अनुवाद — Tafsir
(قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ) अर्थात, ऐ नबी! इनकार करने वालों से कहिए: धरती में चलो-फिरो और (فَانظُرُوا) अपनी आँखों से देखो (كَيْفَ بَدَأَ الْخَلْقَ) कि अल्लाह ने पहली बार सृष्टि की शुरुआत कैसे की, बिना किसी पूर्व नमूने के, बिना किसी सहायक के। यह देखना और सोचना ही उनके लिए सबसे बड़ा सबक है। (ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشْأَةَ الْآخِرَةَ) फिर वही अल्लाह दूसरी बार सृष्टि को पैदा करेगा, यानी क़ब्रों से उठाकर हिसाब-किताब के लिए ज़िंदा करेगा। जिस प्रकार उसने पहली बार पैदा किया, उसी प्रकार दूसरी बार पैदा करना उसके लिए बिल्कुल आसान है। (إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ) बेशक अल्लाह हर चीज़ पर पूरी ताकत रखता है, उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। जो चाहता है, बस 'हो जा' कहता है, और वह हो जाता है।
अब इस आयत का विस्तृत अर्थ समझिए: अल्लाह तआला ने इस आयत में उन लोगों को जवाब दिया है जो मौत के बाद दोबारा जी उठने को असंभव समझते थे। अल्लाह उनसे कहता है कि ज़रा धरती में चलो और देखो कि यह विशाल ब्रह्मांड, ये पहाड़, ये समुद्र, ये पेड़-पौधे, ये जानवर और इंसान — ये सब कैसे पैदा हुए? किसने इन्हें बनाया? क्या कोई इंसान इन्हें बना सकता था? बिल्कुल नहीं। यह सब देखकर अगर वे ज़रा भी दिमाग़ से काम लें, तो उन्हें यक़ीन हो जाएगा कि जिस शक्ति ने पहली बार इतनी बड़ी और अद्भुत सृष्टि बनाई, वही शक्ति दोबारा उठाने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। जब पहली बार बनाना उसके लिए मुश्किल नहीं था, तो दोबारा बनाना क्यों मुश्किल होगा? यह तो और भी आसान है, क्योंकि एक बार बनाने के बाद उसका नमूना मौजूद है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने आस-पास की दुनिया को ग़ौर से देखना चाहिए। हर पत्ते का हिलना, हर साँस का आना-जाना, हर नए जन्म का होना — यह सब अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ हैं। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह की अज़मत को दिल से महसूस करता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत है। जिस अल्लाह ने हमें पहली बार पैदा किया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करेगा और हमारे सारे अच्छे-बुरे कामों का हिसाब लेगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि उस दिन हम कामयाब हों। यह आयत हमारे दिलों में अल्लाह की क़ुदरत का निहायत ही खूबसूरत नक़्श छोड़ती है और हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है — कोई चीज़ उससे छिपी नहीं, कोई काम उसके लिए मुश्किल नहीं।
📜 आयत 18-22 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 20
सूरा अल-अंकबूत आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल इन लोगों से) तुम कह दो कि ज़रा…सूरा आयत 20/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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