अश-शुआरा · 85/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَاجْعَلْنِي مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِ ۝٨٥
Waj`alnee minw warasati Jannnatin Na`eem
📖 हिंदी अर्थ
और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहश्त) के वारिसों में से बना

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاجْعَلْنِي: मुझे बना दे, मुझे शामिल कर ले
  • مِن وَرَثَةِ: उन लोगों में से जो वारिस होंगे
  • جَنَّةِ النَّعِيمِ: उस जन्नत के जो नेमतों और आराम से भरी हुई है

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी दुआओं में अल्लाह से यह भी प्रार्थना कर रहे हैं कि "ऐ मेरे रब! मुझे उन लोगों में से बना दे जो जन्नतुल-नईम के वारिस होंगे।" यानी उस जन्नत के, जिसमें हर तरह की नेमतें, सुख-चैन और आराम मौजूद है, और जो तेरे नेक बंदों के लिए तैयार की गई है।

यह दुआ हमें सिखाती है कि नबी भी अल्लाह से जन्नत की दौलत मांगते थे, और यह कि जन्नत पाना केवल अमल का नतीजा नहीं, बल्कि अल्लाह का फज़ल और करम है। इसलिए हमें भी चाहिए कि हम अल्लाह से दुआ करें कि हमें जन्नत का वारिस बनाए, और उसके लिए नेक अमल करते रहें।

यह दुआ हमें यह भी बताती है कि जन्नत एक ऐसी चीज़ है जो विरासत में मिलती है — यानी अल्लाह अपने बंदों को अपनी रहमत से उसे देता है, जैसे कोई अपने वारिसों को विरासत देता है। और यह विरासत उन्हीं को मिलती है जो ईमान लाते हैं, नेक अमल करते हैं, और अल्लाह की राह में सब्र करते हैं।

प्यारे भाइयो और बहनों! हमें भी इस दुआ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए। जब हम यह दुआ पढ़ें तो दिल से यह चाहत रखें कि हम भी उन लोगों में से हों जो जन्नतुल-नईम के वारिस होंगे। और याद रखें, यह दुआ सिर्फ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अमल से भी मांगनी होती है — यानी अपने ईमान, इबादत और अच्छे कामों से हम यह साबित करें कि हम सच में उस जन्नत के हक़दार बनना चाहते हैं। अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से जन्नतुल-नईम का वारिस बनाए। आमीन।



📜 आयत 83-87 — सूरा अश-शुआरा

83رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ
परवरदिगार मुझे इल्म व फहम अता फरमा और मुझे नेकों के साथ शामिल कर
84وَاجْعَل لِّي لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْآخِرِينَ
और आइन्दा आने वाली नस्लों में मेरा ज़िक्रे ख़ैर क़ायम रख
85وَاجْعَلْنِي مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِ
और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहश्त) के वारिसों में से बना
86وَاغْفِرْ لِأَبِي إِنَّهُ كَانَ مِنَ الضَّالِّينَ
और मेरे (मुँह बोले) बाप (चचा आज़र) को बख्श दे क्योंकि वह गुमराहों में से है
87وَلَا تُخْزِنِي يَوْمَ يُبْعَثُونَ
और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा न करना
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
85आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 85

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Thursday, October 1, 2026

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