अल-अंकबूत · 20/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ بَدَأَ الْخَلْقَ ۚ ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشْأَةَ الْآخِرَةَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝٢٠
Qul seeroo fil ardi fanzuroo kaifa baa al khalqa summal laahu yunshi``un nash atal Aakhirah; innal laaha `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल इन लोगों से) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चलफिर कर देखो तो कि ख़ुदा ने किस तरह पहले पहल मख़लूक को पैदा किया फिर (उसी तरह वही) ख़ुदा (क़यामत के दिन) आखिरी पैदाइश पैदा करेगा- बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है

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अनुवाद — Tafsir

(قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ) अर्थात, ऐ नबी! इनकार करने वालों से कहिए: धरती में चलो-फिरो और (فَانظُرُوا) अपनी आँखों से देखो (كَيْفَ بَدَأَ الْخَلْقَ) कि अल्लाह ने पहली बार सृष्टि की शुरुआत कैसे की, बिना किसी पूर्व नमूने के, बिना किसी सहायक के। यह देखना और सोचना ही उनके लिए सबसे बड़ा सबक है। (ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشْأَةَ الْآخِرَةَ) फिर वही अल्लाह दूसरी बार सृष्टि को पैदा करेगा, यानी क़ब्रों से उठाकर हिसाब-किताब के लिए ज़िंदा करेगा। जिस प्रकार उसने पहली बार पैदा किया, उसी प्रकार दूसरी बार पैदा करना उसके लिए बिल्कुल आसान है। (إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ) बेशक अल्लाह हर चीज़ पर पूरी ताकत रखता है, उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। जो चाहता है, बस 'हो जा' कहता है, और वह हो जाता है।

अब इस आयत का विस्तृत अर्थ समझिए: अल्लाह तआला ने इस आयत में उन लोगों को जवाब दिया है जो मौत के बाद दोबारा जी उठने को असंभव समझते थे। अल्लाह उनसे कहता है कि ज़रा धरती में चलो और देखो कि यह विशाल ब्रह्मांड, ये पहाड़, ये समुद्र, ये पेड़-पौधे, ये जानवर और इंसान — ये सब कैसे पैदा हुए? किसने इन्हें बनाया? क्या कोई इंसान इन्हें बना सकता था? बिल्कुल नहीं। यह सब देखकर अगर वे ज़रा भी दिमाग़ से काम लें, तो उन्हें यक़ीन हो जाएगा कि जिस शक्ति ने पहली बार इतनी बड़ी और अद्भुत सृष्टि बनाई, वही शक्ति दोबारा उठाने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। जब पहली बार बनाना उसके लिए मुश्किल नहीं था, तो दोबारा बनाना क्यों मुश्किल होगा? यह तो और भी आसान है, क्योंकि एक बार बनाने के बाद उसका नमूना मौजूद है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने आस-पास की दुनिया को ग़ौर से देखना चाहिए। हर पत्ते का हिलना, हर साँस का आना-जाना, हर नए जन्म का होना — यह सब अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ हैं। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह की अज़मत को दिल से महसूस करता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत है। जिस अल्लाह ने हमें पहली बार पैदा किया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करेगा और हमारे सारे अच्छे-बुरे कामों का हिसाब लेगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि उस दिन हम कामयाब हों। यह आयत हमारे दिलों में अल्लाह की क़ुदरत का निहायत ही खूबसूरत नक़्श छोड़ती है और हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है — कोई चीज़ उससे छिपी नहीं, कोई काम उसके लिए मुश्किल नहीं।



📜 आयत 18-22 — अल-अंकबूत

18وَإِن تُكَذِّبُوا فَقَدْ كَذَّبَ أُمَمٌ مِّن قَبْلِكُمْ ۖ وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
और (ऐ अहले मक्का) अगर तुमने (मेरे रसूल को) झुठलाया तो (कुछ परवाह नहीं) तुमसे पहले भी तो बहुतेरी उम्मते (अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं और रसूल के ज़िम्मे तो सिर्फ (एहक़ाम का) पहुँचा देना है
19أَوَلَمْ يَرَوْا كَيْفَ يُبْدِئُ اللَّهُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
बस क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा किस तरह मख़लूकात को पहले पहल पैदा करता है और फिर उसको दोबारा पैदा करेगा ये तो ख़ुदा के नज़दीक बहुत आसान बात है
20قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ بَدَأَ الْخَلْقَ ۚ ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشْأَةَ الْآخِرَةَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(ऐ रसूल इन लोगों से) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चलफिर कर देखो तो कि ख़ुदा ने किस तरह पहले पहल मख़लूक को पैदा किया फिर (उसी तरह वही) ख़ुदा (क़यामत के दिन) आखिरी पैदाइश पैदा करेगा- बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
21يُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ وَيَرْحَمُ مَن يَشَاءُ ۖ وَإِلَيْهِ تُقْلَبُونَ
जिस पर चाहे अज़ाब करे और जिस पर चाहे रहम करे और तुम लोग (सब के सब) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
22وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ ۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और न तो तुम ज़मीन ही में ख़ुदा को ज़ेर कर सकते हो और न आसमान में और ख़ुदा के सिवा न तो तुम्हारा कोई सरपरस्त है और न मददगार
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अनुवाद — अल-अंकबूत 20

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Tuesday, August 18, 2026

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