अश-शुआरा · 87/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَلَا تُخْزِنِي يَوْمَ يُبْعَثُونَ ۝٨٧
Wa laa tukhzinee Yawma yub`asoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा न करना

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • तुखज़िनी (تُخْزِنِي): मुझे अपमानित न कर, मुझे रुसवा न कर, मुझे शर्मिंदा न कर।
  • यौमा युब'असून (يَوْمَ يُبْعَثُونَ): जिस दिन सभी लोग (क़ब्रों से) उठाए जाएँगे, यानी क़ियामत का दिन।

विस्तृत तफ़सीर:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की यह दुआ है जो उन्होंने अपने रब से की — "ऐ मेरे पालनहार! उस दिन मुझे रुसवा न करना, जिस दिन सभी इंसान क़ब्रों से उठाए जाएँगे।" यानी उस महान दिन, जब हर कोई अपने कर्मों का हिसाब देने के लिए खड़ा होगा, मुझे अपमान और शर्मिंदगी से बचा लेना।

यह दुआ सिखाती है कि सबसे बड़ी सफलता उस दिन की बेइज़्ज़ती से बचना है। उस दिन न तो धन काम आएगा, न बेटे-बेटियाँ, न रिश्तेदार, न दोस्त — केवल वही इंसान कामयाब होगा जो अल्लाह के सामने पाक और साफ़ दिल के साथ हाज़िर होगा, जिसका दिल कुफ्र, निफ़ाक़ और बुराइयों से पाक होगा।

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम — जो अल्लाह के ख़लील (दोस्त) कहलाते हैं — फिर भी उस दिन की रुसवाई से डरते हैं और अपने रब से पनाह माँगते हैं। यह हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। जब इतने बड़े नबी को यह डर है, तो हम गुनाहगारों को तो और भी ज़्यादा उस दिन की फ़िक्र करनी चाहिए। यही वह दिन है जब हर इंसान की असलियत सामने आ जाएगी, और हर कोई यही चाहेगा कि काश मैं उस दिन की रुसवाई से बच जाता।

यह दुआ हमें सिखाती है कि हमें हर वक़्त अल्लाह से यही माँगना चाहिए कि ऐ अल्लाह! हमें उस दिन शर्मिंदा न करना, हमें उस दिन के अज़ाब से बचा लेना, और हमें उन बंदों में शामिल करना जिनका चेहरा उस दिन रौशन होगा। यह दुआ हमारे दिल में क़ियामत का ख़ौफ़ पैदा करती है और हमें अच्छे कर्मों की तरफ़ राग़िब करती है। आइए, हम भी इस दुआ को अपनी दुआओं में शामिल करें और उस दिन की रुसवाई से बचने के लिए आज ही अमल करना शुरू कर दें।



📜 आयत 85-89 — सूरा अश-शुआरा

85وَاجْعَلْنِي مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِ
और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहश्त) के वारिसों में से बना
86وَاغْفِرْ لِأَبِي إِنَّهُ كَانَ مِنَ الضَّالِّينَ
और मेरे (मुँह बोले) बाप (चचा आज़र) को बख्श दे क्योंकि वह गुमराहों में से है
87وَلَا تُخْزِنِي يَوْمَ يُبْعَثُونَ
और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा न करना
88يَوْمَ لَا يَنفَعُ مَالٌ وَلَا بَنُونَ
जिस दिन न तो माल ही कुछ काम आएगा और न लड़के बाले
89إِلَّا مَنْ أَتَى اللَّهَ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ
मगर जो शख्स ख़ुदा के सामने (गुनाहों से) पाक दिल लिए हुए हाज़िर होगा (वह फायदे में रहेगा)
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
87आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 87

सूरा अश-शुआरा आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा…

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Thursday, October 1, 2026

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