अन-नमल · 68/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
لَقَدْ وُعِدْنَا هَٰذَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ ۝٦٨
Laqad wu`idnaa haazaa nahnu wa aabaaa`unaa min qablu in haazaaa illaaa asaateerul awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
उसका तो पहले भी हम से और हमारे बाप दादाओं से वायदा किया गया था (कहाँ का उठना और कैसी क़यामत) ये तो हो न हो अगले लोगों के ढकोसले हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَسَاطِيرُ: किस्से-कहानियाँ, मनगढ़ंत बातें, पुरानी कहानियाँ जिनमें कोई सच्चाई न हो।
  • الأَوَّلِينَ: पिछले लोग, पुरानी उम्मतें।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों की बात बयान कर रही है जो क़ियामत और दोबारा जीवित होकर उठाए जाने (हश्र) का मज़ाक उड़ाते थे। वे कहते थे: "हमें और हमारे बाप-दादाओं को यह वादा पहले भी किया जाता रहा — कि हम मरने के बाद दोबारा उठाए जाएँगे और हमें हमारे कर्मों का हिसाब देना होगा — लेकिन हमने कभी इसका कोई नतीजा नहीं देखा। यह तो बस पुराने लोगों की कहानियाँ हैं जो उन्होंने लिख दीं और हमें सुनाई जाती हैं।"

यह कहना उनकी ज़िद और इनकार की अंतिम मंज़िल थी। उन्होंने सच्चाई को नकारने के लिए हर तर्क को ठुकरा दिया और इसे महज़ "अफ़साने" कहकर टाल दिया। लेकिन अफ़सोस! उन्होंने यह नहीं सोचा कि जिस ज़ात ने पहली बार उन्हें पैदा किया, वही ज़ात उन्हें दोबारा भी ज़िंदा कर सकती है। क्या वह शक्ति जो किसी चीज़ को अस्तित्व में ला सकती है, उसे दोबारा बनाने से आजिज़ हो सकती है?

यह आयत हमें सिखाती है कि इनकार करने वाले हर ज़माने में एक ही तरह की बातें करते हैं। वे सच्चाई को "पुरानी कहानियाँ" कहकर खारिज कर देते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि क़ुरआन और अल्लाह के वादे सच्चे हैं। क़ियामत का दिन ज़रूर आएगा, और उस दिन हर कोई देख लेगा कि अल्लाह का वादा कितना सच्चा था।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें उन काफ़िरों की तरह नहीं बनना चाहिए जो सच्चाई को सुनकर भी उसे नकार देते हैं। बल्कि हमें अल्लाह के वादों पर पक्का यक़ीन रखना चाहिए। क़ियामत का दिन आना निश्चित है, और उस दिन हर अच्छे और बुरे कर्म का बदला मिलेगा। यही हमारी सफलता की कुंजी है — कि हम अल्लाह के वादे पर भरोसा करें और उसके हुक्मों पर अमल करें। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह के वादे को झुठलाते हैं, वे आख़िरत में पछताएँगे, लेकिन पछताने का वह समय उनके किसी काम नहीं आएगा। अल्लाह हमें सच्ची समझ और सच्चे यक़ीन की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 66-70 — सूरा अन-नमल

66بَلِ ادَّارَكَ عِلْمُهُمْ فِي الْآخِرَةِ ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّنْهَا ۖ بَلْ هُم مِّنْهَا عَمُونَ
बल्कि (असल ये है कि) आख़िरत के बारे में उनके इल्म का ख़ात्मा हो गया है बल्कि उसकी तरफ से शक में पड़ें हैं बल्कि (सच ये है कि) इससे ये लोग अंधे बने हुए हैं
67وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا وَآبَاؤُنَا أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ
और कुफ्फार कहने लगे कि क्या जब हम और हमारे बाप दादा (सड़ गल कर) मिट्टी हो जाएँगें तो क्या हम फिर निकाले जाएँगें
68لَقَدْ وُعِدْنَا هَٰذَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
उसका तो पहले भी हम से और हमारे बाप दादाओं से वायदा किया गया था (कहाँ का उठना और कैसी क़यामत) ये तो हो न हो अगले लोगों के ढकोसले हैं
69قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُجْرِمِينَ
(ऐ रसूल) लोगों से कह दो कि रुए ज़मीन पर ज़रा चल फिर कर देखो तो गुनाहगारों का अन्जाम क्या हुआ
70وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُن فِي ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनके हाल पर कुछ अफ़सोस न करो और जो चालें ये लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) चल रहे हैं उससे तंग दिल न हो
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
68आयत

अनुवाद — अन-नमल 68

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Thursday, October 1, 2026

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