अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا تَهِنُوا – कमज़ोर मत पड़ो, हिम्मत मत हारो।
- وَلَا تَحْزَنُوا – उदास मत हो, ग़मगीन मत हो।
- الْأَعْلَوْنَ – सर्वोच्च, ऊँचे, ग़ालिब और बुलंद।
- إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ – अगर तुम सच्चे ईमानवाले हो (यहाँ "إن" का अर्थ "क्योंकि" या "जब कि" है)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालो! जिहाद और दुश्मन से मुक़ाबले में कमज़ोरी और सुस्ती न दिखाओ, और न ही उन मुसीबतों और नुक़सान पर उदास हो जाओ जो तुम्हें उहुद के मैदान में पहुँचे। तुम्हारे लिए यह रवैया उचित नहीं है, क्योंकि तुम अपने ईमान की बदौलत सबसे ऊँचे और बुलंद हो। तुम्हारी सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी आख़िरत में जन्नत की शक्ल में है, और दुनिया में भी अल्लाह की मदद से तुम्हारी ही फ़तह होगी और अंजाम तुम्हारे ही हक़ में बेहतर होगा। यह ऊँचाई और ग़लबा तुम्हें इसलिए मिला है क्योंकि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखते हो और उसकी शरीअत की पैरवी करते हो। अल्लाह का वादा है कि वह अपने मुत्तक़ी (परहेज़गार) बंदों की मदद करता है, इसलिए निराशा और ग़म की कोई गुंजाइश नहीं।
फ़ायदे (सबक़):
- मुसलमान की पहचान यह है कि वह मुश्किलों में भी कमज़ोर नहीं पड़ता, क्योंकि उसका भरोसा अल्लाह पर होता है।
- ईमान ही असली ताक़त और बुलंदी का ज़रिया है; जिसके पास ईमान है, वह कभी हारा हुआ नहीं होता।
- दुनिया की मुसीबतें और नुक़सान अस्थायी हैं, आख़िरत की कामयाबी ही असली कामयाबी है — यही सोच मुसलमान को सब्र और स्थिरता देती है।
- अल्लाह का वादा है कि ईमानवालों की मदद करेगा, इसलिए निराशा शैतान का काम है, और उम्मीद ईमान की निशानी है।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि हार के बाद भी हौसला बुलंद रखें, क्योंकि असली फ़तह उन्हीं की होती है जो अल्लाह पर यक़ीन रखते हैं।
📜 आयत 137-141 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 139
सूरा आल-इमरान आयत 139 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुसलमानों काहिली न करो और (इस) इत्तफ़ाक़ी शिकस्त (ओहद…सूरा आयत 139/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 137–141. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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