अन-नमल · 50/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَمَكَرُوا مَكْرًا وَمَكَرْنَا مَكْرًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ۝٥٠
Wa makaroo makranw wa makarnaa makranw wa hum laa yash`uroon
📖 हिंदी अर्थ
और उन लोगों ने एक तदबीर की और हमने भी एक तदबीर की और (हमारी तदबीर की) उनको ख़बर भी न हुई

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَكَرُوا مَكْرًا: उन्होंने चाल चली, अर्थात अपने इरादों को छिपाकर एक योजना बनाई।
  • مَكَرْنَا مَكْرًا: हमने भी उनके मुकाबले में एक योजना बनाई, अर्थात उनकी चाल का ऐसा जवाब दिया जिसका उन्हें एहसास भी न हुआ।
  • لَا يَشْعُرُونَ: उन्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं था, वे बेखबर थे।

तफ़सीर:

यह आयत उस क़ौम के हालात बयान करती है जिसने अल्लाह के नबी सालिह (अलैहिस्सलाम) के खिलाफ गुप्त साज़िश रची। उन लोगों ने आपस में मिलकर एक ख़ुफ़िया योजना बनाई कि रात के अंधेरे में नबी सालिह और उनके साथियों पर धावा बोलकर उन्हें ख़त्म कर दिया जाए। उनका मकसद था कि यह काम इस तरह से किया जाए कि किसी को पता न चले और वे बचकर निकल जाएं। उन्होंने सोचा था कि उनकी यह चाल कामयाब हो जाएगी और वे हमेशा के लिए इस "मुसीबत" से निजात पा लेंगे।

लेकिन अल्लाह तआला की शान है कि वह सब कुछ जानता है। उनकी साज़िश का पूरा इल्म रखते हुए अल्लाह ने भी अपनी योजना बनाई — यानी उनकी चाल का ऐसा जवाब दिया जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। अल्लाह ने अपने नबी को उनकी मक्कारी से बचाया और उन्हीं साज़िशकर्ताओं को उनकी साज़िश का शिकार बना दिया। जिस रात वे नबी को ख़त्म करने की योजना बना रहे थे, अल्लाह ने उन्हीं पर अपना अज़ाब नाज़िल कर दिया — और वे इस हालत में थे कि उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उनका अंजाम क्या होने वाला है।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है: इंसान चाहे कितनी भी बारीक और गुप्त साज़िशें रच ले, अल्लाह की योजना से बड़ी कोई योजना नहीं हो सकती। अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त ख़ुद करता है, और ज़ालिमों की चालें उन्हीं के ऊपर उलट जाती हैं। इसलिए हमें कभी किसी के साथ धोखा या बुराई की योजना नहीं बनानी चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ देख रहा है और वही सबसे बेहतर योजना बनाने वाला है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुश्किल से निकालने का रास्ता निकालता है — चाहे दुश्मन कितनी भी ताकतवर क्यों न हो।

यह क़िस्सा हमारे लिए इसलिए भी अहम है कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह की मदद हमेशा सच्चे मोमिनों के साथ होती है। नबी सालिह अकेले थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें बचा लिया और पूरी ज़ालिम क़ौम को तबाह कर दिया। यही वादा हर उस इंसान के साथ है जो अल्लाह की राह पर चलता है और उस पर भरोसा रखता है।



📜 आयत 48-52 — अन-नमल

48وَكَانَ فِي الْمَدِينَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ
और शहर में नौ आदमी थे जो मुल्क के बानीये फसाद थे और इसलाह की फिक्र न करते थे-उन लोगों ने (आपस में) कहा कि बाहम ख़ुदा की क़सम खाते जाओ
49قَالُوا تَقَاسَمُوا بِاللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُ وَأَهْلَهُ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِ مَا شَهِدْنَا مَهْلِكَ أَهْلِهِ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ
कि हम लोग सालेह और उसके लड़के बालो पर शब खून करे उसके बाद उसके वाली वारिस से कह देगें कि हम लोग उनके घर वालों को हलाक़ होते वक्त मौजूद ही न थे और हम लोग तो यक़ीनन सच्चे हैं
50وَمَكَرُوا مَكْرًا وَمَكَرْنَا مَكْرًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और उन लोगों ने एक तदबीर की और हमने भी एक तदबीर की और (हमारी तदबीर की) उनको ख़बर भी न हुई
51فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ مَكْرِهِمْ أَنَّا دَمَّرْنَاهُمْ وَقَوْمَهُمْ أَجْمَعِينَ
तो (ऐ रसूल) तुम देखो उनकी तदबीर का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ कि हमने उनको और सारी क़ौम को हलाक कर डाला
52فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةً بِمَا ظَلَمُوا ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
ये बस उनके घर हैं कि उनकी नाफरमानियों की वज़ह से ख़ाली वीरान पड़े हैं इसमे शक नही कि उस वाक़िये में वाक़िफ कार लोगों के लिए बड़ी इबरत है
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अनुवाद — अन-नमल 50

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Tuesday, August 18, 2026

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