अन-नमल · 69/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُجْرِمِينَ ۝٦٩
Qul seeroo fil ardi fanzuroo kaifa kaana `aaqibatul mujremeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) लोगों से कह दो कि रुए ज़मीन पर ज़रा चल फिर कर देखो तो गुनाहगारों का अन्जाम क्या हुआ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سِيرُوا – चलो, यात्रा करो
  • فَانظُرُوا – देखो, ग़ौर करो
  • عَاقِبَةُ – अंजाम, परिणाम
  • الْمُجْرِمِينَ – अपराधियों, गुनाहगारों (वे लोग जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और अपने कुकर्मों में डूबे रहे)

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुन्किरों (इन्कार करने वालों) से कह दीजिए कि ज़मीन पर चलो-फिरो और देखो कि उन लोगों का क्या अंजाम हुआ जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और अपनी सरकशी और ज़ुल्म में हद से गुज़र गए। उन्होंने हक़ को नकारा, नबियों का मज़ाक उड़ाया और अपनी ग़लतियों पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उन्हें पकड़ लिया। उनकी शानदार इमारतें खंडहर बन गईं, उनकी ताक़त और तरक्की उनके काम न आई, और वे ऐसे तबाह हुए कि उनका नामो-निशान तक मिट गया।

यह सिर्फ़ एक कहानी नहीं है, बल्कि एक सबक़ और नसीहत है। अल्लाह तआला ने यह आदेश इसलिए दिया कि इंसान इतिहास से सीख ले। जो लोग आज अपनी ताक़त और दौलत पर इतरा रहे हैं, उन्हें देख लेना चाहिए कि इससे पहले कितने ही ज़ालिम और मुजरिम इसी ज़मीन पर गुज़र चुके हैं। उनके पास बड़ी फ़ौजें थीं, बड़े ख़ज़ाने थे, लेकिन जब अल्लाह का अज़ाब आया तो न उनकी ताक़त काम आई और न उनकी तदबीर।

यह आयत हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक दावत भी। चेतावनी इसलिए कि अगर हम भी उन्हीं की राह पर चलें, हक़ को नकारें और ज़ुल्म करें, तो हमारा अंजाम भी उन्हीं जैसा होगा। और दावत इसलिए कि अल्लाह हमें यह मौक़ा दे रहा है कि हम दूसरों के हालात देखकर अपनी ग़लतियों से बाज़ आएँ, तौबा करें और सीधी राह पर चलें। अल्लाह बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है, वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ लौट आएँ। इसलिए हमें चाहिए कि हम उन लोगों के अंजाम से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 67-71 — अन-नमल

67وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا وَآبَاؤُنَا أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ
और कुफ्फार कहने लगे कि क्या जब हम और हमारे बाप दादा (सड़ गल कर) मिट्टी हो जाएँगें तो क्या हम फिर निकाले जाएँगें
68لَقَدْ وُعِدْنَا هَٰذَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
उसका तो पहले भी हम से और हमारे बाप दादाओं से वायदा किया गया था (कहाँ का उठना और कैसी क़यामत) ये तो हो न हो अगले लोगों के ढकोसले हैं
69قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُجْرِمِينَ
(ऐ रसूल) लोगों से कह दो कि रुए ज़मीन पर ज़रा चल फिर कर देखो तो गुनाहगारों का अन्जाम क्या हुआ
70وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُن فِي ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनके हाल पर कुछ अफ़सोस न करो और जो चालें ये लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) चल रहे हैं उससे तंग दिल न हो
71وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और ये (कुफ्फ़ार मुसलमानों से) पूछते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आख़िर) ये (क़यामत या अज़ाब का) वायदा कब पूरा होगा
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अनुवाद — अन-नमल 69

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Tuesday, August 18, 2026

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