़ा कि उन्हें ख़बर भी न होगी
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अनुवाद — अश-शुआरा 200

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Tuesday, August 18, 2026

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