अन-नमल · 49/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
قَالُوا تَقَاسَمُوا بِاللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُ وَأَهْلَهُ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِ مَا شَهِدْنَا مَهْلِكَ أَهْلِهِ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ ۝٤٩
Qaaloo taqaasamoo billaahi lanubaiyitannahoo wa ahlahoo summaa lanaqoolana liwaliy yihee maa shahidnaa mahlika ahliee wa innaa lasaadiqoon
📖 हिंदी अर्थ
कि हम लोग सालेह और उसके लड़के बालो पर शब खून करे उसके बाद उसके वाली वारिस से कह देगें कि हम लोग उनके घर वालों को हलाक़ होते वक्त मौजूद ही न थे और हम लोग तो यक़ीनन सच्चे हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَقَاسَمُوا: आपस में एक-दूसरे से क़समें खाईं।
  • لَنُبَيِّتَنَّهُ: हम रात में अचानक उस पर हमला करके उसे मार डालेंगे।
  • مَهْلِكَ أَهْلِهِ: उसके परिवार/अनुयायियों का विनाश।
  • وَلِيِّهِ: उसके वारिस/ख़ून का बदला लेने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये आयत उन नौ धूर्त लोगों की साज़िश का खुलासा करती है जिन्होंने अल्लाह के नबी सालेह (अलैहिस्सलाम) को रास्ते से हटाने की घिनौनी योजना बनाई थी। उन्होंने आपस में क़समें खाईं कि रात के अंधेरे में वे नबी सालेह और उनके साथी ईमानवालों पर अचानक हमला करेंगे और उन्हें ख़त्म कर देंगे। फिर वे यह भी तय कर चुके थे कि जब कोई पूछेगा कि यह किसने किया, तो वे साफ़ मना कर देंगे और कहेंगे: "हम तो वहाँ मौजूद ही नहीं थे, हमें कुछ पता ही नहीं।" वे झूठी क़समें खाकर अपनी बेगुनाही जताना चाहते थे, ताकि कोई उन पर शक न कर सके।

यह साज़िश उनके दिलों की गहरी बीमारी को दिखाती है — वे सच्चाई के दुश्मन थे और अल्लाह के नबी को ख़त्म करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। उन्होंने सोचा कि रात का अंधेरा उनके काले इरादों को छिपा लेगा, और झूठी क़समें उन्हें बचा लेंगी। लेकिन वे भूल गए कि अल्लाह तआला हर चीज़ का गवाह है, और उसकी नज़रों से कोई चीज़ छिपी नहीं है। उनकी यह चाल उनके लिए और अधिक विनाश का कारण बनी, क्योंकि अल्लाह ने उनकी साज़िश को नाकाम कर दिया और उन्हें उनके किए की सज़ा दी।

इस आयत से हमें सबक मिलता है कि बुराई की योजनाएँ चाहे कितनी भी गुप्त और पुख्ता क्यों न हों, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकतीं। ईमानवालों को चाहिए कि वे हमेशा सच्चाई पर डटे रहें और अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह अपने नबियों और नेक बंदों की मदद करता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि झूठी क़समें और धोखा कभी कामयाब नहीं होते — सच्चाई और सच्चे लोगों की हमेशा जीत होती है। अल्लाह तआला हमें बुराई की साज़िशों से बचाए और हमें सच्चाई पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 47-51 — अन-नमल

47قَالُوا اطَّيَّرْنَا بِكَ وَبِمَن مَّعَكَ ۚ قَالَ طَائِرُكُمْ عِندَ اللَّهِ ۖ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ تُفْتَنُونَ
वह लोग बोले हमने तो तुम से और तुम्हारे साथियों से बुरा शगुन पाया सालेह ने कहा तुम्हारी बदकिस्मती ख़ुदा के पास है (ये सब कुछ नहीं) बल्कि तुम लोगों की आज़माइश की जा रही है
48وَكَانَ فِي الْمَدِينَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ
और शहर में नौ आदमी थे जो मुल्क के बानीये फसाद थे और इसलाह की फिक्र न करते थे-उन लोगों ने (आपस में) कहा कि बाहम ख़ुदा की क़सम खाते जाओ
49قَالُوا تَقَاسَمُوا بِاللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُ وَأَهْلَهُ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِ مَا شَهِدْنَا مَهْلِكَ أَهْلِهِ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ
कि हम लोग सालेह और उसके लड़के बालो पर शब खून करे उसके बाद उसके वाली वारिस से कह देगें कि हम लोग उनके घर वालों को हलाक़ होते वक्त मौजूद ही न थे और हम लोग तो यक़ीनन सच्चे हैं
50وَمَكَرُوا مَكْرًا وَمَكَرْنَا مَكْرًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और उन लोगों ने एक तदबीर की और हमने भी एक तदबीर की और (हमारी तदबीर की) उनको ख़बर भी न हुई
51فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ مَكْرِهِمْ أَنَّا دَمَّرْنَاهُمْ وَقَوْمَهُمْ أَجْمَعِينَ
तो (ऐ रसूल) तुम देखो उनकी तदबीर का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ कि हमने उनको और सारी क़ौम को हलाक कर डाला
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीRevelation
49आयत

अनुवाद — अन-नमल 49

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Tuesday, August 18, 2026

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