अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- دَابَّةٍ (दाब्बह): धरती पर चलने वाला हर जीव-जंतु।
- لَا تَحْمِلُ رِزْقَهَا (ला तहमिलु रिज़्क़हा): अपनी रोज़ी को उठा नहीं सकती, यानी अपने भोजन को जमा करके रखने या ले जाने की ताकत नहीं रखती।
- وَإِيَّاكُمْ (व इय्याकुम): और तुम्हें भी (रोज़ी देता है)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को एक बहुत बड़ा सबक़ सिखा रहा है। वह फ़रमाता है कि धरती पर कितने ही ऐसे जीव-जंतु हैं जो अपनी रोज़ी का इंतज़ाम ख़ुद नहीं कर सकते। न वे अपने लिए खाना जमा कर सकते हैं, न उसे ढो सकते हैं, न किसी गोदाम में रख सकते हैं। फिर भी अल्लाह तआला उन्हें रोज़ी पहुँचाता है — चाहे वे जंगलों में हों, पहाड़ों की दरारों में, समुद्र की गहराइयों में या रेगिस्तान की तपती रेत पर। वे कमज़ोर और लाचार हैं, लेकिन अल्लाह की रहमत उन तक पहुँचती है।
यह आयत उस समय नाज़िल हुई जब कुछ मुसलमान मक्का से मदीना हिजरत (प्रवास) करने में झिझक रहे थे, क्योंकि उन्हें डर था कि वहाँ जाकर उन्हें रोज़ी कैसे मिलेगी, उनका धंधा-रोज़गार क्या होगा। अल्लाह ने उन्हें समझाया कि जिस अल्लाह ने तुम्हें मक्का में रोज़ी दी, वही मदीना में भी देगा। जो ख़ुदा पक्षियों, कीड़ों और छोटे जानवरों को रोज़ी देता है, क्या वह अपने ईमानवाले बंदों को भूल जाएगा? हरगिज़ नहीं!
अल्लाह तआला फ़रमाता है: "वह सुनने वाला है, जानने वाला है।" यानी वह तुम्हारी उन बातों को सुनता है जो तुम कहते हो कि "हमें डर है कि हिजरत के बाद भूखे मर जाएँगे", और वह तुम्हारे दिलों के राज़ और नीयतों को भी जानता है। वह जानता है कि तुम्हारा डर सच्चा है या बहाना। वह तुम्हारे अच्छे कर्मों और बुरे कर्मों से बेख़बर नहीं है, और हर एक को उसके कर्मों का बदला देगा।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि रोज़ी देने वाला सिर्फ़ अल्लाह है। हम चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, जो हमारे नसीब में लिखा है, वही मिलेगा। और जो हमारे नसीब में नहीं, वह हमें कभी नहीं मिल सकता। इसलिए अल्लाह की राह में क़दम बढ़ाते समय रोज़ी का डर हमें रोकना नहीं चाहिए। जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें ऐसी जगह से रोज़ी देता है जिसका हमें ख़याल भी नहीं होता। यही तो अल्लाह का वादा है — और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता। आइए, हम अपने दिलों से रोज़ी का डर निकालें और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें। वह सब कुछ सुनता और जानता है, और वह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
📜 आयत 58-62 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 60
सूरा अल-अंकबूत आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ज़मीन पर चलने वालों में बहुतेरे ऐसे हैं जो…सूरा आयत 60/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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