अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तुखज़िनी (تُخْزِنِي): मुझे अपमानित न कर, मुझे रुसवा न कर, मुझे शर्मिंदा न कर।
- यौमा युब'असून (يَوْمَ يُبْعَثُونَ): जिस दिन सभी लोग (क़ब्रों से) उठाए जाएँगे, यानी क़ियामत का दिन।
विस्तृत तफ़सीर:
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की यह दुआ है जो उन्होंने अपने रब से की — "ऐ मेरे पालनहार! उस दिन मुझे रुसवा न करना, जिस दिन सभी इंसान क़ब्रों से उठाए जाएँगे।" यानी उस महान दिन, जब हर कोई अपने कर्मों का हिसाब देने के लिए खड़ा होगा, मुझे अपमान और शर्मिंदगी से बचा लेना।
यह दुआ सिखाती है कि सबसे बड़ी सफलता उस दिन की बेइज़्ज़ती से बचना है। उस दिन न तो धन काम आएगा, न बेटे-बेटियाँ, न रिश्तेदार, न दोस्त — केवल वही इंसान कामयाब होगा जो अल्लाह के सामने पाक और साफ़ दिल के साथ हाज़िर होगा, जिसका दिल कुफ्र, निफ़ाक़ और बुराइयों से पाक होगा।
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम — जो अल्लाह के ख़लील (दोस्त) कहलाते हैं — फिर भी उस दिन की रुसवाई से डरते हैं और अपने रब से पनाह माँगते हैं। यह हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। जब इतने बड़े नबी को यह डर है, तो हम गुनाहगारों को तो और भी ज़्यादा उस दिन की फ़िक्र करनी चाहिए। यही वह दिन है जब हर इंसान की असलियत सामने आ जाएगी, और हर कोई यही चाहेगा कि काश मैं उस दिन की रुसवाई से बच जाता।
यह दुआ हमें सिखाती है कि हमें हर वक़्त अल्लाह से यही माँगना चाहिए कि ऐ अल्लाह! हमें उस दिन शर्मिंदा न करना, हमें उस दिन के अज़ाब से बचा लेना, और हमें उन बंदों में शामिल करना जिनका चेहरा उस दिन रौशन होगा। यह दुआ हमारे दिल में क़ियामत का ख़ौफ़ पैदा करती है और हमें अच्छे कर्मों की तरफ़ राग़िब करती है। आइए, हम भी इस दुआ को अपनी दुआओं में शामिल करें और उस दिन की रुसवाई से बचने के लिए आज ही अमल करना शुरू कर दें।
📜 आयत 85-89 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 87
सूरा अश-शुआरा आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा…सूरा आयत 87/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








