अन-नमल · 70/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُن فِي ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُونَ ۝٧٠
Wa laa tahzan `alaihim wa laa takun fee daiqim mimmaa yamkuroon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम उनके हाल पर कुछ अफ़सोस न करो और जो चालें ये लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) चल रहे हैं उससे तंग दिल न हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا تَحْزَنْ – उदास मत हो, शोक मत करो
  • ضَيْقٍ – तंगी, संकीर्णता, मन की तकलीफ
  • يَمْكُرُونَ – वे चालें चलते हैं, साजिश करते हैं

तफसीर:

ऐ नबी! इन मुशरिकों की ओर से आपको जो उदासी और चिंता होती है—जब वे आपकी दावत को झुठलाते हैं, आपकी बात नहीं मानते, और आपके विरुद्ध बुरी योजनाएँ बनाते हैं—तो उसके लिए आप दुखी न हों। यह आपके लिए कोई नई बात नहीं है, बल्कि हर नबी के साथ ऐसा हुआ है। आपका काम केवल पहुँचाना है, हिदायत देना आपके हाथ में नहीं।

और जब ये लोग आपके खिलाफ चालें चलते हैं, आपको नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते हैं, तो आपका दिल तंग न हो, आप घबराएँ नहीं। क्योंकि अल्लाह तआला आपकी हिफाज़त करने वाला है, वह आपको इनकी बुराइयों से बचाएगा और आपको इन पर ग़लबा देगा। ये चालें और साजिशें आखिरकार उन्हीं के खिलाफ जाएँगी, और अल्लाह की मदद आपके साथ है।

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी तसल्ली है जो अल्लाह के दीन की खिदमत करता है। जब कोई सच्चाई पर हो और उसे मुखालिफत का सामना करना पड़े, तो उसे यकीन रखना चाहिए कि अल्लाह उसके साथ है। निराशा और घबराहट शैतान के हथियार हैं, मोमिन का हथियार सब्र और भरोसा है। जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए हर मुश्किल से निकलने का रास्ता बनाता है और उसे उन लोगों पर कामयाबी देता है जो उसके खिलाफ साजिशें रचते हैं।

याद रखिए, अल्लाह की मदद का वादा सच्चा है। आप सिर्फ अपना काम करते जाइए, सच्चाई पर डटे रहिए, और बुराई करने वालों की चालों से बेपरवाह रहिए। क्योंकि अल्लाह की नज़र में आपकी कोशिशें कभी राईगाँ नहीं जातीं, और वह आपको वह इज़्ज़त और कामयाबी देगा जो दुनिया की कोई ताकत आपसे छीन नहीं सकती।



📜 आयत 68-72 — अन-नमल

68لَقَدْ وُعِدْنَا هَٰذَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
उसका तो पहले भी हम से और हमारे बाप दादाओं से वायदा किया गया था (कहाँ का उठना और कैसी क़यामत) ये तो हो न हो अगले लोगों के ढकोसले हैं
69قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُجْرِمِينَ
(ऐ रसूल) लोगों से कह दो कि रुए ज़मीन पर ज़रा चल फिर कर देखो तो गुनाहगारों का अन्जाम क्या हुआ
70وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُن فِي ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनके हाल पर कुछ अफ़सोस न करो और जो चालें ये लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) चल रहे हैं उससे तंग दिल न हो
71وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और ये (कुफ्फ़ार मुसलमानों से) पूछते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आख़िर) ये (क़यामत या अज़ाब का) वायदा कब पूरा होगा
72قُلْ عَسَىٰ أَن يَكُونَ رَدِفَ لَكُم بَعْضُ الَّذِي تَسْتَعْجِلُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम लोग जल्दी मचा रहे हो क्या अजब है इसमे से कुछ करीब आ गया हो
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मक्कीRevelation
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अनुवाद — अन-नमल 70

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Tuesday, August 18, 2026

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