अश-शुआरा · 28/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُمْ تَعْقِلُونَ ۝٢٨
Qaala Rabbul mashriqi wal maghribi wa maa baina humaa in kuntum ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
मूसा ने कहा (वह ख़ुदा जो) पूरब पश्चिम और जो कुछ इन दोनों के दरमियान (सबका) मालिक है अगर तुम समझते हो (तो यही काफी है)

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अनुवाद — Tafsir

मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को और अधिक स्पष्ट और ठोस तर्क देते हुए कहा: "वही पालनहार है पूर्व और पश्चिम का, और जो कुछ इन दोनों के बीच है उसका भी।" यानी जिस तरह सूरज पूर्व से निकलता है और पश्चिम में डूबता है, और इस पूरी दुनिया में जो भी प्रकाश, अंधकार, जीव-जंतु, पेड़-पौधे, आकाशीय पिंड और अनगिनत चीज़ें हैं — इन सबका स्वामी और नियंत्रक वही अकेला अल्लाह है। यह सृष्टि की व्यवस्था, इसका नियम और इसका संतुलन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इसका एक ही रचयिता और पालनहार है।

मूसा (अलैहिस्सलाम) ने आगे कहा: "अगर तुम समझने-बूझने वाले हो" — यानी अगर तुम्हारे पास अक्ल और विवेक है, तो इन निशानियों को देखकर तुम अपने रब को पहचान सकते हो। यह एक दावत है कि जो लोग सच्चाई की तलाश में हैं, उनके लिए यह काफी है कि वे अपनी आँखें खोलकर इस कायनात पर ग़ौर करें।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की सबसे बड़ी दलील खुद अल्लाह की बनाई हुई यह दुनिया है। हर सुबह सूरज का निकलना और हर शाम उसका डूबना, दिन और रात का बदलना — यह सब अल्लाह की क़ुदरत की ज़िंदा निशानियाँ हैं। जिसके पास अक्ल है, वह इन निशानियों से अपने रब को पहचान लेता है और उसी की इबादत करता है। अल्लाह ने हमें अक्ल दी है ताकि हम उसकी निशानियों पर ग़ौर करें और उसे जानें। यही अक्ल हमारी सबसे बड़ी नेमत है, अगर हम इसका सही इस्तेमाल करें तो हम कभी गुमराह नहीं होंगे।

आओ, हम अपनी अक्ल को काम में लाएँ और इस कायनात के हर ज़र्रे में अपने रब की निशानियाँ देखें — यही सच्ची समझदारी है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 26-30 — अश-शुआरा

26قَالَ رَبُّكُمْ وَرَبُّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ
मूसा ने कहा (वही ख़ुदा जो कि) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे बाप दादाओं का परवरदिगार है
27قَالَ إِنَّ رَسُولَكُمُ الَّذِي أُرْسِلَ إِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌ
फिरऔन ने कहा (लोगों) ये रसूल जो तुम्हारे पास भेजा गया है हो न हो दीवाना है
28قَالَ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُمْ تَعْقِلُونَ
मूसा ने कहा (वह ख़ुदा जो) पूरब पश्चिम और जो कुछ इन दोनों के दरमियान (सबका) मालिक है अगर तुम समझते हो (तो यही काफी है)
29قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ إِلَٰهًا غَيْرِي لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُونِينَ
फिरऔन ने कहा अगर तुम मेरे सिवा किसी और को (अपना) ख़ुदा बनाया है तो मै ज़रुर तुम्हे कैदी बनाऊँगा
30قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُّبِينٍ
मूसा ने कहा अगरचे मैं आपको एक वाजेए व रौशन मौजिज़ा भी दिखाऊ (तो भी)
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अनुवाद — अश-शुआरा 28

सूरा अश-शुआरा आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मूसा ने कहा (वह ख़ुदा जो) पूरब पश्चिम और जो…

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Tuesday, August 18, 2026

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