अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُطْعِمُنِي: मुझे खिलाता है।
- يَسْقِينِ: मुझे पिलाता है।
तफ़सीर:
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को सम्बोधित करते हुए उन्हें उनके शिर्क (बहुदेववाद) पर टोकते हैं और उन्हें सच्चे दीन की ओर बुलाते हैं। वे फ़रमाते हैं कि जिन मूर्तियों की तुम पूजा करते हो, वे न तो सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, और न ही तुम्हें कोई लाभ या हानि पहुँचा सकती हैं। फिर वे अपने रब की नेअमतों (अनुग्रहों) का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि मेरा रब वही है जो मुझे खिलाता है और पिलाता है।
यह एक बहुत ही प्यारी और गहरी बात है। इब्राहीम अलैहिस्सलाम यह बता रहे हैं कि जब मुझे भूख लगती है, तो वही मुझे खाना देता है, और जब मुझे प्यास लगती है, तो वही मुझे पानी पिलाता है। ये चीज़ें इतनी आम हैं कि हम अक्सर इन पर ध्यान नहीं देते, लेकिन असल में यह अल्लाह की सबसे बड़ी नेअमतें हैं। हर रोज़ हम खाते-पीते हैं, लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि यह रिज़्क़ कौन देता है? क्या हमारे बुत (मूर्तियाँ) हमें खाना दे सकती हैं? क्या वे हमारी भूख मिटा सकती हैं? हरगिज़ नहीं!
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब की नेअमतों को पहचानना चाहिए और उसका शुक्र अदा करना चाहिए। जब हम रोटी का एक निवाला उठाते हैं, तो याद करें कि यह अल्लाह की देन है। जब हम पानी का एक घूँट पीते हैं, तो समझें कि यह अल्लाह की रहमत है। अल्लाह ने हमारे लिए ज़मीन से अनाज उगाया, आसमान से पानी बरसाया, और हमें खाने-पीने की ताक़त दी। यह सब उसी की मेहरबानी है।
इस आयत में एक और बात सीखने को मिलती है कि हमें अपनी ज़रूरतों में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जैसे इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह पर पूरा भरोसा किया और अल्लाह ने उन्हें कभी भूखा नहीं रखा, वैसे ही हमें भी अपने रब पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह कभी अपने बन्दों को भूखा-प्यासा नहीं छोड़ता, बशर्ते वे उसकी राह पर चलें और उसकी इबादत करें।
प्यारे दोस्तों! आज हम देखते हैं कि लोग दौलत, ओहदे और ताक़त पर इतराते हैं, लेकिन असल क़ुव्वत तो अल्लाह के हाथ में है। वही खिलाने वाला है, वही पिलाने वाला है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िन्दगी को अल्लाह के दीन के मुताबिक बनाएँ, उसकी इबादत करें और उसका शुक्र अदा करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें समझने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 77-81 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 79
सूरा अश-शुआरा आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह शख्स जो मुझे (खाना) खिलाता है और मुझे…सूरा आयत 79/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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