अश-शुआरा · 79/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَالَّذِي هُوَ يُطْعِمُنِي وَيَسْقِينِ ۝٧٩
Wallazee Huwa yut`imunee wa yasqeen
📖 हिंदी अर्थ
और वह शख्स जो मुझे (खाना) खिलाता है और मुझे (पानी) पिलाता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُطْعِمُنِي: मुझे खिलाता है।
  • يَسْقِينِ: मुझे पिलाता है।

तफ़सीर:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को सम्बोधित करते हुए उन्हें उनके शिर्क (बहुदेववाद) पर टोकते हैं और उन्हें सच्चे दीन की ओर बुलाते हैं। वे फ़रमाते हैं कि जिन मूर्तियों की तुम पूजा करते हो, वे न तो सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, और न ही तुम्हें कोई लाभ या हानि पहुँचा सकती हैं। फिर वे अपने रब की नेअमतों (अनुग्रहों) का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि मेरा रब वही है जो मुझे खिलाता है और पिलाता है।

यह एक बहुत ही प्यारी और गहरी बात है। इब्राहीम अलैहिस्सलाम यह बता रहे हैं कि जब मुझे भूख लगती है, तो वही मुझे खाना देता है, और जब मुझे प्यास लगती है, तो वही मुझे पानी पिलाता है। ये चीज़ें इतनी आम हैं कि हम अक्सर इन पर ध्यान नहीं देते, लेकिन असल में यह अल्लाह की सबसे बड़ी नेअमतें हैं। हर रोज़ हम खाते-पीते हैं, लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि यह रिज़्क़ कौन देता है? क्या हमारे बुत (मूर्तियाँ) हमें खाना दे सकती हैं? क्या वे हमारी भूख मिटा सकती हैं? हरगिज़ नहीं!

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब की नेअमतों को पहचानना चाहिए और उसका शुक्र अदा करना चाहिए। जब हम रोटी का एक निवाला उठाते हैं, तो याद करें कि यह अल्लाह की देन है। जब हम पानी का एक घूँट पीते हैं, तो समझें कि यह अल्लाह की रहमत है। अल्लाह ने हमारे लिए ज़मीन से अनाज उगाया, आसमान से पानी बरसाया, और हमें खाने-पीने की ताक़त दी। यह सब उसी की मेहरबानी है।

इस आयत में एक और बात सीखने को मिलती है कि हमें अपनी ज़रूरतों में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जैसे इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह पर पूरा भरोसा किया और अल्लाह ने उन्हें कभी भूखा नहीं रखा, वैसे ही हमें भी अपने रब पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह कभी अपने बन्दों को भूखा-प्यासा नहीं छोड़ता, बशर्ते वे उसकी राह पर चलें और उसकी इबादत करें।

प्यारे दोस्तों! आज हम देखते हैं कि लोग दौलत, ओहदे और ताक़त पर इतराते हैं, लेकिन असल क़ुव्वत तो अल्लाह के हाथ में है। वही खिलाने वाला है, वही पिलाने वाला है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िन्दगी को अल्लाह के दीन के मुताबिक बनाएँ, उसकी इबादत करें और उसका शुक्र अदा करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें समझने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 77-81 — अश-शुआरा

77فَإِنَّهُمْ عَدُوٌّ لِّي إِلَّا رَبَّ الْعَالَمِينَ
मगर सारे जहाँ का पालने वाला जिसने मुझे पैदा किया (वही मेरा दोस्त है)
78الَّذِي خَلَقَنِي فَهُوَ يَهْدِينِ
फिर वही मेरी हिदायत करता है
79وَالَّذِي هُوَ يُطْعِمُنِي وَيَسْقِينِ
और वह शख्स जो मुझे (खाना) खिलाता है और मुझे (पानी) पिलाता है
80وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ
और जब बीमार पड़ता हूँ तो वही मुझे शिफा इनायत फरमाता है
81وَالَّذِي يُمِيتُنِي ثُمَّ يُحْيِينِ
और वह वही हेै जो मुझे मार डालेगा और उसके बाद (फिर) मुझे ज़िन्दा करेगा
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अनुवाद — अश-शुआरा 79

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Tuesday, August 18, 2026

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