अल-क़सस · 85/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
إِنَّ الَّذِي فَرَضَ عَلَيْكَ الْقُرْآنَ لَرَادُّكَ إِلَىٰ مَعَادٍ ۚ قُل رَّبِّي أَعْلَمُ مَن جَاءَ بِالْهُدَىٰ وَمَنْ هُوَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ ۝٨٥
Innal azee farada `alaikal Qur-aana laraaadduka ilaa ma`aad; qur Rabbeee a`lamu man jjaaa`a bil hudaa wa man huwa fee dalaalim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ख़ुदा जिसने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया ज़रुर ठिकाने तक पहुँचा देगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि कौन राह पर आया और कौन सरीही गुमराही में पड़ा रहा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَرَضَ عَلَيْكَ الْقُرْآنَ: अर्थात् तुम पर क़ुरआन को अनिवार्य किया, उसे पढ़ना, उसका पालन करना और उसे लोगों तक पहुँचाना।
  • لَرَادُّكَ: अवश्य तुम्हें वापस लौटाने वाला है।
  • مَعَادٍ: वापसी का स्थान, यहाँ अर्थ है मक्का।
  • ضَلَالٍ مُّبِينٍ: स्पष्ट और खुली गुमराही।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जिस अल्लाह ने तुम पर क़ुरआन उतारा और उसे तुम्हारे लिए अनिवार्य बनाया कि तुम उसे पढ़ो, उस पर अमल करो और उसे लोगों तक पहुँचाओ, वही अल्लाह तुम्हें अवश्य तुम्हारे उस स्थान की ओर वापस लौटाएगा जहाँ से तुम निकले थे, अर्थात् मक्का। यह अल्लाह की ओर से नबी ﷺ को एक सुंदर शुभ सूचना थी, जब वे मक्का से हिजरत करके मदीना पहुँचे थे और उनका दिल अपने वतन की याद में धड़क रहा था। अल्लाह ने उन्हें यक़ीन दिलाया कि यह जुदाई हमेशा नहीं रहेगी, बल्कि वे फिर मक्का लौटेंगे, और ऐसा ही हुआ — अल्लाह ने उन्हें फ़तह के साथ मक्का वापस लौटाया।

फिर अल्लाह अपने नबी ﷺ को निर्देश देता है कि वे मक्का के मुशरिकों से कहें: "मेरा रब खूब जानता है कि कौन सच्चे मार्गदर्शन (हिदायत) के साथ आया है और कौन खुली गुमराही में पड़ा हुआ है।" यानी अल्लाह हर एक के हाल को भली-भाँति जानता है, और वही प्रत्येक को उसके कर्मों के अनुसार बदला देगा। यह एक चेतावनी भी है और एक तसल्ली भी — चेतावनी उनके लिए जो सत्य को ठुकरा रहे हैं, और तसल्ली नबी ﷺ और उनके साथियों के लिए कि अल्लाह उनके सत्य को खूब जानता है और उन्हें विजय प्रदान करेगा।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो अल्लाह के दीन पर चलता है और उसकी राह में कष्ट उठाता है। अल्लाह कभी अपने नेक बंदों को अकेला नहीं छोड़ता। जिस तरह उसने अपने नबी ﷺ को वतन से निकाले जाने के बाद फिर वतन लौटाया और उन्हें फ़तह अता की, उसी तरह वह हर सच्चे मोमिन की मदद करता है, चाहे हालात कितने ही कठिन क्यों न हों। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही जानता है कि सच्चाई किसके साथ है। हमें चाहिए कि हम सब्र करें, अल्लाह पर तवक्कुल रखें और यक़ीन रखें कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी — चाहे वह किसी भी रूप में हो। यही वह यक़ीन है जो मोमिन के दिल को मज़बूती देता है और उसे हर मुश्किल का सामना करने की ताक़त प्रदान करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 83-87 — अल-क़सस

83تِلْكَ الدَّارُ الْآخِرَةُ نَجْعَلُهَا لِلَّذِينَ لَا يُرِيدُونَ عُلُوًّا فِي الْأَرْضِ وَلَا فَسَادًا ۚ وَالْعَاقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَ
ये आख़िरत का घर तो हम उन्हीं लोगों के लिए ख़ास कर देगें जो रुए ज़मीन पर न सरकशी करना चाहते हैं और न फसाद-और (सच भी यूँ ही है कि) फिर अन्जाम तो परहेज़गारों ही का है
84مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ خَيْرٌ مِّنْهَا ۖ وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزَى الَّذِينَ عَمِلُوا السَّيِّئَاتِ إِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
जो शख्स नेकी करेगा तो उसके लिए उसे कहीं बेहतर बदला है औ जो बुरे काम करेगा तो वह याद रखे कि जिन लोगों ने बुराइयाँ की हैं उनका वही बदला हे जो दुनिया में करते रहे हैं
85إِنَّ الَّذِي فَرَضَ عَلَيْكَ الْقُرْآنَ لَرَادُّكَ إِلَىٰ مَعَادٍ ۚ قُل رَّبِّي أَعْلَمُ مَن جَاءَ بِالْهُدَىٰ وَمَنْ هُوَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(ऐ रसूल) ख़ुदा जिसने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया ज़रुर ठिकाने तक पहुँचा देगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि कौन राह पर आया और कौन सरीही गुमराही में पड़ा रहा
86وَمَا كُنتَ تَرْجُو أَن يُلْقَىٰ إِلَيْكَ الْكِتَابُ إِلَّا رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۖ فَلَا تَكُونَنَّ ظَهِيرًا لِّلْكَافِرِينَ
इससे मेरा परवरदिगार ख़ूब वाक़िफ है और तुमको तो ये उम्मीद न थी कि तुम्हारे पास ख़ुदा की तरफ से किताब नाज़िल की जाएगी मगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी से नाज़िल हुई तो तुम हरग़िज़ काफिरों के पुश्त पनाह न बनना
87وَلَا يَصُدُّنَّكَ عَنْ آيَاتِ اللَّهِ بَعْدَ إِذْ أُنزِلَتْ إِلَيْكَ ۖ وَادْعُ إِلَىٰ رَبِّكَ ۖ وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
कहीं ऐसा न हो एहकामे ख़ुदा वन्दी नाज़िल होने के बाद तुमको ये लोग उनकी तबलीग़ से रोक दें और तुम अपने परवरदिगार की तरफ (लोगों को) बुलाते जाओ और ख़बरदार मुशरेकीन से हरगिज़ न होना
अल-क़ससकुरान सूची
88आयत
मक्कीRevelation
85आयत

अनुवाद — अल-क़सस 85

सूरा अल-क़सस आयत 85 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) ख़ुदा जिसने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया ज़रुर…

सूरा आयत 85/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 83–87. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए