अन-नमल · 54/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَتَأْتُونَ الْفَاحِشَةَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ ۝٥٤
Wa lootan iz qaala liqawmiheee ataatoonal faa hishata wa antum qawmun tajjhaloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि क्या तुम देखभाल कर (समझ बूझ कर) ऐसी बेहयाई करते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • लूत: अल्लाह के नबी हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम)।
  • फ़ाहिशा: अत्यंत घृणित और बुरा कार्य, यहाँ अभिप्राय पुरुषों से पुरुषों का संभोग (लिवात) है।
  • तुब्सिरून: तुम देखते हो, अर्थात तुम जानते और समझते हो।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उस समय को याद कीजिए जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: “क्या तुम वह अत्यंत घृणित कार्य करते हो जबकि तुम स्वयं उसकी बुराई को देखते और समझते हो?” यानी तुम जानते-बूझते हुए भी उस कुकर्म को करते हो जो अल्लाह की दृष्टि में सबसे बड़ा पाप है। वह कार्य था पुरुषों का पुरुषों से संभोग करना, जिसे अल्लाह ने सख्त मना किया था। यह कार्य इतना बुरा था कि इससे पहले दुनिया में किसी क़ौम ने ऐसा नहीं किया था।

हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को समझाया कि तुम लोगों के सामने खुलेआम यह शर्मनाक काम करते हो, एक-दूसरे को देखते हुए भी तुम्हें कोई शर्म नहीं आती। तुमने अल्लाह की आज्ञा का उल्लंघन किया और अपने नबी की बात न मानकर उस रास्ते पर चल पड़े जो अल्लाह की नाराज़गी का कारण बना।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने जिन कार्यों को हराम (निषिद्ध) किया है, उनसे दूर रहना चाहिए, चाहे समाज में वह कितना भी आम क्यों न हो। एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) को साफ रखे और अल्लाह द्वारा निर्धारित सीमाओं का पालन करे। अल्लाह ने इंसान के लिए पाक और हलाल रास्ते बनाए हैं, और हर उस काम से रोका है जो उसकी फ़ितरत को बिगाड़े और समाज में बुराई फैलाए।

इस क़िस्से से हमें सबक लेना चाहिए कि जो क़ौमें अल्लाह के नबियों की बात नहीं मानतीं और अपनी बुराइयों पर अड़ी रहती हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी ओर लौटते हैं, तौबा करते हैं और अपने जीवन को उसकी मर्ज़ी के अनुसार ढालते हैं। आइए हम अल्लाह के हुक्मों को अपनाएँ और उसकी नाराज़गी से बचें, क्योंकि अल्लाह की मोहब्बत और रहमत ही हमारी सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 52-56 — सूरा अन-नमल

52فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةً بِمَا ظَلَمُوا ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
ये बस उनके घर हैं कि उनकी नाफरमानियों की वज़ह से ख़ाली वीरान पड़े हैं इसमे शक नही कि उस वाक़िये में वाक़िफ कार लोगों के लिए बड़ी इबरत है
53وَأَنجَيْنَا الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
और हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और परहेज़गार थे बचा लिया
54وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَتَأْتُونَ الْفَاحِشَةَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ
और (ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि क्या तुम देखभाल कर (समझ बूझ कर) ऐसी बेहयाई करते हो
55أَئِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ الرِّجَالَ شَهْوَةً مِّن دُونِ النِّسَاءِ ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ
क्या तुम औरतों को छोड़कर शहवत से मर्दों के आते हो (ये तुम अच्छा नहीं करते) बल्कि तुम लोग बड़ी जाहिल क़ौम हो तो लूत की क़ौम का इसके सिवा कुछ जवाब न था
56۞ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا أَخْرِجُوا آلَ لُوطٍ مِّن قَرْيَتِكُمْ ۖ إِنَّهُمْ أُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ
कि वह लोग बोल उठे कि लूत के खानदान को अपनी बस्ती (सदूम) से निकाल बाहर करो ये लोग बड़े पाक साफ बनना चाहते हैं
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
54आयत

अनुवाद — अन-नमल 54

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Friday, October 2, 2026

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