अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَرِضْتُ – मैं बीमार पड़ा
- يَشْفِينِ – वह मुझे शिफ़ा (आरोग्य) देता है
तफ़सीर:
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को समझा रहे हैं कि जिन मूर्तियों की तुम पूजा करते हो, वह न सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न किसी को नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही किसी को फ़ायदा पहुँचा सकती हैं। वह तो मेरे दुश्मन हैं, बल्कि मेरा रिश्ता सिर्फ़ उस रब से है जो सारे जहान का पालनहार है।
इसी सिलसिले में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने रब की नेअमतों (अनुग्रहों) का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि जब मुझे कोई बीमारी लगती है, तो वही मुझे शिफ़ा देता है। यहाँ ग़ौर करने वाली बात यह है कि उन्होंने बीमारी को अपनी तरफ़ मंसूब किया (यानी "मैं बीमार पड़ा") लेकिन शिफ़ा को सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ मंसूब किया (यानी "वह मुझे शिफ़ा देता है")। यह अदब और अक़ीदे की बहुत बड़ी तालीम है – बीमारी इंसान के अपने नफ़्स की तरफ़ है, लेकिन शिफ़ा सिर्फ़ अल्लाह ही के हाथ में है। कोई डॉक्टर, कोई दवा, कोई वसीला शिफ़ा का ज़रिया ज़रूर हो सकता है, लेकिन असली शिफ़ा देने वाला सिर्फ़ अल्लाह है।
यह आयत हमें सिखाती है कि बीमारी में हमें अल्लाह ही से दुआ करनी चाहिए, उसी से उम्मीद रखनी चाहिए और इलाज के साथ-साथ अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जो दिल यक़ीन करता है कि शिफ़ा सिर्फ़ अल्लाह देता है, उसका दिल कभी मायूस नहीं होता। चाहे बीमारी कितनी भी लंबी क्यों न हो, मोमिन जानता है कि अल्लाह की रहमत से हर मुश्किल आसान हो सकती है। यही तो ईमान की मिठास है कि इंसान हर हाल में अपने रब से जुड़ा रहे – ख़ुशी में भी और ग़म में भी, सेहत में भी और बीमारी में भी।
📜 आयत 78-82 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 80
सूरा अश-शुआरा आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब बीमार पड़ता हूँ तो वही मुझे शिफा इनायत…सूरा आयत 80/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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