अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- هَا أَنتُمْ أُولَاءِ: देखो! तुम ही वे लोग हो।
- تُحِبُّونَهُمْ: तुम उनसे प्रेम करते हो।
- عَضُّوا عَلَيْكُمُ الْأَنَامِلَ: वे तुम्हारे कारण गुस्से से अपनी उंगलियाँ चबाते हैं।
- الْغَيْظِ: अत्यधिक क्रोध।
- بِذَاتِ الصُّدُورِ: जो कुछ दिलों में छिपा है।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! देखो, यही तो तुम्हारी भूल है कि तुम उन लोगों (यहूदियों) से प्रेम करते हो और उनके साथ भलाई का व्यवहार करते हो, जबकि वे तुमसे प्रेम नहीं करते। उनके दिल तुम्हारे प्रति दुश्मनी और नफरत से भरे हुए हैं। तुम सभी आसमानी किताबों पर ईमान रखते हो, जिनमें उनकी किताब (तौरात) भी शामिल है, लेकिन वे तुम्हारी किताब (कुरआन) पर ईमान नहीं रखते। फिर ऐसे लोगों से प्रेम करना कैसी समझदारी है?
जब वे तुमसे मिलते हैं, तो दिखावे के लिए कहते हैं: "हम ईमान लाए", लेकिन जब वे अकेले में आपस में मिलते हैं, तो तुम्हारे खिलाफ अपनी उंगलियाँ चबाते हैं। यह उनके अत्यधिक क्रोध और जलन की निशानी है, क्योंकि वे देखते हैं कि मुसलमान आपस में एकजुट हैं, उनकी शान बुलंद है और इस्लाम को ताकत मिल रही है, जबकि वे खुद ज़िल्लत और रुसवाई में हैं।
ऐ नबी! आप उनसे कह दीजिए: "तुम अपने इसी गुस्से और जलन के साथ मर जाओ!" यानी तुम्हारा यह क्रोध तुम्हें कोई फायदा नहीं पहुँचाएगा, बल्कि यही तुम्हारी हालत में मौत आएगी। निश्चय ही अल्लाह उन सब बातों को जानता है जो दिलों में छिपी हैं—चाहे वह ईमान हो या कुफ्र, नेकी हो या बुराई—और वह हर किसी को उसके किए का पूरा बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत मोमिनों को सिखाती है कि प्रेम और दोस्ती की बुनियाद ईमान और अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए, न कि सिर्फ रिश्तेदारी या दुनियावी मुआमलात। अल्लाह तआला हमें सच्चे और खरे लोगों की पहचान करना सिखाता है, और यह भी बताता है कि दुश्मनों की चालाकी और नफरत से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपने ईमान और एकता पर भरोसा रखना चाहिए। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह हर दिल का हाल जानता है, इसलिए हमें अपने दिलों को साफ रखना चाहिए और सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए प्रेम और दुश्मनी रखनी चाहिए। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आखिरत में कामयाबी देगा, चाहे दुश्मन कितना भी गुस्से से पागल क्यों न हों।
📜 आयत 117-121 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 119
सूरा आल-इमरान आयत 119 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ लोगों तुम ऐसे (सीधे) हो कि तुम उनसे उलफ़त…सूरा आयत 119/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 117–121. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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