Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَكَيْفَ: तो कैसा होगा (उनका हाल)।
- جَمَعْنَاهُمْ: हम उन्हें इकट्ठा करेंगे।
- لِيَوْمٍ لَا رَيْبَ فِيهِ: उस दिन के लिए जिसमें कोई संदेह नहीं।
- وُفِّيَتْ: पूरा-पूरा दिया जाएगा।
- مَا كَسَبَتْ: जो कुछ उसने कमाया (अच्छे या बुरे कर्म)।
- لَا يُظْلَمُونَ: उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा।
तफसीर (व्याख्या):
जब ये लोग (अहले-किताब) दुनिया में अपनी मनमानी करते हैं, झूठ बोलते हैं, और अल्लाह की आयतों को छिपाते हैं, तो उन्हें लगता है कि सब कुछ उनके बस में है। लेकिन उस दिन का अंदाज़ा लगाओ जब अल्लाह तआला सभी इंसानों को — पहले और आखिरी — एक मैदान में इकट्ठा करेगा। वह दिन ऐसा है जिसके आने में कोई शक नहीं, कोई संदेह नहीं। उस दिन हर व्यक्ति को उसके किए हुए कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा — नेकी का बदला नेकी से, और गुनाह का बदला गुनाह के अनुसार।
उस दिन अल्लाह की रहमत और अद्ल का ऐसा नज़ारा होगा कि किसी पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं होगा। न किसी की नेकियाँ घटाई जाएँगी, न किसी के गुनाह बढ़ाए जाएँगे। हर शख्स को उसकी कमाई के मुताबिक ही मिलेगा। जिसने अच्छा किया, उसे अच्छा मिलेगा; जिसने बुरा किया, उसे बुरा मिलेगा। यह अल्लाह का पूरा इंसाफ़ है, जिसमें कोई कमी नहीं।
फ़ायदे (सबक):
- यक़ीन का पैगाम: यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि यह दुनिया ही सब कुछ नहीं है। एक दिन ज़रूर आएगा जब अल्लाह हर इंसान से उसके कर्मों का हिसाब लेगा। यह यक़ीन इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे बुराई से रोकता है।
- अल्लाह का अद्ल: अल्लाह तआला बिल्कुल इंसाफ़ करने वाला है। उसके यहाँ किसी के साथ कोई धोखा नहीं होगा। यह बात इंसान के दिल को सुकून देती है कि अगर दुनिया में कोई ज़ुल्म सहना पड़े, तो आख़िरत में अल्लाह उसका पूरा हिसाब लेगा।
- कर्मों की अहमियत: हमारी असली कमाई हमारे अच्छे कर्म हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़िंदगी को अच्छे कामों से भरना चाहिए, ताकि उस दिन हमारा पलड़ा भारी हो।
- ख़ौफ़ और उम्मीद: यह आयत एक तरफ़ अल्लाह के अज़ाब का ख़ौफ़ दिलाती है, तो दूसरी तरफ़ उसके इंसाफ़ की उम्मीद भी देती है। यही दोनों चीज़ें इंसान को सीधे रास्ते पर चलने में मदद करती हैं।
- दुनिया की आज़माइश: यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया एक इम्तिहान की जगह है। जो लोग यहाँ अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं, वे उस दिन पछताएँगे, लेकिन पछताने का वक़्त तब नहीं रहेगा। इसलिए आज ही अपने कर्मों को सुधार लें।
📜 आयत 23-27 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 25
सूरा आल-इमरान आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फ़िर उनकी क्या गत होगी जब हम उनको एक दिन…सूरा आयत 25/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


