अश-शुआरा · 86/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَاغْفِرْ لِأَبِي إِنَّهُ كَانَ مِنَ الضَّالِّينَ ۝٨٦
Waghfir li abeee innahoo kaana mind daalleen
📖 हिंदी अर्थ
और मेरे (मुँह बोले) बाप (चचा आज़र) को बख्श दे क्योंकि वह गुमराहों में से है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاغْفِرْ: क्षमा कर दे, माफ़ कर दे।
  • لِأَبِي: मेरे पिता के लिए।
  • إِنَّهُ: वास्तव में वह।
  • كَانَ مِنَ الضَّالِّينَ: वह पथभ्रष्ट लोगों में से था।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की वह दुआ है जो उन्होंने अपने पिता (आज़र) के लिए की थी। यह दुआ उन्होंने उस समय की जब उन्हें यह पता नहीं था कि उनके पिता का अंजाम क्या होगा। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने पिता से प्यार और शफ़क़त के कारण यह दुआ माँगी कि ऐ मेरे रब! मेरे पिता को क्षमा कर दे, क्योंकि वह तेरी राह से भटक गए हैं और शिर्क (बुतपरस्ती) में डूबे हुए हैं।

यह दुआ हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने पिता से किए गए वादे के अनुसार की थी, जैसा कि कुरआन में अन्य स्थानों पर उल्लेख है। लेकिन जब उन्हें यह स्पष्ट हो गया कि उनके पिता कुफ़्र और शिर्क पर मरेंगे और वह अल्लाह के दुश्मन हैं, तो उन्होंने उनसे बराअत (अलगाव) का एलान कर दिया और उनके लिए दुआ करना बंद कर दिया। यह सिखाता है कि रिश्तेदारों के लिए दुआ करना अच्छा है, लेकिन जब यह साबित हो जाए कि वह अल्लाह के दुश्मन हैं और कुफ़्र पर मरेंगे, तो उनके लिए मग़फ़िरत की दुआ करना जायज़ नहीं है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम जैसे नबी ने अपने पिता के लिए इतनी मुहब्बत और दुआ की, जो उनके दिल की नर्मी और रहमदिली को दर्शाता है। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा सबक़ है कि हम अपने माता-पिता और रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करें, उनके लिए दुआ करें, और उन्हें सही राह दिखाने की कोशिश करें। लेकिन साथ ही, हमें यह भी याद रखना चाहिए कि अल्लाह की राह और उसका दीन सबसे ऊपर है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर कुफ़्र और शिर्क पर अड़ा रहे, तो हमें उससे मुहब्बत में भी अल्लाह की नाराज़गी से बचना चाहिए।

यह दुआ हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह से माफ़ी माँगना कितना बड़ा सौभाग्य है। अल्लाह बहुत क्षमाशील और दयालु है, और वह अपने बंदों की दुआओं को सुनता है। हमें चाहिए कि हम अपने लिए, अपने माता-पिता के लिए और अपने मुसलमान भाइयों के लिए हमेशा दुआ करते रहें, क्योंकि दुआ एक मोमिन का सबसे बड़ा हथियार है।



📜 आयत 84-88 — अश-शुआरा

84وَاجْعَل لِّي لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْآخِرِينَ
और आइन्दा आने वाली नस्लों में मेरा ज़िक्रे ख़ैर क़ायम रख
85وَاجْعَلْنِي مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِ
और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहश्त) के वारिसों में से बना
86وَاغْفِرْ لِأَبِي إِنَّهُ كَانَ مِنَ الضَّالِّينَ
और मेरे (मुँह बोले) बाप (चचा आज़र) को बख्श दे क्योंकि वह गुमराहों में से है
87وَلَا تُخْزِنِي يَوْمَ يُبْعَثُونَ
और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा न करना
88يَوْمَ لَا يَنفَعُ مَالٌ وَلَا بَنُونَ
जिस दिन न तो माल ही कुछ काम आएगा और न लड़के बाले
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अनुवाद — अश-शुआरा 86

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Tuesday, August 18, 2026

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