Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَكَرُوا مَكْرًا: उन्होंने चाल चली, अर्थात अपने इरादों को छिपाकर एक योजना बनाई।
- مَكَرْنَا مَكْرًا: हमने भी उनके मुकाबले में एक योजना बनाई, अर्थात उनकी चाल का ऐसा जवाब दिया जिसका उन्हें एहसास भी न हुआ।
- لَا يَشْعُرُونَ: उन्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं था, वे बेखबर थे।
तफ़सीर:
यह आयत उस क़ौम के हालात बयान करती है जिसने अल्लाह के नबी सालिह (अलैहिस्सलाम) के खिलाफ गुप्त साज़िश रची। उन लोगों ने आपस में मिलकर एक ख़ुफ़िया योजना बनाई कि रात के अंधेरे में नबी सालिह और उनके साथियों पर धावा बोलकर उन्हें ख़त्म कर दिया जाए। उनका मकसद था कि यह काम इस तरह से किया जाए कि किसी को पता न चले और वे बचकर निकल जाएं। उन्होंने सोचा था कि उनकी यह चाल कामयाब हो जाएगी और वे हमेशा के लिए इस "मुसीबत" से निजात पा लेंगे।
लेकिन अल्लाह तआला की शान है कि वह सब कुछ जानता है। उनकी साज़िश का पूरा इल्म रखते हुए अल्लाह ने भी अपनी योजना बनाई — यानी उनकी चाल का ऐसा जवाब दिया जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। अल्लाह ने अपने नबी को उनकी मक्कारी से बचाया और उन्हीं साज़िशकर्ताओं को उनकी साज़िश का शिकार बना दिया। जिस रात वे नबी को ख़त्म करने की योजना बना रहे थे, अल्लाह ने उन्हीं पर अपना अज़ाब नाज़िल कर दिया — और वे इस हालत में थे कि उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उनका अंजाम क्या होने वाला है।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है: इंसान चाहे कितनी भी बारीक और गुप्त साज़िशें रच ले, अल्लाह की योजना से बड़ी कोई योजना नहीं हो सकती। अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त ख़ुद करता है, और ज़ालिमों की चालें उन्हीं के ऊपर उलट जाती हैं। इसलिए हमें कभी किसी के साथ धोखा या बुराई की योजना नहीं बनानी चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ देख रहा है और वही सबसे बेहतर योजना बनाने वाला है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुश्किल से निकालने का रास्ता निकालता है — चाहे दुश्मन कितनी भी ताकतवर क्यों न हो।
यह क़िस्सा हमारे लिए इसलिए भी अहम है कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह की मदद हमेशा सच्चे मोमिनों के साथ होती है। नबी सालिह अकेले थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें बचा लिया और पूरी ज़ालिम क़ौम को तबाह कर दिया। यही वादा हर उस इंसान के साथ है जो अल्लाह की राह पर चलता है और उस पर भरोसा रखता है।
📜 आयत 48-52 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 50
सूरा अन-नमल आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन लोगों ने एक तदबीर की और हमने भी…सूरा आयत 50/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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