आल-इमरान · 138/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
هَٰذَا بَيَانٌ لِّلنَّاسِ وَهُدًى وَمَوْعِظَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ ۝١٣٨
Haazaa bayaanul linnaasi wa hudanw wa maw`izatul lilmuttaqeen
📖 हिंदी अर्थ
ये (जो हमने कहा) आम लोगों के लिए तो सिर्फ़ बयान (वाक़या) है मगर और परहेज़गारों के लिए हिदायत व नसीहत है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • बयान: स्पष्टीकरण, खुलासा, व्याख्या
  • हुदा: मार्गदर्शन, सत्य का रास्ता दिखाना
  • मौ'इज़ा: नसीहत, उपदेश, चेतावनी
  • मुत्तक़ीन: परहेज़गार, अल्लाह से डरने वाले, जो बुराई से बचते हैं

तफ़सीर:

यह क़ुरआन सभी लोगों के लिए सत्य और असत्य के बीच का अंतर स्पष्ट करने वाला बयान है। यह हर उस व्यक्ति के लिए खुला संदेश है जो इसे पढ़ना या सुनना चाहता है, चाहे वह किसी भी जाति, भाषा या समय का हो। यह क़ुरआन अकेला ऐसा ग्रंथ है जो मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञानता से ज्ञान की ओर और गुमराही से सीधे रास्ते की ओर ले जाता है।

यह क़ुरआन सामान्य रूप से सभी लोगों के लिए मार्गदर्शन है, लेकिन इसका पूरा लाभ केवल वही लोग उठा पाते हैं जो अल्लाह से डरते हैं, अपने आचरण को सुधारते हैं और अपने दिलों को बुराइयों से पाक रखते हैं। यही मुत्तक़ीन (परहेज़गार) लोग हैं जो इसकी नसीहतों को दिल से स्वीकार करते हैं, इसकी चेतावनियों से सबक लेते हैं और इसके आदेशों पर अमल करते हैं।

यह क़ुरआन उनके लिए एक जीवंत उपदेश है जो उन्हें हर बुराई से रोकता है, उनके दिलों को नर्म करता है और उन्हें अल्लाह की राह पर चलने की ताकत देता है। जबकि जो लोग घमंडी हैं और सत्य से मुँह मोड़ते हैं, वे इससे लाभ नहीं उठा पाते, क्योंकि उनके दिलों पर मुहर लग चुकी होती है।

फ़ायदे:

  1. क़ुरआन एक सार्वभौमिक संदेश है — यह किसी एक जाति या समय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए आया है। यह हर उस व्यक्ति के लिए खुला है जो सत्य की तलाश में है।
  2. क़ुरआन से पूरा लाभ उठाने के लिए तक़वा (अल्लाह का डर) आवश्यक है। जिस व्यक्ति के दिल में अल्लाह का डर होता है, वह क़ुरआन की हर आयत को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए आया है। यह हमारे जीवन का मार्गदर्शक है, जो हमें सही रास्ता दिखाता है।
  4. क़ुरआन की नसीहतें उन्हीं के लिए फलदायी होती हैं जो इसे खुले दिल से सुनते हैं और अपनी ज़िंदगी में बदलाव लाने का इरादा रखते हैं। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भलाई उसी व्यक्ति को मिलती है जो अल्लाह की ओर झुकता है।
  5. यह आयत हमें आश्वस्त करती है कि क़ुरआन हर युग में प्रासंगिक है — इसके सिद्धांत कभी पुराने नहीं होते, और यह हर समय के हर इंसान के लिए मार्गदर्शन और रहमत है।


📜 आयत 136-140 — आल-इमरान

136أُولَٰئِكَ جَزَاؤُهُم مَّغْفِرَةٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَجَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَنِعْمَ أَجْرُ الْعَامِلِينَ
ऐसे ही लोगों की जज़ा उनके परवरदिगार की तरफ़ से बख्शिश है और वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं कि वह उनमें हमेशा रहेंगे और (अच्छे) चलन वालों की (भी) ख़ूब खरी मज़दूरी है
137قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِكُمْ سُنَنٌ فَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِينَ
तुमसे पहले बहुत से वाक़यात गुज़र चुके हैं पस ज़रा रूए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (अपने अपने वक्त क़े पैग़म्बरों को) झुठलाने वालों का अन्जाम क्या हुआ
138هَٰذَا بَيَانٌ لِّلنَّاسِ وَهُدًى وَمَوْعِظَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ
ये (जो हमने कहा) आम लोगों के लिए तो सिर्फ़ बयान (वाक़या) है मगर और परहेज़गारों के लिए हिदायत व नसीहत है
139وَلَا تَهِنُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَنتُمُ الْأَعْلَوْنَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
और मुसलमानों काहिली न करो और (इस) इत्तफ़ाक़ी शिकस्त (ओहद से) कुढ़ो नहीं (क्योंकि) अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो तुम ही ग़ालिब और वर रहोगे
140إِن يَمْسَسْكُمْ قَرْحٌ فَقَدْ مَسَّ الْقَوْمَ قَرْحٌ مِّثْلُهُ ۚ وَتِلْكَ الْأَيَّامُ نُدَاوِلُهَا بَيْنَ النَّاسِ وَلِيَعْلَمَ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَيَتَّخِذَ مِنكُمْ شُهَدَاءَ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الظَّالِمِينَ
अगर (जंगे ओहद में) तुमको ज़ख्म लगा है तो उसी तरह (बदर में) तुम्हारे फ़रीक़ (कुफ्फ़ार को) भी ज़ख्म लग चुका है (उस पर उनकी हिम्मत तो न टूटी) ये इत्तफ़ाक़ाते ज़माना हैं जो हम लोगों के दरमियान बारी बारी उलट फेर किया करते हैं और ये (इत्तफ़ाक़ी शिकस्त इसलिए थी) ताकि ख़ुदा सच्चे ईमानदारों को (ज़ाहिरी) मुसलमानों से अलग देख लें और तुममें से बाज़ को दरजाए शहादत पर फ़ायज़ करें और ख़ुदा (हुक्मे रसूल से) सरताबी करने वालों को दोस्त नहीं रखता
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
138आयत

अनुवाद — आल-इमरान 138

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सूरा आयत 138/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 136–140. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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