अल-अंकबूत · 21/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
يُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ وَيَرْحَمُ مَن يَشَاءُ ۖ وَإِلَيْهِ تُقْلَبُونَ ۝٢١
Yu`azzibu many yashaaa`u wa yarhamu many yashaaa`; wa ilaihi tuqlaboon
📖 हिंदी अर्थ
जिस पर चाहे अज़ाब करे और जिस पर चाहे रहम करे और तुम लोग (सब के सब) उसी की तरफ लौटाए जाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُعَذِّبُ – अज़ाब देता है, दंड देता है।
  • مَن يَشَاءُ – जिसे चाहता है।
  • يَرْحَمُ – रहमत (दया) करता है।
  • تُقْلَبُونَ – तुम पलटाए जाओगे, लौटाए जाओगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी बेपनाह हिकमत और अदालत के मुताबिक जिसे चाहता है अज़ाब देता है, और यह अज़ाब उसके इंसाफ़ का नतीजा है, जो उन लोगों को मिलता है जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में गुनाह और सरकशी की राह अपनाई और तौबा नहीं की। और जिसे चाहता है उस पर रहमत फरमाता है, और यह रहमत उसके फज़ल (कृपा) का नतीजा है, जो उन लोगों को मिलती है जो तौबा करके ईमान लाए और नेक अमल करते रहे। अल्लाह की मशीयत (इच्छा) पर कोई पर्दा नहीं डाल सकता, न कोई उसके फैसले को टाल सकता है। वह जो चाहता है, अपनी हिकमत के मुताबिक करता है, और उसकी रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसी (व्यापक) है।

फिर अल्लाह तआला फरमाता है: "और उसी की तरफ तुम पलटाए जाओगे।" यानी क़यामत के दिन तुम सबको अपनी क़ब्रों से ज़िंदा होकर उठाया जाएगा और तुम अल्लाह की बारगाह में हाज़िर किए जाओगे। वहाँ वह तुम्हारे साथ पूरा इंसाफ़ करेगा — जिसने नेकी की उसे नेकी का बदला मिलेगा और जिसने बुराई की उसे बुराई का अंजाम भुगतना पड़ेगा। यह लौटना सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ है, किसी और की तरफ नहीं, क्योंकि वही सबका मालिक और हाकिम है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें दो बड़ी हक़ीक़तों की याद दिलाती है — पहली यह कि अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है, इसलिए हमें अपने गुनाहों से बाज़ आना चाहिए और उसकी नाराज़गी से डरना चाहिए। दूसरी यह कि अल्लाह की रहमत बहुत वसी है, और वह अपने बंदों पर रहम करना पसंद करता है। जो बंदा अपने गुनाहों पर शर्मिंदा होकर अल्लाह की तरफ रुजू करता है, अल्लाह उसे अपनी रहमत से नवाज़ता है। यह आयत हमें बताती है कि हमारी किस्मत हमारे हाथ में है — अगर हम नेकी करेंगे तो रहमत के हक़दार बनेंगे, और अगर गुनाह करते रहे तो अज़ाब के। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को संवार लें, अल्लाह की रहमत के साये में आने की कोशिश करें, क्योंकि कल का पलटना तय है और वहाँ किसी को मोहलत नहीं मिलेगी। अल्लाह तआला हम सबको अपनी रहमत से नवाज़े और हमें अज़ाब से महफूज़ रखे। आमीन।



📜 आयत 19-23 — अल-अंकबूत

19أَوَلَمْ يَرَوْا كَيْفَ يُبْدِئُ اللَّهُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
बस क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा किस तरह मख़लूकात को पहले पहल पैदा करता है और फिर उसको दोबारा पैदा करेगा ये तो ख़ुदा के नज़दीक बहुत आसान बात है
20قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ بَدَأَ الْخَلْقَ ۚ ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشْأَةَ الْآخِرَةَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(ऐ रसूल इन लोगों से) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चलफिर कर देखो तो कि ख़ुदा ने किस तरह पहले पहल मख़लूक को पैदा किया फिर (उसी तरह वही) ख़ुदा (क़यामत के दिन) आखिरी पैदाइश पैदा करेगा- बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
21يُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ وَيَرْحَمُ مَن يَشَاءُ ۖ وَإِلَيْهِ تُقْلَبُونَ
जिस पर चाहे अज़ाब करे और जिस पर चाहे रहम करे और तुम लोग (सब के सब) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
22وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ ۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और न तो तुम ज़मीन ही में ख़ुदा को ज़ेर कर सकते हो और न आसमान में और ख़ुदा के सिवा न तो तुम्हारा कोई सरपरस्त है और न मददगार
23وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَلِقَائِهِ أُولَٰئِكَ يَئِسُوا مِن رَّحْمَتِي وَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया मेरी रहमत से मायूस हो गए हैं और उन्हीं लोगों के वास्ते दर्दनाक अज़ाब है
अल-अंकबूतकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अंकबूत 21

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Tuesday, August 18, 2026

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