अश-शुआरा · 80/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ ۝٨٠
Wa izaa mardtu fahuwa yashfeen
📖 हिंदी अर्थ
और जब बीमार पड़ता हूँ तो वही मुझे शिफा इनायत फरमाता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَرِضْتُ – मैं बीमार पड़ा
  • يَشْفِينِ – वह मुझे शिफ़ा (आरोग्य) देता है

तफ़सीर:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को समझा रहे हैं कि जिन मूर्तियों की तुम पूजा करते हो, वह न सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न किसी को नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही किसी को फ़ायदा पहुँचा सकती हैं। वह तो मेरे दुश्मन हैं, बल्कि मेरा रिश्ता सिर्फ़ उस रब से है जो सारे जहान का पालनहार है।

इसी सिलसिले में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने रब की नेअमतों (अनुग्रहों) का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि जब मुझे कोई बीमारी लगती है, तो वही मुझे शिफ़ा देता है। यहाँ ग़ौर करने वाली बात यह है कि उन्होंने बीमारी को अपनी तरफ़ मंसूब किया (यानी "मैं बीमार पड़ा") लेकिन शिफ़ा को सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ मंसूब किया (यानी "वह मुझे शिफ़ा देता है")। यह अदब और अक़ीदे की बहुत बड़ी तालीम है – बीमारी इंसान के अपने नफ़्स की तरफ़ है, लेकिन शिफ़ा सिर्फ़ अल्लाह ही के हाथ में है। कोई डॉक्टर, कोई दवा, कोई वसीला शिफ़ा का ज़रिया ज़रूर हो सकता है, लेकिन असली शिफ़ा देने वाला सिर्फ़ अल्लाह है।

यह आयत हमें सिखाती है कि बीमारी में हमें अल्लाह ही से दुआ करनी चाहिए, उसी से उम्मीद रखनी चाहिए और इलाज के साथ-साथ अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जो दिल यक़ीन करता है कि शिफ़ा सिर्फ़ अल्लाह देता है, उसका दिल कभी मायूस नहीं होता। चाहे बीमारी कितनी भी लंबी क्यों न हो, मोमिन जानता है कि अल्लाह की रहमत से हर मुश्किल आसान हो सकती है। यही तो ईमान की मिठास है कि इंसान हर हाल में अपने रब से जुड़ा रहे – ख़ुशी में भी और ग़म में भी, सेहत में भी और बीमारी में भी।



📜 आयत 78-82 — सूरा अश-शुआरा

78الَّذِي خَلَقَنِي فَهُوَ يَهْدِينِ
फिर वही मेरी हिदायत करता है
79وَالَّذِي هُوَ يُطْعِمُنِي وَيَسْقِينِ
और वह शख्स जो मुझे (खाना) खिलाता है और मुझे (पानी) पिलाता है
80وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ
और जब बीमार पड़ता हूँ तो वही मुझे शिफा इनायत फरमाता है
81وَالَّذِي يُمِيتُنِي ثُمَّ يُحْيِينِ
और वह वही हेै जो मुझे मार डालेगा और उसके बाद (फिर) मुझे ज़िन्दा करेगा
82وَالَّذِي أَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لِي خَطِيئَتِي يَوْمَ الدِّينِ
और वह वही है जिससे मै उम्मीद रखता हूँ कि क़यामत के दिन मेरी ख़ताओं को बख्श देगा
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
80आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 80

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Thursday, October 1, 2026

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